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ऑटो/टेक

Google का नया दांव : ला रहा यूट्यूब पर शहरी और ग्रामीण दर्शकों को अलग-अलग साधने का फीचर

Shashank Pathak
Last updated: 12/09/2025 1:34 PM
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Shashank Pathak
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Google YouTube नया फीचर – शहरी और ग्रामीण दर्शकों को अलग-अलग टारगेट करने की सुविधा
ग्रामीण और शहरी दर्शकों को अलग-अलग विज्ञापन दिखाने के लिए Google लाएगा नया फीचर
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गूगल इंडिया अब विज्ञापनदाताओं के लिए एक ऐसा फीचर लेकर आ रहा है, जो उन्हें शहरी और ग्रामीण दर्शकों तक अलग-अलग पहुंचने की सुविधा देगा। Google इंडिया की ब्रांड सॉल्यूशंस प्रमुख शुभा पई ने बताया कि यह फीचर खास तौर पर भारत के लिए डिजाइन किया गया है। यह पहली बार होगा जब विज्ञापनदाता यूट्यूब पर ग्रामीण और शहरी दर्शकों को अलग-अलग साध सकेंगे। उन्होंने कहा कि यह सुविधा टीवी और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर अभी मौजूद नहीं है। भारत जैसे देश, जहां उपभोक्ता वर्ग सांस्कृतिक प्राथमिकताओं, व्यवहार और क्रय शक्ति के आधार पर अलग-अलग है, वहां यह फीचर ब्रांडों को अपनी रणनीतियों को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद करेगा।

पायलट प्रोजेक्ट से शुरुआत
फिलहाल यह एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया है। यूट्यूब की यह कवायद ऐसे समय आई है जब भारत में यूट्यूब शॉर्ट्स के दर्शकों की संख्या 65 करोड़ से अधिक हो चुकी है। प्लेटफॉर्म के आंकड़ों के मुताबिक, यूट्यूब CTV (कनेक्टेड टीवी) पर देखे जाने वाले कंटेंट का 50 फीसदी हिस्सा 21 मिनट से ज्यादा का होता है। यह दर्शाता है कि भारतीय दर्शक केवल छोटे वीडियो ही नहीं, बल्कि लंबे कंटेंट को भी बड़े ध्यान से देखते हैं।

मोबाइल से लेकर बड़ी स्क्रीन तक
शुभा पई ने बताया कि यूट्यूब की सबसे बड़ी ताकत यह है कि यहां दर्शक शॉर्ट्स को न केवल मोबाइल पर, बल्कि बड़ी स्क्रीन पर भी देख सकते हैं। भारत में हर साल CTV पर शॉर्ट्स देखने वाले दर्शकों की संख्या दोगुनी हो रही है। यही वजह है कि ब्रांड्स अब मल्टी-फॉर्मेट रणनीति की ओर बढ़ रहे हैं। सिर्फ एक ही फॉर्मेट पर निर्भर रहने के बजाय, जब ब्रांड शॉर्ट्स, CTV और लंबे कंटेंट को मिलाकर विज्ञापन रणनीति अपनाते हैं, तो उन्हें तीन बड़े फायदे मिलते हैं –

-विज्ञापन की लागत घटती है,
-ब्रांड की पहुंच बढ़ती है,
-कन्वर्ज़न यानी बिक्री में उल्लेखनीय सुधार होता है।

क्रिएटर पार्टनरशिप हब
गूगल एडवरटाइजिंग के तहत यूट्यूब जल्द ही क्रिएटर पार्टनरशिप हब भी पेश कर सकता है। यह हब विज्ञापनदाताओं को नए क्रिएटर्स खोजने, साझेदारी मजबूत करने और ऑथेंटिक क्रिएटर कंटेंट को अपनी रणनीतियों में शामिल करने में मदद करेगा। शुभा पई ने उदाहरण दिया कि किस तरह मिंत्रा को अपने “बिग फैशन फेस्टिवल” के दौरान 20 फीसदी ऑर्डर सीधे क्रिएटर-आधारित यूट्यूब विज्ञापनों से मिले। यह दिखाता है कि ब्रांड-क्रिएटर साझेदारी अब केवल इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि ठोस कारोबारी नतीजे भी दे रही है।

