वैश्विक अनिश्चितता और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है। लेकिन इसी माहौल में investment के नए मौके भी बन रहे हैं। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि घबराने के बजाय समझदारी से निवेश करने पर आने वाले समय में अच्छा रिटर्न मिल सकता है। खासतौर पर लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह समय रणनीति बनाने का हो सकता है।
एक्सपर्ट की सलाह: धीरे-धीरे बढ़ाएं investment
3पी इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के मुख्य निवेश अधिकारी प्रशांत जैन और सह-फंड मैनेजर अश्वनी कुमार का कहना है कि निवेशकों को अपने जोखिम प्रोफाइल के हिसाब से अगले कुछ हफ्तों में धीरे-धीरे इक्विटी में निवेश बढ़ाना चाहिए। उनका मानना है कि बाजार में मौजूदा गिरावट डरने की नहीं, बल्कि मौके के तौर पर देखने की जरूरत है। हालांकि यह निवेश एकदम से नहीं, बल्कि चरणबद्ध तरीके से किया जाना चाहिए ताकि जोखिम को संतुलित किया जा सके।
निफ्टी वैल्यूएशन और 12% रिटर्न की उम्मीद
एक्सपर्ट्स के अनुसार, निफ़्टी 50 का मौजूदा वैल्यूएशन एक साल आगे की कमाई के लगभग 17.5 गुना पर है, जो सामान्य और संतुलित माना जा रहा है। ऐसे में मध्यम अवधि में करीब 12% सालाना रिटर्न (CAGR) मिलने की संभावना जताई जा रही है। पिछले 18 महीनों में लार्ज-कैप शेयरों में 10–15% तक गिरावट आई है, जबकि मिड और स्मॉल कैप में इससे भी ज्यादा गिरावट देखी गई। इस गिरावट ने कई अच्छे शेयरों को आकर्षक स्तर पर ला दिया है, जिससे भविष्य में उनके फिर से ऊपर जाने की संभावना बनती है।
बाजार में गिरावट, लेकिन बन रहा मौका
युद्ध और वैश्विक तनाव के चलते हाल के दिनों में बाजार में दबाव देखने को मिला है। आंकड़ों के अनुसार, संघर्ष शुरू होने के बाद से निफ्टी में करीब 8% गिरावट आई है, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स भी करीब 7% नीचे आया है। इसके साथ ही विदेशी निवेशकों (FII) ने भी भारतीय बाजार से दूरी बनाई है और मार्च में अब तक करीब 88,000 करोड़ रुपये की निकासी की है। हालांकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह ट्रेंड स्थायी नहीं है और हालात सामान्य होने पर विदेशी निवेशक वापस आ सकते हैं।
घरेलू निवेशक बने सहारा
इस समय भारतीय बाजार को सबसे बड़ा सहारा घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) से मिल रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में भी डीआईआई बाजार को स्थिर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएंगे। उन्होंने यह भी बताया कि प्राथमिक बाजार (IPO) से पूंजी जुटाने की रफ्तार धीमी पड़ सकती है, क्योंकि कई इश्यू फिलहाल घाटे में चल रहे हैं। इससे सेकंडरी मार्केट में निवेश बढ़ सकता है, जो बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है।
तेल की कीमतों का असर कितना?
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी एक बड़ी चिंता जरूर है, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसका असर सीमित रहेगा। Nifty 50 में शामिल ज्यादातर कंपनियां सीधे तौर पर तेल की कीमतों पर निर्भर नहीं हैं। ऑटो, पेंट, एयरलाइंस और गैस जैसे सेक्टर जरूर प्रभावित हो सकते हैं, लेकिन कंपनियां समय के साथ बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों तक पहुंचा देती हैं। ऐसे में इसका असर लंबे समय तक नहीं रहता।
शेयर बाजार: महंगाई से सुरक्षा का जरिया
एक अहम बात यह भी है कि शेयर बाजार को अक्सर महंगाई के खिलाफ एक सुरक्षा कवच माना जाता है। जब महंगाई बढ़ती है, तो कंपनियों की आय और रेवेन्यू भी बढ़ता है, जिससे शेयर की कीमतों में भी तेजी आ सकती है। इसलिए लंबे समय के निवेशकों के लिए इक्विटी अभी भी एक मजबूत विकल्प बना हुआ है।
घबराएं नहीं, समझदारी से करें निवेश
मौजूदा हालात में बाजार भले ही अस्थिर दिख रहा हो, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह समय घबराने का नहीं, बल्कि रणनीति के साथ निवेश करने का है। धीरे-धीरे और सोच-समझकर किया गया निवेश आने वाले समय में अच्छे रिटर्न दे सकता है। अगर आप लंबी अवधि के निवेशक हैं, तो यह गिरावट आपके लिए एक बड़ा अवसर साबित हो सकती है।