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The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation > फार्मा > रुपये में गिरावट: IT और Pharma कंपनियों के लिए मौका, कई उद्योगों की बढ़ सकती है मुश्किल
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रुपये में गिरावट: IT और Pharma कंपनियों के लिए मौका, कई उद्योगों की बढ़ सकती है मुश्किल

Last updated: 25/11/2025 3:46 PM
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Industrial Empire
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Pharma और IT कंपनियों को रुपये की गिरावट से बढ़ते मुनाफे का संकेत
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भारत में रुपये की कमजोर होती कीमत आम लोगों के लिए चिंता की वजह भले बने, लेकिन IT और Pharma (फार्मास्यूटिकल) बनाने वाली कंपनियों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं। विशेषज्ञों का कहना है कि डॉलर के मुकाबले रुपये में हो रही गिरावट इन कंपनियों की कमाई बढ़ा सकती है। स्वतंत्र मार्केट विश्लेषक अजय बोडके की मानें तो अगर रुपया 90 रुपये प्रति डॉलर के आसपास बना रहा, तो आईटी और फार्मा सेक्टर बड़े लाभ में रह सकते हैं।

89.54 रुपये प्रति डॉलर – अब तक का सबसे निचला स्तर
हाल ही में रुपया गिरकर 89.54 रुपये प्रति डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमजोर पड़ने और भारत–अमेरिका व्यापार समझौते में देरी से रुपये पर दबाव बढ़ा है। कुछ विशेषज्ञों का अनुमान है कि रुपया जल्द ही 90 रुपये प्रति डॉलर के स्तर को भी छू सकता है।

आईटी और Pharma को रुपये की कमजोरी से कैसे फायदा?
अजय बोडके बताते हैं कि कमजोर रुपया उन कंपनियों के लिए फायदेमंद है, जिनकी आय डॉलर जैसी विदेशी करेंसी में होती है, लेकिन संचालन और वेतन जैसी लागत रुपये में चुकाई जाती है। आईटी कंपनियों की 70–90% कमाई अमेरिका और यूरोप से आती है। इसलिए डॉलर की मजबूती सीधे इनके मुनाफे में इजाफा करती है। फार्मास्यूटिकल कंपनियों के लिए भी अमेरिकी बाजार अहम है, इसलिए ये कंपनियां भी रुपये के गिरने से लाभ कमा सकती हैं। टेक्सटाइल और अन्य निर्यात आधारित सेक्टरों पर इसका असर मिला–जुला रह सकता है। कुछ को फायदा मिलेगा तो कुछ पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा।

घरेलू उत्पादन करने वाली कंपनियों का होगा फ़ायदा
इक्विनॉमिक्स रिसर्च के संस्थापक जी. चोक्कलिंगम का कहना है कि रुपये की गिरावट का फायदा उन कंपनियों को भी होगा जो आयात पर निर्भर रहने के बजाय भारत में ही उत्पादन करती हैं। डॉलर मजबूत होने पर विदेश से आने वाला सामान महंगा हो जाता है, जिससे घरेलू उद्योग के लिए बाजार में अवसर बढ़ता है। सरकार की ओर से लगने वाली एंटी–डंपिंग ड्यूटी भी इन कंपनियों को अतिरिक्त सुरक्षा देती है।

हर सेक्टर को नहीं मिलेगा फायदा
रुपये की कमजोरी का बुरा असर उन उद्योगों पर पड़ सकता है जो कच्चा माल बड़ी मात्रा में विदेश से आयात करते हैं। अजय बोडके के अनुसार, तेल और गैस, एविएशन, पेंट, इलेक्ट्रॉनिक्स और एफएमसीजी जैसे सेक्टरों का खर्च बढ़ सकता है। इन कंपनियों को कच्चा तेल, टाइटेनियम डाइऑक्साइड, पैकेजिंग मटीरियल और इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स महंगे दामों पर खरीदने पड़ सकते हैं। ऐसे में इन कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ सकता है।

शेयर बाजार में दिखा असर
सोमवार को रुपये की कमजोरी का सीधा असर शेयर बाजार में नजर आया। निफ्टी आईटी इंडेक्स 1.5 फीसदी से ज्यादा चढ़ गया, यानी निवेशकों ने आईटी कंपनियों में दिलचस्पी दिखाई। Pharma सेक्टर में भी मजबूती दिखी। वहीं टेक्सटाइल कंपनियों के शेयरों में मिला–जुला प्रदर्शन देखने को मिला। विश्लेषकों का कहना है कि अगर रुपया और कमजोर होता है, तो इन सेक्टरों में निवेश और बढ़ सकता है।

छू सकता है रुपया 90 के स्तर को
कोटक सिक्योरिटीज के करंसी विशेषज्ञ अनिंद्या बनर्जी का कहना है कि वैश्विक बाजारों में निवेशक जोखिम लेने से बच रहे हैं, डॉलर मजबूत हो रहा है और भारत–अमेरिका व्यापार वार्ता से जुड़े सवाल भी बने हुए हैं। इन कारणों से रुपये पर दबाव बना हुआ है। उनका अनुमान है कि रुपया आने वाले दिनों में 88.70 से 90.30 रुपये के बीच रह सकता है।

गिरावट चिंता का कारण
अजय बोडके के अनुसार, रुपये की यह गिरावट बड़ी चिंता की बात नहीं, जब तक यह धीरे–धीरे हो रही है और अचानक से तेज गिरावट नहीं दिखती। इस साल अब तक रुपया 4.13% कमजोर हुआ है, जो एशियाई देशों में सबसे खराब प्रदर्शन माना जा रहा है। हालांकि सोमवार को आरबीआई द्वारा रुपये को सपोर्ट करने के संकेत मिलते ही रुपया थोड़ा मजबूत होकर 89.08 रुपये प्रति डॉलर तक आ गया। विशेषज्ञों की सलाह है कि आम निवेशक केवल रुपये की उतार–चढ़ाव पर अपने निवेश में बड़ा बदलाव न करें, जब तक कि गिरावट लंबे समय तक और तेज गति से न बनी रहे।

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