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The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation > ऑटो/टेक > India–EU FTA: मर्सिडीज, BMW, ऑडी हो सकती हैं सस्ती, ऑटो सेक्टर पर क्या होगा असर?
ऑटो/टेक

India–EU FTA: मर्सिडीज, BMW, ऑडी हो सकती हैं सस्ती, ऑटो सेक्टर पर क्या होगा असर?

Last updated: 27/01/2026 5:02 PM
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Industrial Empire
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India–EU FTA के बाद भारतीय ऑटो सेक्टर पर असर, मर्सिडीज और BMW जैसी लग्जरी कारें हो सकती हैं सस्ती
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भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का असर अब धीरे-धीरे अलग-अलग सेक्टर्स में नजर आने लगा है। खास तौर पर ऑटोमोबाइल सेक्टर में इस डील को लेकर बड़ी चर्चा है। माना जा रहा है कि आने वाले वर्षों में मर्सिडीज-बेंज, BMW, ऑडी, लेम्बॉर्गिनी और पोर्श जैसी प्रीमियम यूरोपीय कारें भारतीय बाजार में सस्ती हो सकती हैं।

क्यों घट सकती हैं लग्जरी कारों की कीमतें?
India–EU FTA के तहत दोनों पक्षों ने ऑटो सेक्टर में कोटा-आधारित शुल्क रियायतों पर सहमति बनाई है। इस समझौते के मुताबिक, भारत कुछ तय संख्या (कोटा) के भीतर आयात होने वाली यूरोपीय कारों पर इंपोर्ट ड्यूटी को घटाकर करीब 10 फीसदी तक ला सकता है। हालांकि यह समझौता तुरंत लागू नहीं होगा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इसके प्रावधान 2027 से चरणबद्ध तरीके से लागू किए जा सकते हैं।

लेम्बॉर्गिनी जैसी कंपनियों को मिलेगा फायदा
इस डील से खास तौर पर उन यूरोपीय कंपनियों को फायदा होने की उम्मीद है, जो अपनी कारें पूरी तरह आयात करती हैं। इटली की सुपरकार निर्माता लेम्बॉर्गिनी इसका बड़ा उदाहरण है। लेम्बॉर्गिनी भारत में करीब 3.8 करोड़ रुपये से शुरू होने वाली कारें बेचती है और उसके सभी मॉडल आयातित हैं। यदि आयात शुल्क में राहत मिलती है, तो इन कारों की कीमतों में लाखों रुपये तक की कमी संभव है।

लंबे समय से चल रही थी बातचीत
भारत और EU के बीच FTA पर बातचीत साल 2007 में शुरू हुई थी। लेकिन ऑटो सेक्टर में शुल्क कटौती को लेकर मतभेदों के चलते 2013 में बातचीत अटक गई थी। यूरोपीय कार कंपनियां लंबे समय से भारतीय बाजार में ज्यादा पहुंच चाहती थीं, जबकि भारत अपनी घरेलू ऑटो इंडस्ट्री को लेकर सतर्क रुख अपनाए हुए था।

भारत ने क्यों अपनाया संतुलित रास्ता?
भारत का ऑटो सेक्टर तेजी से मजबूत हो रहा है और यह ‘मेक इन इंडिया’ पहल का एक अहम हिस्सा है। यह सेक्टर लाखों लोगों को रोजगार भी देता है। इसी वजह से भारत ने FTA के तहत सीमित और नियंत्रित तरीके से ही शुल्क रियायतें देने का फैसला किया है। इससे पहले भारत ने ब्रिटेन के साथ हुए व्यापार समझौते में भी कार कंपनियों को इसी तरह कोटा-आधारित रियायतें दी थीं।

₹25 लाख से कम कीमत वाली कारों पर सख्ती
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारत का कार बाजार मुख्य रूप से ₹10 लाख से ₹25 लाख के सेगमेंट पर आधारित है। इस सेगमेंट में यूरोपीय कंपनियों की दिलचस्पी अपेक्षाकृत कम है। इसी वजह से यह तय किया गया है कि ₹25 लाख से कम कीमत वाली कारों को EU भारत में निर्यात नहीं करेगा। यदि यूरोपीय कंपनियां इस सेगमेंट में उतरना चाहती हैं, तो उन्हें भारत में ही मैन्युफैक्चरिंग करनी होगी।

प्रीमियम सेगमेंट में EU की खास दिलचस्पी
₹25 लाख से ऊपर का सेगमेंट भारत में भले ही छोटा हो, लेकिन यहीं EU की सबसे ज्यादा दिलचस्पी है। इस सेगमेंट में यूरोपीय कारों को कोटा-आधारित बाजार पहुंच दी जाएगी, और यह कोटा समय के साथ अलग-अलग फेज में बढ़ाया जा सकता है।

मौजूदा इंपोर्ट ड्यूटी कितनी है?
फिलहाल भारत में कारों पर 66% से 125% तक आयात शुल्क लगता है। FTA के तहत यह राहत सिर्फ तय कोटा तक सीमित रहेगी। कोटा से बाहर आने वाली कारों पर कोई अतिरिक्त छूट नहीं दी जाएगी, ताकि विदेशी कंपनियां भारत में उत्पादन लगाने पर गंभीरता से विचार करें।

इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को मिलेगी सुरक्षा
इलेक्ट्रिक वाहनों के मामले में भारत ने अपनी घरेलू इंडस्ट्री को प्राथमिकता दी है। समझौते के तहत पहले 5 साल तक EVs को पूरी सुरक्षा दी जाएगी। इसके बाद शुल्क रियायतें शुरू होंगी, जो 30–35% से धीरे-धीरे घटेंगी। फिलहाल, 40,000 डॉलर से कम कीमत की आयातित कारों पर 70% और इससे महंगी कारों पर 110% तक इंपोर्ट ड्यूटी लगती है।

India–EU FTA भारतीय ऑटो सेक्टर के लिए एक बड़ा लेकिन संतुलित कदम माना जा रहा है। जहां एक तरफ प्रीमियम कार खरीदारों को कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर भारत ने घरेलू उद्योग और रोजगार की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। आने वाले वर्षों में यह समझौता भारतीय ऑटो मार्केट की दिशा और दशा दोनों बदल सकता है।

TAGGED:BMWFTAIndia–EU FTAIndustrial EmpireLuxury Cars PriceMake in IndiaMercedes
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