पश्चिम एशिया से एक बड़ी खबर सामने आई है, जिसने वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल पैदा कर दी है। ईरान ने दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Hormuz Strait) पर टोल वसूलने और सख्त नियम लागू करने की योजना को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद यह आशंका बढ़ गई है कि आने वाले समय में वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है और अंतरराष्ट्रीय तनाव और गहरा सकता है।
क्या है ईरान का नया “मैनेजमेंट प्लान”?
ईरान की संसद की सुरक्षा समिति ने “स्ट्रेट ऑफ होर्मुज मैनेजमेंट प्लान” को हरी झंडी दी है। इस योजना के तहत इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क यानी टोल लगाया जाएगा। ईरान का कहना है कि इस कदम का मकसद समुद्री सुरक्षा बढ़ाना, पर्यावरण की रक्षा करना और वित्तीय व्यवस्था को मजबूत बनाना है।
इस योजना में एक खास बात यह भी है कि टोल की वसूली ईरानी मुद्रा ‘रियाल’ में की जाएगी। इसके साथ ही जहाजों की निगरानी और सुरक्षा को लेकर भी सख्त नियम बनाए गए हैं, जिससे इस पूरे मार्ग पर ईरान का नियंत्रण और मजबूत हो सकता है।
किन देशों पर लगेगी रोक?
इस प्लान का सबसे संवेदनशील पहलू यह है कि इसमें अमेरिका और इजराइल के जहाजों के गुजरने पर साफ तौर पर रोक लगाने की बात कही गई है। इतना ही नहीं, उन देशों के जहाजों को भी अनुमति नहीं मिलेगी, जो ईरान पर एकतरफा प्रतिबंध लगाने में शामिल हैं। ईरान ने यह भी संकेत दिया है कि वह ओमान के साथ मिलकर इस जलमार्ग के लिए एक नया कानूनी ढांचा तैयार कर सकता है। इससे क्षेत्रीय राजनीति और ज्यादा जटिल हो सकती है।
क्यों है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज इतना अहम?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है। खाड़ी देशों से निकलने वाला बड़ी मात्रा में कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर वैश्विक बाजार तक पहुंचता है। अगर यहां किसी तरह की बाधा आती है, तो इसका सीधा असर तेल की कीमतों और पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर टोल या प्रतिबंध सख्ती से लागू होते हैं, तो शिपिंग लागत बढ़ेगी और तेल महंगा हो सकता है। इसका असर आम लोगों की जेब तक पहुंच सकता है, खासकर उन देशों में जो आयातित तेल पर निर्भर हैं।
अमेरिका का कड़ा रुख
इस फैसले के बाद अमेरिका ने भी कड़ा रुख अपनाया है। अमेरिकी वित्त मंत्री Scott Bessent ने संकेत दिया है कि अमेरिका भविष्य में इस जलमार्ग पर फिर से नियंत्रण स्थापित कर सकता है और सभी देशों के लिए स्वतंत्र आवाजाही सुनिश्चित करेगा। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर ईरान ने इस मार्ग को जल्द नहीं खोला, तो अमेरिका ईरान के ऊर्जा ढांचे जैसे बिजली संयंत्र, तेल के कुएं और खार्ग द्वीप को निशाना बना सकता है।
क्या बढ़ेगा वैश्विक तनाव?
ईरान के इस कदम से पहले ही तनावपूर्ण पश्चिम एशिया में स्थिति और नाजुक हो सकती है। एक तरफ ईरान अपनी रणनीतिक पकड़ मजबूत करना चाहता है, तो दूसरी तरफ अमेरिका और उसके सहयोगी देश इसे चुनौती देने की तैयारी में हैं। फिलहाल बाजार में तेल की आपूर्ति सामान्य बताई जा रही है, लेकिन अगर हालात बिगड़ते हैं, तो यह संकट गहरा सकता है। आने वाले समय में यह देखना बेहद अहम होगा कि क्या कूटनीतिक बातचीत से इस तनाव को कम किया जा सकेगा या फिर दुनिया एक नए ऊर्जा संकट की ओर बढ़ रही है।