पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। रसोई गैस (LPG) की आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंता के बीच दो बड़े एलपीजी टैंकर सुरक्षित रूप से आगे बढ़ रहे हैं। ये दोनों जहाज – ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ – संवेदनशील समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज को पार कर भारत की ओर बढ़ रहे हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में ये टैंकर भारतीय तटों तक पहुंच जाएंगे, जिससे देश में एलपीजी आपूर्ति को लेकर बनी चिंता कुछ हद तक कम हो सकती है।
भारत-ईरान बातचीत से खुला रास्ता
अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, इन जहाजों को सुरक्षित रास्ता मिलने के पीछे भारत और ईरान के बीच हुई कूटनीतिक बातचीत का अहम रोल रहा है। सूत्रों का कहना है कि नई दिल्ली और तेहरान के बीच संवेदनशील स्तर पर बातचीत हुई, जिसके बाद इन जहाजों को युद्ध प्रभावित समुद्री मार्ग से गुजरने की अनुमति दी गई।
यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाल के दिनों में इस इलाके में सैन्य गतिविधियां बढ़ने से कई अंतरराष्ट्रीय जहाजों ने इस मार्ग से गुजरने में हिचक दिखाई थी। ऐसे में भारत के लिए यह कूटनीतिक सफलता मानी जा रही है कि उसके एलपीजी टैंकरों को सुरक्षित रास्ता मिल सका।
सरकारी जहाज और इंडियन ऑयल की चार्टरिंग
‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ दोनों जहाज देश की सरकारी शिपिंग कंपनी शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया के हैं। इन जहाजों को भारत की प्रमुख तेल कंपनी इंडिया आयल कॉर्पोरेशन ने एलपीजी लाने के लिए चार्टर किया है। शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, ‘शिवालिक’ होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर चुका है, जबकि ‘नंदा देवी’ भी उसी मार्ग से आगे बढ़ रहा है।
हालांकि युद्ध क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक दखलंदाजी के कारण जहाजों की सटीक लोकेशन ट्रैक करना थोड़ा मुश्किल हो रहा है। इसके बावजूद दोनों जहाजों ने अपने सिस्टम पर खुद को “भारतीय सरकारी जहाज” के रूप में दर्ज किया है, जिससे उनकी पहचान स्पष्ट बनी रहे और किसी तरह की गलतफहमी न हो।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम खबर
भारत की ऊर्जा जरूरतों में एलपीजी की बड़ी भूमिका है। देश अपनी कुल जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है और इसका बड़ा हिस्सा पश्चिम एशियाई देशों से आता है। इसी कारण खाड़ी क्षेत्र में युद्ध छिड़ने के बाद भारत में एलपीजी आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई थी। अगर यह संकट लंबा खिंचता, तो इसका असर न केवल घरेलू रसोई गैस पर पड़ता बल्कि कई औद्योगिक क्षेत्रों पर भी दिखाई देता।
उद्योग और रसोई दोनों पर पड़ सकता था असर
एलपीजी सिर्फ घरेलू गैस सिलेंडर तक सीमित नहीं है। इसका इस्तेमाल पेट्रोकेमिकल उद्योग, प्लास्टिक निर्माण और कई औद्योगिक इकाइयों में ईंधन के रूप में भी होता है। अगर सप्लाई लंबे समय तक बाधित रहती, तो इससे उद्योगों की उत्पादन क्षमता पर असर पड़ सकता था। साथ ही घरेलू उपभोक्ताओं को भी गैस की कमी का सामना करना पड़ता। यही वजह है कि इन दोनों जहाजों का सुरक्षित रूप से आगे बढ़ना भारत के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
कतर से निकले टैंकर, अगले हफ्ते पहुंच सकते हैं भारत
मिली जानकारी के अनुसार ये दोनों एलपीजी टैंकर Ras Laffan से रवाना हुए हैं, जो क़तर का एक प्रमुख गैस निर्यात केंद्र है। यहां से निकली गैस दुनिया के कई देशों तक पहुंचाई जाती है। अनुमान है कि ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ अगले सप्ताह तक भारतीय तटों पर पहुंच सकते हैं। इससे घरेलू बाजार में एलपीजी की आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने में मदद मिलेगी।
आगे और जहाज भी आ सकते हैं
हालांकि इस पूरे मामले पर अभी तक न तो भारत के विदेश मंत्रालय और न ही इंडियन ऑयल ने आधिकारिक बयान जारी किया है। लेकिन माना जा रहा है कि इन दो जहाजों के सफलतापूर्वक इस मार्ग से गुजरने के बाद अब कई और एलपीजी टैंकर भी इसी रास्ते से भारत आने की तैयारी कर सकते हैं। भारत लगातार ईरान और क्षेत्र के अन्य देशों के संपर्क में है ताकि कच्चे तेल और गैस की सप्लाई बिना किसी बाधा के जारी रखी जा सके।
कूटनीति और ऊर्जा सुरक्षा की अहम परीक्षा
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच यह घटना भारत की ऊर्जा सुरक्षा और कूटनीतिक क्षमता दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अगर आने वाले दिनों में भी इसी तरह एलपीजी और तेल की सप्लाई सुचारू बनी रहती है, तो इससे देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में बड़ी मदद मिलेगी और आम लोगों की रसोई पर भी संकट का असर नहीं पड़ेगा।