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The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation > बैंकिंग > कोटक महिंद्रा बैंक के ब्रांच मैनेजर का 31 करोड़ का घोटाला: जुए की लत में उड़ा दिए सरकारी पैसे
बैंकिंग

कोटक महिंद्रा बैंक के ब्रांच मैनेजर का 31 करोड़ का घोटाला: जुए की लत में उड़ा दिए सरकारी पैसे

Shashank Pathak
Last updated: 06/07/2025 3:39 PM
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Shashank Pathak
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एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जिसमें कोटक महिंद्रा बैंक का एक ब्रांच मैनेजर अपनी जुए और सट्टेबाज़ी की लत के चलते जनता के 31 करोड़ रुपये उड़ा बैठा। बिहार सरकार के एक महत्वपूर्ण खाते से की गई इस भारी-भरकम धोखाधड़ी ने बैंकिंग सिस्टम, ग्राहक डाटा सुरक्षा और सरकारी फंड मैनेजमेंट पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कैसे हुआ घोटाला?
इस ब्रांच मैनेजर ने चेक क्लोनिंग और फर्जी दस्तावेज़ों के ज़रिए इस घोटाले को अंजाम दिया। उसने बिहार सरकार के जिला भूमि अधिग्रहण अधिकारी (DLAO) के नाम पर जारी किए गए चेकों पर फर्जी हस्ताक्षर कर उन्हें भुनाया। चूंकि वह खुद शाखा प्रमुख था, इसलिए हस्ताक्षरों की पुष्टि और सत्यापन उसी के जिम्मे था। इस तरह दो साल तक उसने बिना किसी शक के लगभग 31.93 करोड़ रुपये का गबन किया।

ग्राहकों की KYC का हुआ गलत इस्तेमाल
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस फ्रॉड को छिपाने के लिए उसने कोटक महिंद्रा बैंक के ग्राहकों की आधार और KYC जानकारियों का दुरुपयोग किया। उसने 21 नए खाते खोले जिनमें जुए से जुड़े लेनदेन किए गए। इन खातों का इस्तेमाल मनी म्यूल (Money Mule) की तरह किया गया ताकि असली पहचान छिपाई जा सके। ग्राहकों को इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि उनकी पहचान का इस तरह गलत इस्तेमाल हो रहा है।

पैसा गया कहां?
चुराया गया पैसा दक्षिण अफ्रीका और फिलीपींस में स्थित ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाज़ी ऐप्स में भेजा गया। ये ऐप्स भारत में प्रतिबंधित हैं, फिर भी उसने अंतरराष्ट्रीय ट्रांजैक्शनों के ज़रिए वहां सट्टा खेला। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में सामने आया कि उसने मनी लॉन्ड्रिंग के ज़रिए यह पैसा विदेशी ऐप्स में निवेश किया। साल 2021 में ही कोटक महिंद्रा बैंक ने इस पर संज्ञान लिया और उसे नौकरी से निकाल दिया गया। बाद में मामला पुलिस और ED को सौंपा गया।

जांच कैसे शुरू हुई?
साल 2021 में एक RTGS ट्रांजैक्शन के दौरान बैंक के एक ईमानदार कर्मचारी को संदेह हुआ। जब उसने DLAO से सीधे संपर्क किया तो पता चला कि उन्होंने कोई ट्रांजैक्शन अनुरोध ही नहीं किया था। यहीं से परतें खुलनी शुरू हुईं और ब्रांच मैनेजर की धोखाधड़ी का भंडाफोड़ हुआ। उसे उसी समय गिरफ्तार कर लिया गया और फिलहाल वह जमानत पर बाहर है।

बैंक की भूमिका और प्रतिक्रिया
कोटक महिंद्रा बैंक ने इस पूरी घटना में खुद की भूमिका को नकारते हुए बयान दिया है कि यह धोखाधड़ी उनके आंतरिक सिस्टम द्वारा पकड़ी गई और तुरंत कार्रवाई की गई। बैंक ने कहा कि यह गतिविधि पूर्व कर्मचारी द्वारा व्यक्तिगत रूप से की गई और उन्होंने ग्राहकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। हालांकि सवाल यह भी है कि दो साल तक कोई निगरानी सिस्टम इस धोखाधड़ी को पकड़ क्यों नहीं सका?

प्रवर्तन निदेशालय की एंट्री और नया मामला
27 जून 2025 को बिहार पुलिस ने इस ब्रांच मैनेजर के खिलाफ दूसरा मामला दर्ज किया, क्योंकि ईडी ने इसमें मनी लॉन्ड्रिंग के सबूत पाए थे। कानून के अनुसार, मनी लॉन्ड्रिंग की जांच का अधिकार सिर्फ ईडी के पास होता है। इस मामले में ईडी ने एक ECIR (FIR के समान) दर्ज कर ली है और अपनी स्वतंत्र जांच शुरू कर दी है। ईडी के अनुसार, आरोपी ने विदेशी बैंक खातों और संस्थाओं के ज़रिए पैसा इधर-उधर किया ताकि भारतीय एजेंसियों की नज़र से बच सके। इस मामले में इंटरनेशनल एंगल के जुड़ने से जांच और भी व्यापक हो गई है।

कौन हैं असली पीड़ित?
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा नुकसान उन ग्राहकों को हो सकता था जिनके नाम और पहचान का इस्तेमाल फर्जी खातों में किया गया। ऐसे ग्राहकों को कानूनी पचड़ों का सामना करना पड़ सकता था यदि समय पर धोखाधड़ी का पता न चलता। बैंक की ओर से कहा गया है कि वे जांच एजेंसियों के साथ पूरी तरह सहयोग कर रहे हैं और सभी ग्राहकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

सीख क्या मिलती है?
यह मामला बताता है कि बैंकिंग सिस्टम में जब शीर्ष स्तर पर बैठे लोग ही नियमों का उल्लंघन करने लगें, तो लाखों लोगों की मेहनत की कमाई खतरे में पड़ जाती है। यह न सिर्फ सिस्टम की कमजोरी को उजागर करता है बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे ग्राहक की निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल किया जा सकता है। साथ ही यह घटना एक बड़ा सबक है कि डिजिटल सुरक्षा, डाटा प्रोटेक्शन और पारदर्शी बैंकिंग प्रक्रिया को और मज़बूत करने की ज़रूरत है।

आवश्यकता
कोटक महिंद्रा बैंक के इस ब्रांच मैनेजर की कहानी सिर्फ एक बैंकिंग फ्रॉड नहीं है, बल्कि एक ऐसे सिस्टम का आईना है जिसमें नियमों की अनदेखी करके किसी को करोड़ों रुपये लूटने का मौका मिल गया। दो साल तक चलता रहा यह घोटाला यह सवाल खड़ा करता है कि क्या हमारे बैंकिंग सिस्टम में अब भी इतने छेद हैं जिनसे कोई भी बड़ा फ्रॉड आसानी से हो सकता है? अब देखना यह होगा कि कानून इस मामले में कितनी तेजी से और कितनी सख्ती से कार्रवाई करता है। ग्राहकों को भी सतर्क रहने की ज़रूरत है और अपने बैंकिंग डिटेल्स को लेकर जागरूक रहने की अहमियत अब और भी बढ़ गई है।

TAGGED:Aadhaar KYCEDEnforcement DirectorateFeaturedIndustrial Empirekotak mahindra bankKotak Mahindra Bank ScamRTGS Transactions
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