भारत और सिंगापुर से संचालित डीपटेक स्टार्टअप HYDGEN ने ग्रीन हाइड्रोजन सेक्टर में अपने अगले कदम के लिए एक बड़ा निवेश जुटाया है। कंपनी ने 5 मिलियन डॉलर (लगभग ₹42 करोड़) की फंडिंग हासिल की है, जिसे अपने इनोवेटिव हाइड्रोजन प्रोजेक्ट्स के विस्तार में लगाया जाएगा। इस फंडिंग राउंड की अगुवाई Transition VC ने की, जबकि इसमें Cloudberry Pioneer Investments (Europe), Moringa Ventures (Singapore) और भारत व सिंगापुर के कई फैमिली ऑफिसेज ने भाग लिया।
फंडिंग का इस्तेमाल कहां होगा?
HYDGEN इस नई फंडिंग का उपयोग मुख्य रूप से अपनी मंगलुरु (Mangaluru) मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को अपग्रेड करने में करेगी। साथ ही कंपनी अपनी इलेक्ट्रोलाइजर टेक्नोलॉजी (Electrolyzer Technology) को और एडवांस बनाएगी ताकि हाइड्रोजन उत्पादन की लागत घटाई जा सके और दक्षता बढ़ाई जा सके। कंपनी का अगला लक्ष्य अपने प्रोडक्ट्स को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उतारना है, जहां ग्रीन हाइड्रोजन की मांग तेजी से बढ़ रही है।
HYDGEN की खास तकनीक क्या है?
HYDGEN की सबसे बड़ी ताकत इसकी AEM (Anion Exchange Membrane) इलेक्ट्रोलाइजर टेक्नोलॉजी है। यह तकनीक दो प्रमुख सिस्टम्स – Alkaline System और PEM (Proton Exchange Membrane) – के बेहतरीन गुणों को मिलाकर काम करती है। खास बात यह है कि इसमें Platinum Group Metals (PGM) की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे उत्पादन लागत काफी कम हो जाती है।
यह तकनीक छोटे से लेकर बड़े पैमाने पर हाइड्रोजन उत्पादन के लिए उपयोगी है। यह मॉडल न केवल सस्ता है बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी है, जिससे भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को टिकाऊ तरीके से पूरा किया जा सकता है।
250 kW सिंगल स्टैक सिस्टम की तैयारी
कंपनी के मुताबिक, अभी HYDGEN की मॉड्यूलर यूनिट्स 1 kW से 100 kW की रेंज में हैं। अब कंपनी एक 250 kW सिंगल-स्टैक सिस्टम विकसित कर रही है, जो इंडस्ट्रियल लेवल की जरूरतों को पूरा करेगा। इस तकनीक के ज़रिए बड़ी इंडस्ट्रीज़ अपने स्थान पर ही ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन कर सकेंगी, जिससे उन्हें बाहरी सप्लाई पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और लॉजिस्टिक कॉस्ट में भारी कमी आएगी।
विदेशी बाजारों में विस्तार की योजना
HYDGEN अब जापान, यूरोप और मिडल ईस्ट जैसे बाजारों में कदम बढ़ाने की तैयारी में है। इन क्षेत्रों में सरकारें ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट्स को लेकर बड़े स्तर पर निवेश और नीतिगत प्रोत्साहन दे रही हैं। कंपनी का उद्देश्य डीसेंट्रलाइज्ड हाइड्रोजन प्रोडक्शन को बढ़ावा देना है ताकि दुनिया भर में क्लीन एनर्जी की सप्लाई और सस्ती व स्थिर बन सके।
सफल पायलट प्रोजेक्ट्स से दिखाया असर
पिछले एक साल में HYDGEN ने भारत, सिंगापुर और साउथईस्ट एशिया में कई पायलट प्रोजेक्ट्स पूरे किए हैं। इन प्रोजेक्ट्स को इंडस्ट्रियल, रिसर्च और मोबिलिटी एप्लिकेशन में सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया गया है। कंपनी का मानना है कि छोटे और मॉड्यूलर सिस्टम्स भविष्य में क्लीन एनर्जी को अपनाने का सबसे तेज़ रास्ता साबित होंगे।
कैसे शुरू हुई HYDGEN की कहानी
HYDGEN की शुरुआत National University of Singapore (NUS) के एक स्पिन-ऑफ प्रोजेक्ट के रूप में हुई थी। आज यह कंपनी भारत और साउथईस्ट एशिया दोनों जगहों पर अपनी R&D और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स चला रही है। कंपनी के संस्थापकों का मानना है कि हाइड्रोजन भविष्य की ऊर्जा है और आने वाले दशकों में यह पूरी दुनिया के लिए एक टिकाऊ ऊर्जा विकल्प बनकर उभरेगा।
ग्रीन एनर्जी का उज्ज्वल भविष्य
HYDGEN की यह सफलता कहानी बताती है कि ग्रीन एनर्जी सिर्फ एक ट्रेंड नहीं, बल्कि भविष्य की अर्थव्यवस्था का आधार बनने जा रही है। डीपटेक इनोवेशन और सस्टेनेबल एनर्जी का मेल आने वाले वर्षों में दुनिया को क्लीन, किफायती और सुरक्षित ऊर्जा समाधान देगा। भारत जैसे देशों में ऐसी कंपनियों की सफलता यह संकेत है कि ऊर्जा का अगला अध्याय ग्रीन हाइड्रोजन से लिखा जाएगा।