भारत के बैंकिंग सेक्टर में एक बार फिर मजबूती के संकेत मिल रहे हैं। वित्त वर्ष 2025 में जहां ऋण वृद्धि की रफ्तार धीमी रही थी, वहीं वित्त वर्ष 2026 में इसमें 16.08 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अनुसार, यह वृद्धि वित्त वर्ष 2024 के बाद सबसे तेज है। वहीं, जमा यानी डिपॉजिट में भी 13.47 फीसदी की वृद्धि हुई है, जो बैंकिंग सिस्टम में विश्वास और स्थिरता को दर्शाती है।
कुल आंकड़ों में क्या दिख रहा है ट्रेंड
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, बैंकिंग प्रणाली में कुल ऋण 213.61 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जबकि जमा राशि 262.30 लाख करोड़ रुपये रही। 31 मार्च को समाप्त पखवाड़े में ऋण में 2.8 फीसदी यानी 5.92 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई, लेकिन अगले पखवाड़े में यह बढ़त घटकर 0.1 फीसदी रह गई। दूसरी ओर, जमा में 4.87 फीसदी यानी 12.18 लाख करोड़ रुपये की वृद्धि दर्ज की गई, जो मजबूत फंड फ्लो का संकेत है।
कॉरपोरेट और MSME सेक्टर ने दी रफ्तार
विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के महीनों में ऋण वृद्धि को सबसे ज्यादा सपोर्ट कॉरपोरेट और MSME सेक्टर से मिला है। इन सेक्टरों में बढ़ती क्रेडिट डिमांड यह दिखाती है कि इंडस्ट्री में विस्तार और निवेश की गतिविधियां तेज हो रही हैं। इसके अलावा, खुदरा क्षेत्र में भी खासकर गोल्ड लोन में तेज वृद्धि देखी गई है।
ब्याज दरों में गिरावट का असर
इक्रा के उपाध्यक्ष सचिन सचदेवा के मुताबिक, ब्याज दरों में कमी के कारण बैंक से लोन लेना बॉन्ड मार्केट की तुलना में ज्यादा आकर्षक हो गया है। वहीं, बॉन्ड मार्केट में यील्ड बढ़ने और वैश्विक वित्तीय अस्थिरता के चलते विदेशी उधारी महंगी हो गई है, जिससे कंपनियां घरेलू बैंकों की ओर ज्यादा रुख कर रही हैं।
रिपोर्टिंग बदलाव से आंकड़ों पर असर
कुछ विशेषज्ञों ने यह भी बताया है कि रिपोर्टिंग सिस्टम में बदलाव के कारण आंकड़ों में अस्थायी उछाल दिख सकता है। अब बैंकिंग डेटा महीने की 15 तारीख और महीने के अंत में जारी किया जाता है, जिससे आंकड़ों में समय-समय पर अंतर देखने को मिल सकता है।
बड़े बैंकों का मजबूत प्रदर्शन
देश के प्रमुख बैंक जैसे एसबीआई, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक ने वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही तक अपने कॉरपोरेट और MSME लोन पोर्टफोलियो में मजबूत वृद्धि दर्ज की है। यह संकेत देता है कि क्रेडिट की मांग बनी हुई है और आर्थिक गतिविधियां धीरे-धीरे गति पकड़ रही हैं।
अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत
कुल मिलाकर, बैंकिंग सेक्टर में ऋण और जमा दोनों में आई यह वृद्धि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है। अगर यह ट्रेंड जारी रहता है, तो आने वाले समय में निवेश, उत्पादन और रोजगार के अवसरों में और तेजी देखने को मिल सकती है।