Gold silver price: सोना-चांदी ने रचा इतिहास, चांदी हुई 3 लाख रुपये के पार कीमती धातुओं के बाजार में आज ऐसा उछाल देखने को मिला, जिसने निवेशकों को चौंका दिया। सोना और चांदी दोनों ने नए रिकॉर्ड बना लिए। घरेलू वायदा बाजार MCX पर सोने का भाव 1.45 लाख रुपये के करीब पहुंच गया, जबकि चांदी ने पहली बार 3 लाख रुपये प्रति किलो का आंकड़ा पार कर इतिहास रच दिया। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी दोनों धातुएं ऑल टाइम हाई पर कारोबार करती दिखीं। इस तेजी के पीछे वैश्विक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग को बड़ी वजह माना जा रहा है।
घरेलू बाजार में रिकॉर्ड तेजी
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने की शुरुआत आज मजबूती के साथ हुई। फरवरी कॉन्ट्रैक्ट ने शुरुआती कारोबार में ही पिछले बंद स्तर को पीछे छोड़ दिया। खबर लिखे जाने तक सोना 1,44,400 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा था और दिन के दौरान इसने 1,45,500 रुपये का उच्च स्तर भी छू लिया। वहीं चांदी ने निवेशकों को और ज्यादा हैरान किया। मार्च कॉन्ट्रैक्ट ने तेजी के साथ शुरुआत की और कुछ ही घंटों में 3,01,000 रुपये प्रति किलो का स्तर पार कर गया। यह चांदी का अब तक का सबसे ऊंचा भाव है।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिला मजबूत सपोर्ट
घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोना-चांदी की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला। कॉमेक्स पर सोना 4,660 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गया, जबकि चांदी 94 डॉलर प्रति औंस के नए रिकॉर्ड स्तर पर कारोबार करती नजर आई। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका द्वारा नए टैरिफ की धमकियों और वैश्विक तनाव के कारण निवेशक शेयर बाजार से पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं। इसका सीधा फायदा सोना और चांदी जैसी कीमती धातुओं को मिल रहा है।
क्या चांदी में तेजी लंबी चलेगी?
बाजार जानकारों के मुताबिक, चांदी में आई यह तेजी सिर्फ भावनाओं का नतीजा नहीं है, बल्कि इसके पीछे मजबूत बुनियादी कारण हैं। सप्लाई पहले से ही सीमित है, जबकि सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे सेक्टर में चांदी की मांग तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी अब सिर्फ सुरक्षित निवेश नहीं, बल्कि एक अहम इंडस्ट्रियल मेटल भी बन चुकी है। यही वजह है कि मौजूदा हालात में इसकी मजबूती सोने से भी ज्यादा नजर आ रही है।
ऊंचे भाव पर उतार-चढ़ाव का खतरा
हालांकि रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद बाजार में उतार-चढ़ाव की आशंका भी बढ़ गई है। जानकारों के अनुसार, ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है। अल्पकालिक ट्रेडर्स ऊंचे भाव पर मुनाफा निकाल सकते हैं, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों को धैर्य रखने की सलाह दी जा रही है। रणनीति यही मानी जा रही है कि जल्दबाजी में खरीदारी करने के बजाय गिरावट आने पर निवेश किया जाए और पहले से मौजूद निवेश को होल्ड करके रखा जाए।
सप्लाई की कमी और बढ़ती औद्योगिक मांग
चांदी की सप्लाई बढ़ाना आसान नहीं है, क्योंकि इसका उत्पादन ज्यादातर तांबा और जिंक जैसी धातुओं के साथ होता है। दूसरी ओर भारत, चीन और विकसित देशों में इंडस्ट्रियल मांग लगातार बढ़ रही है। सोलर एनर्जी सेक्टर अकेले ही दुनिया की चांदी खपत का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल कर रहा है। लंदन जैसे प्रमुख गोदामों में भी चांदी का स्टॉक घटता दिख रहा है, जिससे बाजार में तंगी बनी हुई है।
डॉलर की कमजोरी ने दी और ताकत
कीमती धातुओं की कीमतों को अमेरिकी डॉलर की कमजोरी से भी सहारा मिला है। जब डॉलर कमजोर होता है, तो सोना और चांदी दुनिया भर के निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक बन जाते हैं। बीते एक साल में चांदी की कीमत में 170 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी और सोने में करीब 70 प्रतिशत की बढ़त इसी भरोसे को दर्शाती है।
निवेशकों के लिए आगे क्या रणनीति?
विशेषज्ञों की सलाह है कि सोना और चांदी पोर्टफोलियो में संतुलन बनाने के लिए अच्छे विकल्प हो सकते हैं, लेकिन ऊंचे दामों पर जोखिम को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लंबी अवधि के निवेशक सीमित हिस्से में निवेश करें और गिरावट पर खरीदारी की रणनीति अपनाएं। मौजूदा हालात में सोना और चांदी सिर्फ निवेश के साधन नहीं, बल्कि वैश्विक डर और आर्थिक अनिश्चितता के संकेत भी बन चुके हैं।