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The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation > बैंकिंग > RBI News: 34,000 करोड़ रुपये के New GS 2036 बॉन्ड के नतीजे घोषित, जानिए क्या है अंडरराइटिंग ऑक्शन और क्यों है अहम
बैंकिंग

RBI News: 34,000 करोड़ रुपये के New GS 2036 बॉन्ड के नतीजे घोषित, जानिए क्या है अंडरराइटिंग ऑक्शन और क्यों है अहम

Last updated: 10/05/2026 11:46 AM
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Industrial Empire
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RBI
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को “New GS 2036” सरकारी प्रतिभूति (Government Security) के लिए आयोजित अंडरराइटिंग नीलामी के परिणाम घोषित कर दिए। केंद्रीय बैंक ने बताया कि Additional Competitive Underwriting (ACU) के तहत प्राइमरी डीलर्स को देय अंडरराइटिंग कमीशन की कट-ऑफ दर प्रति 100 रुपये पर 0.38 पैसे तय की गई है।

Contents
क्या है New GS 2036?अंडरराइटिंग नीलामी में क्या हुआ?क्या होता है अंडरराइटिंग?Primary Dealers की क्या भूमिका है?सरकार के लिए क्यों जरूरी है यह प्रक्रिया?बाजार के लिए क्या संकेत?

यह नीलामी भारत सरकार की उधारी जरूरतों को पूरा करने के लिए आयोजित की गई थी। इस सरकारी बॉन्ड का कुल नोटिफाइड अमाउंट 34,000 करोड़ रुपये रखा गया था। RBI ने कहा कि यह प्रक्रिया सरकार के मार्केट बॉरोइंग प्रोग्राम का हिस्सा है, जिसके जरिए वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए बाजार से धन जुटाया जाता है।

क्या है New GS 2036?

New GS 2036 एक सरकारी प्रतिभूति (G-Sec) है, जिसे भारत सरकार बाजार से कर्ज लेने के लिए जारी करती है। “2036” का मतलब है कि यह बॉन्ड 2036 में मैच्योर होगा। सरकार ऐसे बॉन्ड जारी करके निवेशकों और संस्थानों से पैसा उधार लेती है। बदले में निवेशकों को एक तय ब्याज दर के साथ मैच्योरिटी पर मूलधन वापस मिलता है। भारत में सरकारी प्रतिभूतियां निवेश के सबसे सुरक्षित विकल्पों में मानी जाती हैं, क्योंकि इन्हें सीधे भारत सरकार का समर्थन प्राप्त होता है।

अंडरराइटिंग नीलामी में क्या हुआ?

RBI के अनुसार, इस नीलामी में Minimum Underwriting Commitment (MUC) राशि 17,010 करोड़ रुपये तय की गई थी। इसके अलावा Additional Competitive Underwriting (ACU) के तहत स्वीकार की गई राशि 16,990 करोड़ रुपये रही। इस तरह कुल मिलाकर 34,000 करोड़ रुपये का पूरा इश्यू अंडरराइट किया गया। इसका मतलब है कि प्राइमरी डीलर्स ने इस पूरे बॉन्ड इश्यू को सब्सक्रिप्शन सपोर्ट देने की जिम्मेदारी ली।

क्या होता है अंडरराइटिंग?

अंडरराइटिंग एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें कुछ वित्तीय संस्थान यह गारंटी देते हैं कि यदि सरकारी बॉन्ड या सिक्योरिटी की पूरी सदस्यता (subscription) नहीं मिलती, तो वे बची हुई राशि खरीदेंगे। सरकार के लिए यह व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे यह सुनिश्चित होता है कि उधारी कार्यक्रम में कोई बाधा न आए। इसके बदले अंडरराइटर संस्थानों को कमीशन दिया जाता है। इस मामले में RBI ने यह कमीशन 0.38 पैसे प्रति 100 रुपये तय किया है।

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Primary Dealers की क्या भूमिका है?

Primary Dealers (PDs) वे वित्तीय संस्थान हैं जिन्हें RBI द्वारा अधिकृत किया जाता है। इनका काम सरकारी बॉन्ड मार्केट को मजबूत बनाना और सरकारी उधारी प्रक्रिया को सुचारू रखना होता है। ये संस्थान सरकारी प्रतिभूतियों की नीलामी में भाग लेते हैं, बॉन्ड खरीदते हैं और जरूरत पड़ने पर अंडरराइटिंग सपोर्ट भी देते हैं। सरल शब्दों में समझें तो Primary Dealers सरकार और बाजार के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी की तरह काम करते हैं।

सरकार के लिए क्यों जरूरी है यह प्रक्रिया?

भारत सरकार हर साल अपने वित्तीय घाटे (Fiscal Deficit) और विभिन्न योजनाओं के खर्चों को पूरा करने के लिए बाजार से उधार लेती है। यह उधारी मुख्य रूप से Treasury Bills और Dated Securities के जरिए जुटाई जाती है। अगर किसी बॉन्ड इश्यू को पर्याप्त निवेशक नहीं मिलते, तो सरकार की उधारी योजना प्रभावित हो सकती है। इसलिए अंडरराइटिंग नीलामी एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है। यह सुनिश्चित करती है कि सरकार को तय समय पर आवश्यक फंड मिल जाए।

बाजार के लिए क्या संकेत?

New GS 2036 बॉन्ड के लिए पूरा 34,000 करोड़ रुपये अंडरराइट होना इस बात का संकेत है कि सरकारी प्रतिभूतियों के प्रति संस्थागत भरोसा बना हुआ है। यह निवेशकों और वित्तीय संस्थानों के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा सकता है। साथ ही, यह भी दिखाता है कि भारत सरकार की उधारी योजनाओं को बाजार से पर्याप्त समर्थन मिल रहा है।

RBI द्वारा New GS 2036 सरकारी प्रतिभूति के लिए अंडरराइटिंग नीलामी परिणाम घोषित करना भारत सरकार के उधारी कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा है। 34,000 करोड़ रुपये के इस इश्यू को पूरा समर्थन मिला है, जबकि प्राइमरी डीलर्स के लिए अंडरराइटिंग कमीशन 0.38 पैसे प्रति 100 रुपये तय किया गया है। यह प्रक्रिया सरकार की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने, बॉन्ड बाजार को स्थिर रखने और निवेशकों का भरोसा बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है।

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