मुंबई। ICICI बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही (Q2FY27) के नतीजों में मजबूत प्रदर्शन किया है। जुलाई से सितंबर 2026 के दौरान बैंक की कर्ज वृद्धि, ब्याज से आय और एसेट क्वालिटी ने ब्रोकरेज फर्मों का ध्यान खींचा है। नतीजों के बाद जेफरीज, नुवामा, मोतीलाल ओसवाल, सेंट्रम ब्रोकिंग और एम्के जैसी ब्रोकरेज फर्मों ने बैंक की संभावनाओं पर सकारात्मक रुख जताया है। लंबी अवधि में शेयर में 32 फीसदी तक की तेजी की संभावना बताई गई है।
30% बढ़ा कर्ज, डिपॉजिट में भी मजबूत ग्रोथ
सितंबर तिमाही में ICICI बैंक का कर्ज सालाना आधार पर करीब 30 फीसदी बढ़ा। वहीं, कुल डिपॉजिट में 27.1 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। इसमें 18 अरब डॉलर के FCNR(B) डिपॉजिट का महत्वपूर्ण योगदान रहा। हालांकि, इस प्रभाव को हटाने के बाद भी कर्ज में सालाना 24 फीसदी की वृद्धि रही। कोर डिपॉजिट में भी सालाना आधार पर 17 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) सालाना आधार पर 18 फीसदी बढ़ी। इस दौरान रिटेल, SME और कॉरपोरेट लोन में अच्छी वृद्धि देखने को मिली। दूसरी ओर, क्रेडिट कार्ड पोर्टफोलियो का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा।
नुवामा और जेफरीज को ग्रोथ पर भरोसा
नुवामा ने ICICI बैंक को बैंकिंग सेक्टर की अपनी टॉप पिक्स में शामिल किया है। ब्रोकरेज के मुताबिक, बैंक की क्रेडिट ग्रोथ प्रतिस्पर्धी बैंकों से बेहतर है। मजबूत प्रावधान, भरोसेमंद प्रबंधन और बेहतर एसेट क्वालिटी इसकी प्रमुख ताकत हैं। बैंक का ग्रॉस NPA अनुपात घटकर 1.2 फीसदी पर आ गया।
जेफरीज ने वित्त वर्ष 2027 से 2029 के लिए कमाई के अनुमान में 5-6 फीसदी की बढ़ोतरी की है। ब्रोकरेज को इस अवधि में मुनाफे की औसत सालाना वृद्धि करीब 16 फीसदी रहने की उम्मीद है। मार्जिन में संभावित सुधार और ब्याज दरों में बदलाव से मिलने वाले लाभ को भी सकारात्मक माना गया है।
मोतीलाल ओसवाल, सेंट्रम और एम्के भी सकारात्मक
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज ने बैंक की कमाई की मजबूती और गुणवत्ता को बेहतर बताया है। ब्रोकरेज ने वित्त वर्ष 2028 के लिए अर्निंग अनुमान में 3 फीसदी की बढ़ोतरी की है। वहीं, सेंट्रम ब्रोकिंग ने कहा कि आगे मजबूत क्रेडिट ग्रोथ बनाए रखने के लिए CASA डिपॉजिट बढ़ाना अहम होगा।
एम्के के मुताबिक, बेहतर कारोबार वृद्धि, खर्च पर नियंत्रण और सीमित क्रेडिट लॉस बैंक के प्रदर्शन को सहारा दे सकते हैं। सितंबर तिमाही में फ्रेश स्लिपेज घटकर 4,830 करोड़ रुपये रहे, जबकि क्रेडिट कॉस्ट में भी सुधार दर्ज किया गया।
निवेशकों को किन जोखिमों पर ध्यान देना चाहिए?
ICICI बैंक के सामने आर्थिक सुस्ती से कर्ज की मांग प्रभावित होने और शीर्ष प्रबंधन में बदलाव जैसे जोखिम बने हुए हैं। इसके अलावा, FCNR(B) डिपॉजिट से जुड़ी फंडिंग लागत निकट अवधि में मार्जिन पर दबाव डाल सकती है। ऐसे में निवेशकों के लिए बैंक की आगामी तिमाहियों में क्रेडिट ग्रोथ, डिपॉजिट की गुणवत्ता और मार्जिन पर नजर रखना जरूरी होगा।
नोट: ब्रोकरेज की राय और शेयर में तेजी के अनुमान बाजार जोखिमों के अधीन हैं। यह लेख निवेश की सलाह नहीं है।