भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में Apple ने एक और बड़ा कदम उठाया है। iPhone और अन्य प्रोडक्ट्स के लिए इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स की आपूर्ति मजबूत करने के उद्देश्य से Apple Inc ने भारत में पांच बड़ी कंपनियों को अपनी एंकर वेंडर टीम के रूप में चुना है। इन कंपनियों के जरिए देश में करीब ₹30,537 करोड़ का निवेश होगा और 27 हजार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद है।
ECMS योजना के तहत मिला बड़ा प्रोत्साहन
ये पांचों कंपनियां इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Meity) की ECMS (Electronics Components Manufacturing Scheme) के तहत मंजूर निवेश का बड़ा हिस्सा हैं। इस स्कीम के अंतर्गत कुल ₹41,863 करोड़ के निवेश को मंजूरी दी गई है, जिसमें से करीब 73 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं कंपनियों का है। ECMS योजना का मकसद भारत में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स का घरेलू उत्पादन बढ़ाना और आयात पर निर्भरता कम करना है।
Apple की सप्लाई चेन होगी और मजबूत
हालांकि ये कंपनियां पहले से Apple की सप्लाई चेन का हिस्सा हैं, लेकिन अब बड़े निवेश के साथ ये केवल Apple ही नहीं, बल्कि उसकी वैश्विक सप्लाई चेन को भी कंपोनेंट्स सप्लाई करेंगी। इससे भारत की पहचान केवल असेंबली सेंटर के बजाय एक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में मजबूत होगी। इस निवेश से प्रत्यक्ष रूप से 27,614 से अधिक नौकरियां पैदा होंगी, जबकि इससे जुड़ी सहायक इंडस्ट्री में अप्रत्यक्ष रोजगार के भी कई अवसर खुलेंगे।
भारतीय और विदेशी कंपनियों की अहम भूमिका
अब तक जिन कंपनियों को मंजूरी मिली है, उनमें भारतीय और वैश्विक दोनों तरह की कंपनियां शामिल हैं। भारतीय कंपनियों में:
- Tata Electronics
- Motherson Electronic Components
- Hindalco
वहीं विदेशी कंपनियों में:
- Yuzhan Technology (Foxconn ग्रुप की यूनिट)
- ATL Battery Technology India Ltd (जापान की TDK ग्रुप की कंपनी)
इन कंपनियों के जरिए Apple भारत में अपने प्रोडक्शन इकोसिस्टम को और गहराई देने की तैयारी में है।
iPhone एंकोजिंग को लेकर खास रणनीति
Apple का फोकस खासतौर पर iPhone के एल्युमिनियम एंकोजिंग (enclosure) पर है। कंपनी चाहती है कि भारत न सिर्फ घरेलू जरूरतों को पूरा करे, बल्कि इस कंपोनेंट का ग्लोबल एक्सपोर्ट हब भी बने। फिलहाल, Tata Electronics भारत में iPhone एंकोजिंग का केवल एक छोटा हिस्सा ही सप्लाई करती है, लेकिन आने वाले समय में इसका दायरा तेजी से बढ़ने की संभावना है।
Foxconn, Motherson और Hindalco का बड़ा निवेश
Tata ग्रुप के अलावा Foxconn और Motherson भी भारत में अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स के लिए करीब ₹27,166 करोड़ का निवेश कर रहे हैं। वहीं Hindalco को एल्युमिनियम एक्सट्रूज़न प्लांट के लिए जोड़ा गया है, जिसमें लगभग ₹449 करोड़ का निवेश किया जाएगा। इसके अलावा, Noida में लिथियम-आयन बैटरी प्लांट लगाने के लिए ATL Battery Technology करीब ₹2,922 करोड़ निवेश करेगी, जिससे स्मार्टफोन बैटरी सप्लाई को लेकर भारत की स्थिति और मजबूत होगी।
वैल्यू एडिशन बढ़ाने पर सरकार और Apple का फोकस
फिलहाल भारत में स्मार्टफोन निर्माण में 15–20 प्रतिशत वैल्यू एडिशन होता है। Apple और सरकार का लक्ष्य इसे बढ़ाकर 35 प्रतिशत तक ले जाना है। इन नए निवेशों से न केवल iPhone मैन्युफैक्चरिंग में देश की भूमिका बढ़ेगी, बल्कि भारत अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए भी एक भरोसेमंद सप्लायर बनकर उभरेगा।
भारत बनता जा रहा है Apple का ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग सेंटर
सरकारी मंजूरी और Apple की दीर्घकालिक रणनीति के चलते भारत तेजी से ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग मैप पर अपनी जगह बना रहा है। एंकर वेंडर मॉडल, भारी निवेश और रोजगार सृजन के साथ Apple का यह कदम भारत को तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत आधार देता है।