Diwali Shopping: दीवाली का मौसम आते ही ऑनलाइन खरीदारी की रफ्तार तेज हो गई है। लोग ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर नए कपड़े, गैजेट्स, गिफ्ट्स और डेकोरेशन आइटम्स की खरीद में जुटे हैं। लेकिन इसी डिजिटल उत्साह के बीच एक बड़ा खतरा भी सिर उठा रहा है – साइबर फ्रॉड। एक ताज़ा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि हर तीन में से एक भारतीय खरीदार इस त्योहारी सीजन में किसी न किसी ऑनलाइन ठगी का शिकार हुआ है, जिनमें से 37 फीसदी लोगों को वास्तविक आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
मैकैफी की रिपोर्ट ने किया खुलासा
साइबर सुरक्षा कंपनी मैकैफी (McAfee) के ताज़ा अध्ययन में बताया गया है कि भारत में ऑनलाइन खर्च और डिजिटल शॉपिंग में आई बढ़ोतरी के साथ साइबर अपराधियों की सक्रियता भी बढ़ी है। फर्जी वेबसाइट, डीपफेक विज्ञापन, नकली गिफ्ट कार्ड, और फर्जी ओटीपी मैसेज जैसे हथकंडों से ठग अब आम उपभोक्ता को निशाना बना रहे हैं।
मैकैफी इंडिया के वरिष्ठ निदेशक (इंजीनियरिंग) प्रतिम मुखर्जी ने कहा, “त्योहार खुशियों का समय होता है, लेकिन इसी दौरान साइबर ठग भी सबसे ज़्यादा सक्रिय रहते हैं। नई तकनीक के साथ अब खतरे भी एआई की रफ्तार से बढ़ रहे हैं।”
ऑनलाइन शॉपिंग क्यों बढ़ी?
त्योहारी सीजन में ऑनलाइन खरीदारी के पीछे कई कारण हैं। एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, 64% उपभोक्ता बेहतर डिस्काउंट की वजह से ऑनलाइन खरीदारी करना पसंद करते हैं, जबकि 60% लोगों के लिए यह एक सुविधाजनक विकल्प है। वहीं 52% खरीदार उत्पादों की विविधता की वजह से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म चुनते हैं और 51% ग्राहक तेज़ डिलीवरी को सबसे अहम मानते हैं। रिपोर्ट यह भी बताती है कि अब 77% भारतीय उपभोक्ता अपने मोबाइल फोन के जरिए ही शॉपिंग करते हैं, जिनमें 25 से 44 वर्ष के युवा सबसे बड़े ऑनलाइन ग्राहक बन चुके हैं। यह डिजिटल बदलाव खरीदारी को तो बेहद आसान बना रहा है, लेकिन इसके साथ साइबर ठगी और ऑनलाइन फ्रॉड के खतरे भी तेजी से बढ़ रहे हैं।
फर्जीवाड़े के नए तरीके: डीपफेक और नकली वेबसाइटें
साइबर अपराधियों ने अब तकनीक का नया चेहरा अपनाया है डीपफेक और एआई आधारित फर्जीवाड़ा। सेलेब्रिटी की आवाज़ या चेहरा लगाकर नकली विज्ञापन बनाए जा रहे हैं, जिससे उपभोक्ता असली और नकली ऑफ़र्स में फर्क नहीं कर पा रहे। रिपोर्ट में कहा गया है कि 91% भारतीय खरीदारों को शॉपिंग से जुड़े संदिग्ध संदेश मिले हैं। इनमें –
– फर्जी गिफ्ट कार्ड्स (49%)
– सीमित समय की छूट वाले संदेश (40%)
– और नकली रिफंड लिंक (27%) प्रमुख हैं।
औसतन, एक भारतीय यूज़र को रोज़ 12 बार धोखाधड़ी के प्रयासों का सामना करना पड़ता है, जिनमें टेक्स्ट, ईमेल और सोशल मीडिया विज्ञापन शामिल हैं।
भावनात्मक नुकसान भी गहरा
आर्थिक नुकसान के अलावा, साइबर फ्रॉड का भावनात्मक असर भी गहरा है। रिपोर्ट के अनुसार, ठगी का शिकार हुए 91% लोगों ने गुस्सा, डर या शर्मिंदगी महसूस की, जबकि 28% पीड़ितों ने शर्म की वजह से अपना अनुभव साझा ही नहीं किया। इससे यह भी पता चलता है कि साइबर अपराध सिर्फ पैसों का नहीं बल्कि मानसिक तनाव का कारण भी बनता जा रहा है।
सुरक्षा के लिए क्या करें?
त्योहारी खरीदारी के दौरान साइबर ठगी से बचने के लिए विशेषज्ञ कुछ आसान कदम सुझाते हैं –
– केवल आधिकारिक वेबसाइट या ऐप से ही खरीदारी करें।
– किसी भी लिंक या ऑफ़र पर क्लिक करने से पहले जांच करें।
– बैंक डिटेल्स या ओटीपी कभी साझा न करें।
अगर कोई संदिग्ध गतिविधि दिखे तो तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर रिपोर्ट करें।
डिजिटल इंडिया को चाहिए डिजिटल सुरक्षा
त्योहारों का यह डिजिटल मौसम भारत के तेजी से बदलते उपभोक्ता व्यवहार को दिखाता है, लेकिन इसके साथ ही साइबर सुरक्षा को लेकर जागरूकता भी जरूरी है। अगर उपभोक्ता सतर्क रहें, तो वे न सिर्फ ठगी से बच सकते हैं, बल्कि अपने त्योहारी उत्साह को सुरक्षित भी रख सकते हैं।