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The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation > फूड प्रोसेसिंग > बीकाजी के संस्थापक शिवरतन अग्रवाल का निधन: 8वीं पास से ग्लोबल स्नैक ब्रांड तक का सफर
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बीकाजी के संस्थापक शिवरतन अग्रवाल का निधन: 8वीं पास से ग्लोबल स्नैक ब्रांड तक का सफर

Last updated: 24/04/2026 12:46 PM
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Industrial Empire
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शिव रतन अग्रवाल बीकाजी
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भारतीय स्नैक इंडस्ट्री से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। ‘बीकाजी’ ब्रांड के संस्थापक और चेयरमैन शिवरतन अग्रवाल का चेन्नई में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वे अपनी पत्नी के इलाज के सिलसिले में पिछले कुछ दिनों से परिवार के साथ चेन्नई में ठहरे हुए थे। गुरुवार सुबह अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके निधन की खबर से न केवल बीकानेर बल्कि पूरे देश के उद्योग जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

Contents
पत्नी के इलाज के दौरान अचानक बिगड़ी तबीयतबीकानेर से दुनिया तक का सफरहल्दीराम से अलग होकर बनाई अपनी पहचानकम पढ़ाई लेकिन बड़ा विजनबीकाजी बना ग्लोबल ब्रांडनिधन के बाद उत्पादन पर असरउद्योग जगत में शोक की लहरएक प्रेरणादायक विरासत

पत्नी के इलाज के दौरान अचानक बिगड़ी तबीयत

शिवरतन अग्रवाल अपनी पत्नी के हार्ट बायपास ऑपरेशन के लिए चेन्नई गए हुए थे। ऑपरेशन के बाद वे एक होटल में ठहरे हुए थे। सुबह करीब 7:30 बजे उन्हें सीने में दर्द और बेचैनी महसूस हुई। परिवार ने तुरंत उन्हें अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इस घटना ने उनके परिवार और उद्योग जगत को गहरे सदमे में डाल दिया।


बीकानेर से दुनिया तक का सफर

शिवरतन अग्रवाल का जीवन संघर्ष और सफलता की प्रेरणादायक कहानी है। राजस्थान के बीकानेर से आने वाले अग्रवाल ने एक छोटे से शहर की पारंपरिक भुजिया को वैश्विक पहचान दिलाई। उन्होंने ‘बीकाजी’ ब्रांड के जरिए भारतीय स्वाद को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया।

बीकाजी

आज बीकाजी के प्रोडक्ट्स न केवल भारत में बल्कि दुनिया के कई देशों में निर्यात किए जाते हैं। भुजिया, नमकीन, पापड़ और मिठाइयों के जरिए उन्होंने एक मजबूत ब्रांड खड़ा किया, जो गुणवत्ता और स्वाद के लिए जाना जाता है।


हल्दीराम से अलग होकर बनाई अपनी पहचान

शिवरतन अग्रवाल मशहूर हल्दीराम परिवार से जुड़े थे। लेकिन साल 1986 में पारिवारिक विभाजन के बाद उन्होंने खुद का बिजनेस शुरू करने का फैसला किया। यह निर्णय आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत और दूरदर्शिता से ‘शिवदीप फूड्स’ की शुरुआत की।

बीकाजी और हल्दीराम

इसके बाद 1993 में ‘बीकाजी’ ब्रांड की नींव रखी गई। उन्होंने अपने ब्रांड का नाम बीकानेर के संस्थापक राव बीका के नाम पर रखा, ताकि शहर की पहचान और स्वाद दोनों दुनिया तक पहुंचे।


कम पढ़ाई लेकिन बड़ा विजन

शिवरतन अग्रवाल केवल 8वीं कक्षा तक पढ़े थे, लेकिन उनका बिजनेस विजन बेहद मजबूत था। उस समय भुजिया हाथों से बनाई जाती थी, जिससे उत्पादन सीमित रहता था। उन्होंने विदेशों की यात्रा की और वहां से मशीनों के जरिए उत्पादन का आइडिया लेकर आए।

उन्होंने भारत में पहली बार भुजिया को मशीन से बनाना शुरू किया। इस कदम ने न केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाई, बल्कि क्वालिटी और पैकेजिंग को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाया।


बीकाजी बना ग्लोबल ब्रांड

आज बीकाजी भारत के प्रमुख स्नैक ब्रांड्स में शामिल है। कंपनी रोजाना सैकड़ों टन फूड प्रोडक्ट्स का उत्पादन करती है। बीकानेर के करणी और बीछवाल इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित प्लांट्स में रोजाना करीब 800 टन उत्पाद तैयार किए जाते हैं, जिनमें 150 टन सिर्फ भुजिया होती है।

कंपनी के प्रोडक्ट्स अमेरिका, यूरोप, मिडिल ईस्ट और एशिया के कई देशों में एक्सपोर्ट किए जाते हैं। इस तरह बीकाजी ने भारतीय स्वाद को वैश्विक पहचान दिलाई।

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निधन के बाद उत्पादन पर असर

शिवरतन अग्रवाल के निधन के बाद कंपनी ने शोक में अपने उत्पादन को अस्थायी रूप से रोक दिया है। साथ ही, दिनभर की सप्लाई भी रद्द कर दी गई है। यह कदम उनके प्रति सम्मान और श्रद्धांजलि के रूप में उठाया गया है।


उद्योग जगत में शोक की लहर

उनके निधन के बाद उद्योग जगत के कई बड़े नामों ने शोक व्यक्त किया है। उन्हें एक दूरदर्शी उद्यमी और प्रेरणादायक व्यक्तित्व के रूप में याद किया जा रहा है। उन्होंने न केवल एक सफल बिजनेस खड़ा किया, बल्कि हजारों लोगों को रोजगार भी दिया।


एक प्रेरणादायक विरासत

शिवरतन अग्रवाल का जीवन यह साबित करता है कि सफलता के लिए बड़ी डिग्री नहीं, बल्कि बड़ा विजन और मेहनत जरूरी होती है। उन्होंने छोटे स्तर से शुरुआत करके एक अंतरराष्ट्रीय ब्रांड खड़ा किया, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।

शिवरतन अग्रवाल का निधन भारतीय उद्योग जगत के लिए एक बड़ी क्षति है। उन्होंने जिस जुनून और मेहनत से ‘बीकाजी’ को खड़ा किया, वह हमेशा याद रखा जाएगा। उनका जीवन संघर्ष, नवाचार और सफलता की एक ऐसी कहानी है, जो हर उद्यमी को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

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