नए साल की शुरुआत भारतीय auto sector के लिए बेहद उत्साहजनक रही है। जनवरी महीने में यात्री वाहनों और दोपहिया वाहनों की बिक्री ने मजबूत उछाल दिखाया है, जिससे बाजार में भरोसा लौटा है। डीलरों को भेजी गई गाड़ियों की संख्या में दो अंकों की बढ़त दर्ज की गई, जो इस बात का संकेत है कि जीएसटी सुधार के बाद बनी मांग की रफ्तार अभी थमी नहीं है। कंपनियों और डीलरों दोनों के लिए यह महीना रिकॉर्डतोड़ साबित हुआ है।
थोक बिक्री में जबरदस्त तेजी, दोपहिया रहे आगे
जनवरी में यात्री वाहनों की थोक बिक्री सालाना आधार पर 12.6 प्रतिशत बढ़कर करीब 4.49 लाख यूनिट तक पहुंच गई। वहीं दोपहिया वाहनों की थोक बिक्री में और भी ज्यादा उछाल देखने को मिला और यह 26 प्रतिशत से अधिक बढ़कर लगभग 19.25 लाख यूनिट हो गई। इस सेगमेंट में स्कूटर की मांग सबसे ज्यादा बढ़ी है। स्कूटर की डीलरशिप तक भेजी गई खेप में करीब 37 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई, जबकि मोटरसाइकल की बिक्री लगभग 20 प्रतिशत बढ़ी। हालांकि, कुल दोपहिया बिक्री में मोटरसाइकल का हिस्सा अब भी सबसे बड़ा है और यह 58 प्रतिशत से ज्यादा योगदान देती है।
तिपहिया सेगमेंट में भी तेजी, कारोबारियों को राहत
सिर्फ कार और बाइक ही नहीं, बल्कि तिपहिया सेगमेंट में भी शानदार ग्रोथ देखने को मिली है। पिछले साल के मुकाबले जनवरी में तिपहिया वाहनों की बिक्री करीब 30 प्रतिशत बढ़ी और यह 75 हजार से ज्यादा यूनिट तक पहुंच गई। ऑटो सेक्टर से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी परिवहन, डिलीवरी सेवाओं और छोटे कारोबारों में बढ़ती गतिविधियों का सीधा फायदा तिपहिया सेगमेंट को मिला है। इससे रोजगार और छोटे व्यापारियों की आय में भी सुधार के संकेत मिलते हैं।
खुदरा बिक्री में ग्रामीण बाजार बना बड़ी ताकत
थोक बिक्री के साथ-साथ खुदरा बिक्री के मोर्चे पर भी बाजार मजबूत नजर आया। जनवरी में यात्री वाहनों की खुदरा बिक्री 7 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 5.13 लाख यूनिट तक पहुंच गई। इस बढ़त में ग्रामीण बाजार की बड़ी भूमिका रही। बेहतर फसल, ग्रामीण आय में सुधार और बुनियादी ढांचे पर बढ़ते खर्च का असर गांव-कस्बों में गाड़ियों की मांग पर साफ दिखाई दिया। छोटे शहरों और कस्बों में दोपहिया और एंट्री-लेवल कारों की डिमांड तेजी से बढ़ी है।
जीएसटी सुधार और बजट घोषणाओं से बढ़ा भरोसा
उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि जीएसटी दरों में सुधार के बाद मांग में जो रफ्तार आई थी, वह अब और मजबूत होती दिख रही है। आम बजट 2026 में विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए घोषित कार्यक्रमों से भी ऑटो सेक्टर को दीर्घकालिक फायदा मिलने की उम्मीद है। नीतिगत समर्थन और घरेलू उत्पादन पर जोर से कंपनियों को निवेश बढ़ाने का भरोसा मिला है, जिससे आने वाले महीनों में भी बिक्री की रफ्तार बनी रह सकती है।
निर्यात में बढ़त, भारतीय कंपनियों की पकड़ मजबूत
अप्रैल से जनवरी की अवधि में यात्री वाहनों के निर्यात में लगभग 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 7.47 लाख यूनिट के करीब पहुंच गया। दोपहिया वाहनों के निर्यात में भी करीब 24 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली। भारतीय कंपनियों ने विदेशी बाजारों में अपनी पकड़ मजबूत की है। कुछ कंपनियां निर्यात के मोर्चे पर आगे रहीं, जबकि कुछ ओईएम को गिरावट का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद कुल मिलाकर ऑटो निर्यात का ट्रेंड सकारात्मक रहा है।
चुनौतियों के बीच भी सेक्टर का आत्मविश्वास बरकरार
भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और कच्चे माल से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद ऑटो सेक्टर की ग्रोथ कायम रही है। दुर्लभ खनिज मैग्नेट की कमी जैसी समस्याएं भविष्य में आपूर्ति पर असर डाल सकती हैं, लेकिन फिलहाल कंपनियां वैकल्पिक सप्लाई चेन और नए सोर्स तलाशने में जुटी हैं। दोपहिया कंपनियों ने इन चुनौतियों के बावजूद निर्यात और घरेलू बिक्री दोनों में बढ़त दर्ज की है, जो सेक्टर के मजबूत आधार को दर्शाता है।
आगे का रास्ता: मांग बनी रही तो 2026 रहेगा मजबूत साल
जनवरी के आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि ऑटो सेक्टर ने 2026 की शुरुआत मजबूती के साथ की है। ग्रामीण मांग, नीतिगत समर्थन और निर्यात में बढ़त मिलकर इस सेक्टर को आगे बढ़ाने में मदद कर रहे हैं। अगर यही ट्रेंड जारी रहा, तो आने वाले महीनों में ऑटो कंपनियों की बिक्री और उत्पादन दोनों में और तेजी देखने को मिल सकती है। इससे रोजगार, निवेश और समग्र आर्थिक गतिविधियों को भी सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है।