नया फीचर : पीक प्वाइंट्स
यूट्यूब अगले साल पीक प्वाइंट्स नाम का नया फीचर भी लाने जा रहा है। इसे गूगल के जेमिनी एआई की मदद से तैयार किया गया है। यह ब्रांडों को बताएगा कि किसी वीडियो या कंटेंट के कौन-से क्षण ऐसे हैं, जब दर्शकों की सबसे अधिक भागीदारी होती है। इससे विज्ञापनदाता अपने विज्ञापनों को उन्हीं क्षणों पर प्लेस कर पाएंगे, जब दर्शक पूरी तरह जुड़ाव महसूस कर रहे हों। इसका असर यह होगा कि विज्ञापन न केवल ज्यादा प्रभावी होंगे, बल्कि ब्रांड मेसेज भी आसानी से दर्शकों तक पहुंचेगा।

शॉपेबल विज्ञापन और नई तकनीकें
पिछले साल यूट्यूब ने शॉपेबल CTV विज्ञापन पेश किए थे। इसके तहत दर्शक टीवी स्क्रीन पर दिख रहे उत्पादों को सीधे QR कोड या “Send-to-phone” ऑप्शन से एक्सप्लोर कर सकते हैं। इससे उपभोक्ता अनुभव और भी इंटरेक्टिव हो गया है। मोबाइल पर, यूट्यूब ने इमर्सिव मास्टहेड की शुरुआत की, जो नए उत्पादों को हाईलाइट करने के लिए बनाया गया है। इस तरह यूट्यूब उपभोक्ता की पूरी यात्रा – खोज, स्क्रॉलिंग, स्ट्रीमिंग से लेकर शॉपिंग तक को कवर करता है।

क्यों है भारत में खास
भारत यूट्यूब के लिए एक बेहद बड़ा और विविधतापूर्ण बाज़ार है। यहां 18 साल से अधिक उम्र का औसत ऑनलाइन यूज़र रोज़ाना 72 मिनट से ज्यादा यूट्यूब देखता है। अप्रैल 2025 तक यूट्यूब CTV ने भारत में 7.5 करोड़ से ज्यादा लोगों तक पहुंच बनाई है। ऐसे में, जब विज्ञापनदाता शहरी और ग्रामीण दर्शकों की पसंद को अलग-अलग समझकर विज्ञापन रणनीति बनाएंगे, तो ब्रांड्स को सही उपभोक्ता तक पहुंचने और परिणाम हासिल करने में बड़ी मदद मिलेगी।

डाटा तय करेगा भविष्य
गूगल इंडिया की यह पहल स्पष्ट संकेत देती है कि आने वाले समय में विज्ञापन और अधिक डेटा-ड्रिवन और कस्टमाइज्ड होने वाले हैं। शहरी दर्शक, जिनकी प्राथमिकताएं और क्रय शक्ति अलग हैं, और ग्रामीण दर्शक, जिनकी आवश्यकताएं भिन्न हैं – दोनों के लिए अलग रणनीतियां बनाना अब आसान होगा। कुल मिलाकर, यूट्यूब अब मनोरंजन का प्लेटफॉर्म होने के साथ-साथ एक ऐसा विज्ञापन पारिस्थितिकी तंत्र बन चुका है, जो ब्रांड्स को न केवल दृश्यता बल्कि ठोस परिणाम भी देता है। गूगल का यह नया फीचर भारतीय विज्ञापन बाजार में क्रांति लाने की क्षमता रखता है। एक तरफ यूट्यूब की ये नई पहलें विज्ञापनदाताओं और क्रिएटर्स के लिए नए अवसर खोलने वाली हैं, वहीं दूसरी तरफ दर्शकों के अनुभव को लेकर अभी भी सवाल बने हुए हैं।

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