Defense procurement: भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा खरीद परिषद (DAC) ने करीब ₹3.60 लाख करोड़ की रक्षा खरीद को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इस फैसले से वायुसेना, नौसेना और थलसेना—तीनों को आधुनिक हथियार और प्लेटफॉर्म मिलेंगे, जिससे देश की सैन्य तैयारी और आत्मनिर्भरता को नई रफ्तार मिलेगी।
वायुसेना के लिए 114 राफेल
सूत्रों के मुताबिक, भारतीय वायुसेना 114 बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान (MRFA) खरीदने जा रही है। ये विमान फ्रांस की कंपनी Dassault Aviation के रॉफेल प्लेटफॉर्म पर आधारित होंगे। इस डील की अनुमानित लागत करीब 30 अरब यूरो बताई जा रही है। नए जेट आने से वायुसेना की स्क्वाड्रन स्ट्रेंथ बढ़ेगी, हवाई वर्चस्व मजबूत होगा और लंबी दूरी के सटीक हमलों की क्षमता में बड़ा उछाल आएगा।
भारत में बनेगा बड़ा हिस्सा, स्वदेशी हथियारों का इस्तेमाल
इस प्रस्ताव का अहम पहलू “मेक इन इंडिया” है। अधिकांश एमआरएफए विमान भारत में ही बनाए जाने की योजना है। इससे घरेलू एयरोस्पेस इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलेगा, सप्लाई चेन मजबूत होगी और तकनीक हस्तांतरण के रास्ते खुलेंगे। सूत्रों का कहना है कि इन विमानों में स्वदेशी हथियार और सिस्टम लगाए जाएंगे, ताकि भविष्य में आयात पर निर्भरता कम हो और रखरखाव लागत भी घटे।
स्कैल्प मिसाइलों से बढ़ेगी स्ट्राइक क्षमता
वायुसेना को फ्रांस निर्मित लंबी दूरी की हवा से जमीन पर मार करने वाली SCALP मिसाइलों का अतिरिक्त स्टॉक लेने की भी मंजूरी मिली है। ये “स्टैंड-ऑफ” स्ट्राइक क्षमता को मजबूत करती हैं, यानी दुश्मन की सीमा में घुसे बिना गहरे लक्ष्यों पर सटीक वार संभव होगा। इससे रणनीतिक निरोधक क्षमता (deterrence) को नई धार मिलेगी।
नौसेना को छह अतिरिक्त P-8I: समुद्री निगरानी और पनडुब्बी रोधी ताकत
भारतीय नौसेना अपने बेड़े में छह और P-8I Poseidon समुद्री टोही विमान शामिल करने की तैयारी में है। ये विमान लंबी दूरी की समुद्री निगरानी, पनडुब्बी रोधी युद्ध और समुद्री हमलों में बेहद कारगर माने जाते हैं। पहले से मौजूद बेड़े के साथ नए विमानों के जुड़ने से हिंद महासागर क्षेत्र में निगरानी क्षमता और तेज प्रतिक्रिया की ताकत बढ़ेगी।
हाई-एल्टीट्यूड प्सूडो-सैटेलाइट्स से लगातार निगरानी
डीएसी ने एयर-शिप आधारित हाई-एल्टीट्यूड प्सूडो सैटेलाइट्स (AS-HAPS) के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। ये लंबे समय तक ऊंचाई पर टिककर खुफिया जानकारी, निगरानी, टोही और संचार सहायता दे सकते हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों और समुद्री इलाकों में लगातार नजर बनाए रखने में यह तकनीक बेहद उपयोगी होगी।
सेना के लिए टैंक अपग्रेड और नई एंटी-टैंक माइंस
थलसेना के मोर्चे पर टी-72 टैंकों, बीएमपी-2 इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल्स और आर्मर्ड रिकवरी व्हीकल्स के उन्नयन को हरी झंडी मिली है। इससे पुराने प्लेटफॉर्म की सेवा आयु बढ़ेगी और युद्धक्षमता बेहतर होगी। इसके साथ ही एंटी-टैंक माइंस की खरीद को मंजूरी दी गई है, ताकि दुश्मन की बख्तरबंद टुकड़ियों की बढ़त रोकी जा सके।
तटरक्षक बल और स्वदेशी पावर जनरेटर
भारतीय तटरक्षक बल के डॉर्नियर विमानों के लिए नई प्रणालियों की खरीद से समुद्री निगरानी मजबूत होगी। वहीं नौसेना के लिए 4 मेगावाट समुद्री गैस टरबाइन आधारित पावर जनरेटर “मेक-इन-इंडिया” श्रेणी में मंजूर किए गए हैं, ताकि विदेशी निर्भरता घटे और स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा मिले।
अंतिम फैसला CCS के हाथ
इन सभी प्रस्तावों पर अंतिम मुहर कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) लगाएगी। माना जा रहा है कि उच्चस्तरीय राजनीतिक बैठकों के दौरान इस डील की दिशा और समय-सीमा को लेकर संकेत मिल सकते हैं। कुल मिलाकर, यह पैकेज भारत की सैन्य तैयारी, तकनीकी आत्मनिर्भरता और दीर्घकालिक सुरक्षा रणनीति को मजबूती देने वाला कदम है।