अमेरिका में रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया PERM पर लगी रोक के बीच भारतीय IT कंपनियों के कारोबार पर पड़ने वाले असर को लेकर चर्चा तेज हो गई है। देश की प्रमुख IT कंपनियों टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) और इन्फोसिस ने कहा है कि फिलहाल उनके कारोबार पर बड़े असर की आशंका नहीं है। दोनों कंपनियां अमेरिका में स्थानीय कर्मचारियों की भर्ती, तकनीकी केंद्रों में निवेश और नियामकीय नियमों के पालन पर जोर दे रही हैं।
TCS और इन्फोसिस ने क्या कहा?
इन्फोसिस ने 10 अक्टूबर 2026 को शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि उसे अमेरिकी श्रम विभाग की PERM प्रक्रिया से जुड़े नए और लंबित आवेदनों पर रोक की जानकारी है। कंपनी ने कहा कि वह संबंधित अमेरिकी सरकारी एजेंसियों के साथ सहयोग करेगी और लागू नियमों का पालन जारी रखेगी। इन्फोसिस के मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों में उसके कारोबार पर किसी बड़े असर की उम्मीद नहीं है।
वहीं, TCS ने 9 अक्टूबर को कहा था कि वह अमेरिकी श्रम विभाग के निर्देशों का पालन करेगी। कंपनी ने बताया कि अमेरिका में उसकी स्थानीय भर्ती रणनीति महत्वपूर्ण है। TCS के वहां 31 कार्यालय और सेवा केंद्र हैं। कंपनी अगले पांच वर्षों में अमेरिका में 15,000 अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती की योजना भी घोषित कर चुकी है।
TCS के अनुसार, पिछले दो वर्षों में उसके PERM आवेदनों की संख्या 10 से कम रही है। कंपनी का मानना है कि इससे मौजूदा रोक का उसकी भर्ती रणनीति और ग्राहकों को दी जाने वाली सेवाओं पर बड़ा असर पड़ने की आशंका कम है।
क्या है PERM प्रक्रिया?
PERM का पूरा नाम Program Electronic Review Management है। यह अमेरिका में रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण है। इसके तहत कई मामलों में नियोक्ता को अमेरिकी श्रम विभाग से श्रम प्रमाणन प्राप्त करना होता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी कर्मचारी की नियुक्ति से योग्य अमेरिकी कर्मचारियों के अवसरों और वेतन पर प्रतिकूल असर न पड़े।
PERM प्रक्रिया में देरी होने से प्रभावित कर्मचारियों के स्थायी निवास के आवेदन आगे बढ़ने में समय लग सकता है। हालांकि, PERM पर रोक का अर्थ यह नहीं है कि सभी विदेशी कर्मचारियों के वीजा रद्द हो गए हैं या उन्हें तत्काल अमेरिका छोड़ना होगा। H-1B जैसे अस्थायी कार्य वीजा और ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया अलग-अलग हैं।
भारतीय IT कंपनियों के लिए अमेरिका क्यों अहम?
अमेरिका भारतीय IT कंपनियों के सबसे महत्वपूर्ण बाजारों में शामिल है। यहां बैंकिंग, स्वास्थ्य, रिटेल, मैन्युफैक्चरिंग और तकनीकी क्षेत्र में भारतीय कंपनियां सॉफ्टवेयर, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा और AI आधारित सेवाएं उपलब्ध कराती हैं।
यदि PERM प्रक्रिया में लंबे समय तक बाधाएं बनी रहती हैं, तो कुछ कंपनियों को कर्मचारियों की नियुक्ति, स्थानांतरण और दीर्घकालिक प्रतिभा प्रबंधन की योजनाओं में बदलाव करना पड़ सकता है। हालांकि, इसका असर हर कंपनी पर समान नहीं होगा। कंपनियों की PERM पर निर्भरता, स्थानीय कर्मचारियों की संख्या और प्रभावित आवेदनों की स्थिति अहम रहेगी।
स्थानीय भर्ती और तकनीकी निवेश पर जोर
TCS और इन्फोसिस के बयान संकेत देते हैं कि अमेरिकी बाजार में स्थानीय प्रतिभाओं की भर्ती और तकनीकी केंद्रों में निवेश उनकी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। स्थानीय कर्मचारियों की मदद से कंपनियां ग्राहकों के करीब रह सकती हैं और बाजार की जरूरतों के अनुसार सेवाएं दे सकती हैं।
फिलहाल दोनों कंपनियों ने अपने कारोबार को लेकर भरोसा जताया है। हालांकि, आगे का वास्तविक असर अमेरिकी सरकार के अगले निर्देशों, रोक की अवधि और प्रभावित आवेदनों की संख्या पर निर्भर करेगा। कर्मचारियों के लिए स्थायी निवास में देरी की आशंका बनी रह सकती है, जबकि कंपनियों को भर्ती और प्रतिभा प्रबंधन की रणनीति पर लगातार नजर रखनी होगी।