भारत और जर्मनी के रिश्तों में एक अहम मोड़ आया है। जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के दो दिवसीय भारत दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच transit visa, डिफेंस, ट्रेड, टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, एआई और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई दिशा मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात में जर्मन चांसलर की मेजबानी की, जहां 27 अहम मुद्दों पर चर्चा हुई और 19 बड़े समझौतों पर सहमति बनी। इसके अलावा, आपसी संपर्क, इंडो-पैसिफिक और हरित विकास से जुड़े क्षेत्रों में 8 अन्य घोषणाएं भी की गईं।
पीएम मोदी–जर्मन चांसलर की अहम मुलाकात
प्रधानमंत्री मोदी और चांसलर मर्ज की यह मुलाकात केवल औपचारिक नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस दौरान दोनों देशों ने रक्षा औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने के लिए संयुक्त घोषणा पर हस्ताक्षर किए। पीएम मोदी ने कहा कि भारत और जर्मनी अपनी-अपनी डिफेंस इंडस्ट्री के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए एक ठोस रोडमैप पर काम करेंगे। इससे सह-विकास और सह-उत्पादन के नए अवसर खुलेंगे, जो भारत की ‘मेक इन इंडिया’ पहल को भी मजबूती देंगे।
भारतीय पासपोर्ट धारकों को बड़ी राहत
इस मुलाकात का एक बड़ा और आम लोगों से जुड़ा फैसला यह रहा कि अब भारतीय पासपोर्ट धारकों को जर्मनी से होकर ट्रांजिट करने के लिए वीजा की जरूरत नहीं होगी। इसे भारत-जर्मनी संबंधों में भरोसे और बढ़ते आपसी सहयोग का संकेत माना जा रहा है। इससे यात्रियों को सुविधा मिलेगी साथ ही व्यापार और लोगों के बीच संपर्क भी आसान होगा।
रक्षा और सुरक्षा सहयोग पर पीएम मोदी का बयान
प्रधानमंत्री मोदी ने चांसलर मर्ज के साथ बैठक के बाद कहा कि रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में बढ़ता सहयोग दोनों देशों के बीच गहरे आपसी विश्वास और साझा दृष्टिकोण को दर्शाता है। उन्होंने जर्मन चांसलर का रक्षा व्यापार से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए आभार जताया। इसके साथ ही उभरती और महत्वपूर्ण तकनीकों में सहयोग बढ़ाने के लिए चार अहम समझौते किए गए।
सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों पर खास जोर
भारत-जर्मनी के बीच हुए 19 समझौतों में सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों से जुड़े फैसले बेहद अहम माने जा रहे हैं। सेमीकंडक्टर आज हर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण की रीढ़ हैं, वहीं लिथियम और कोबाल्ट जैसे खनिज बैटरी और ग्रीन टेक्नोलॉजी के लिए जरूरी हैं। दोनों देशों ने इन क्षेत्रों में साझेदारी को मजबूत करने के लिए संयुक्त आशय घोषणाएं कीं, जिससे भविष्य में सप्लाई चेन और तकनीकी आत्मनिर्भरता को बल मिलेगा।
आर्थिक और औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा
द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग को मजबूत करने के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEO) के फोरम की स्थापना का ऐलान किया गया। इसे संयुक्त भारत-जर्मनी आर्थिक और निवेश समिति के हिस्से के रूप में जोड़ा जाएगा। इसके अलावा दूरसंचार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने के लिए कई एमओयू पर हस्ताक्षर हुए।
शिक्षा, आयुर्वेद और हेल्थकेयर में साझेदारी
भारत और जर्मनी ने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी सहयोग को नई ऊंचाई दी है। अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान और जर्मनी के चैरिटे विश्वविद्यालय के बीच एमओयू हुआ है। उच्च शिक्षा पर भारत-जर्मनी रोडमैप पर भी चर्चा हुई। वहीं हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स की फेयर और सस्टेनेबल भर्ती के लिए ग्लोबल स्किल पार्टनरशिप पर संयुक्त घोषणा की गई।
ग्रीन एनर्जी और क्लाइमेट पर फोकस
हरित विकास इस साझेदारी का एक मजबूत स्तंभ बनकर उभरा है। ग्रीन अमोनिया, रिन्यूएबल एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन और बैटरी स्टोरेज जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। भारत-जर्मनी ग्रीन एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट पार्टनरशिप के तहत 1.24 बिलियन यूरो की नई फंडिंग का ऐलान किया गया, जिससे ई-बस सेवा और क्लाइमेट-रेजिलिएंट शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर को समर्थन मिलेगा।
स्किल डेवलपमेंट और सांस्कृतिक सहयोग
हैदराबाद में रिन्यूएबल एनर्जी स्किलिंग के लिए नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना, खेलों में सहयोग, डाक सेवाओं में साझेदारी और यूथ हॉकी डेवलपमेंट जैसे समझौते भी इस दौरे का हिस्सा रहे। इसके साथ ही अहमदाबाद में जर्मनी के मानद काउंसल का उद्घाटन किया गया, जो दोनों देशों के रिश्तों को जमीनी स्तर पर मजबूत करेगा।
भारत-जर्मनी रिश्तों का नया अध्याय
यह दौरा भारत और जर्मनी के संबंधों को रणनीतिक साझेदारी की नई ऊंचाई पर ले जाता है। डिफेंस, टेक्नोलॉजी, ग्रीन एनर्जी और स्किल डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में हुए ये समझौते आने वाले वर्षों में दोनों देशों के लिए विकास और स्थिरता के नए रास्ते खोलेंगे।