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The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation > एनर्जी > E20 ईंधन विवाद: गडकरी का बड़ा खुलासा, पेट्रोल लॉबी चला रही राजनीतिक मुहिम
एनर्जी

E20 ईंधन विवाद: गडकरी का बड़ा खुलासा, पेट्रोल लॉबी चला रही राजनीतिक मुहिम

Shashank Pathak
Last updated: 12/09/2025 5:07 PM
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Shashank Pathak
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नितिन गडकरी E20 ईंधन विवाद पर बोलते हुए, पेट्रोल लॉबी पर अफवाह फैलाने का आरोप लगाते हुए
E20 विवाद पर नितिन गडकरी ने दिया बयान – पैसे देकर पेट्रोल लॉबी फैला रही अफवाह
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भारत में ऊर्जा सुरक्षा, प्रदूषण नियंत्रण और आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है – E20 ईंधन, यानी पेट्रोल में 20 फीसदी एथनॉल का मिश्रण। लेकिन हाल ही में इस पहल पर विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर यह दावा किया गया कि E20 ईंधन से वाहनों की माइलेज घट रही है और इंजन को नुकसान हो रहा है। इस बहस ने इतना तूल पकड़ लिया कि केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को सामने आकर स्पष्टीकरण देना पड़ा। उन्होंने साफ कहा – यह विवाद कोई सामान्य चिंता नहीं बल्कि ‘पेट्रोल लॉबी’ द्वारा प्रायोजित एक दुष्प्रचार है, जो बेहद अमीर और ताकतवर है।

पेट्रोल लॉबी और दुष्प्रचार का आरोप
गडकरी ने फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) और बाद में सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चर्स (SIAM) के कार्यक्रमों में इस विषय पर खुलकर बात की। उनका कहना था “सोशल मीडिया पर जो अभियान चल रहा है, वह पेट्रोल लॉबी द्वारा प्रायोजित है। इसका मकसद मुझे राजनीतिक रूप से निशाना बनाना और सरकार की स्वदेशी ऊर्जा नीति को कमजोर करना है।” गडकरी ने इसे ‘राजनीतिक मुहिम’ तक कहा और स्पष्ट किया कि इसमें कोई सच्चाई नहीं है।

विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
पिछले कुछ महीनों से सोशल मीडिया पर कई वाहन मालिकों ने शिकायत की कि –
उनके वाहनों के ईंधन टैंक में जंग लग रही है,
माइलेज कम हो गया है,
और कई पेट्रोल पंपों पर केवल E20 पेट्रोल ही उपलब्ध है, जबकि उनके वाहन अभी इसके अनुकूल नहीं हैं। यही से विवाद ने जोर पकड़ा और सरकार पर दबाव बढ़ा कि वह इस विषय पर सफाई दे।

सरकार और मंत्रालय का पक्ष
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने अगस्त 2024 में ही यह स्पष्ट कर दिया था कि “ईंधन दक्षता में कमी संबंधी चिंताएं निराधार हैं।” मंत्रालय का कहना था कि 2021 से ही अंतर-मंत्रालयी समिति ने रोडमैप तैयार किया था, जिसमें E20 तक पहुंचने का साफ खाका दिया गया था। इससे वाहन तकनीक को तैयार करने, आपूर्ति श्रृंखला व्यवस्थित करने और पूरे ढांचे को मजबूत करने का समय मिला।

सरकार का रुख साफ है –
E20 से वापस E0 पेट्रोल (बिना एथनॉल) पर लौटना,
प्रदूषण रोकने के लिए की गई सारी मेहनत और उपलब्धियों को मिटा देगा।

एथनॉल: स्वदेशी और किफायती विकल्प
केंद्रीय मंत्री का तर्क है कि एथनॉल मिश्रण भारत के लिए कई स्तरों पर फायदेमंद है –

  1. आयात का विकल्प – भारत बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करता है। एथनॉल मिश्रण से विदेशी निर्भरता कम होगी।
  2. किफायती – एथनॉल से पेट्रोल की लागत कम होती है।
  3. पर्यावरण हितैषी – यह ईंधन जलने पर प्रदूषण कम करता है।
  4. स्वदेशी उत्पादन – एथनॉल देश में ही तैयार किया जाता है, जिससे किसानों को भी फायदा होता है।
    गडकरी ने एक उदाहरण देते हुए कहा कि मक्का से एथनॉल उत्पादन के फैसले के बाद देश में मक्के की खेती तीन गुना बढ़ गई है।

शोध और परीक्षण क्या कहते हैं?
वाहन निर्माताओं और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) जैसी संस्थाओं ने पहले ही शोध कर साफ कर दिया है कि – E20 पेट्रोल से कोई गंभीर तकनीकी नुकसान नहीं होता है। और वाहन कंपनियों ने अपने मॉडल्स को धीरे-धीरे E20 अनुकूल बनाना शुरू कर दिया है, साथ ही अदालत में भी इस विषय पर सरकार का पक्ष मजबूत पाया गया।

क्या पेट्रोल और डीजल का भविष्य खत्म हो जाएगा?
कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि जब सरकार वैकल्पिक ईंधनों – जैसे इलेक्ट्रिक, हाइड्रोजन और एथनॉल – पर जोर दे रही है, तो क्या पेट्रोल और डीजल वाहनों का भविष्य खत्म हो जाएगा? गडकरी ने इसका जवाब भी दिया “आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है। पेट्रोल और डीजल वाहनों की मांग अभी भी बढ़ेगी। भारत में वाहन निर्माण 15–20 फीसदी की दर से बढ़ रहा है और अंतरराष्ट्रीय बाजार भी बहुत बड़ा है।”

वाहन उद्योग की सफलता की कहानी
नितिन गडकरी ने यह भी याद दिलाया कि जब उन्होंने मंत्री का पद संभाला था, तब भारतीय वाहन उद्योग का आकार 14 लाख करोड़ रुपये था और भारत विश्व में सातवें स्थान पर था। लेकिन आज स्थिति यह है कि भारत ने जापान को पीछे छोड़ दिया है और अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा वाहन उद्योग बन चुका है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि भारतीय वाहन क्षेत्र नई तकनीक और वैश्विक चुनौतियों को अपनाने में पीछे नहीं है।

सेमीकंडक्टर और खनिज की कमी से सबक
गडकरी ने अपने संबोधन में यह भी बताया कि भारत ने हाल के वर्षों में कई चुनौतियों का सामना किया – सेमीकंडक्टर चिप की कमी, दुर्लभ खनिज मैग्नेट की कमी दोनों ही समस्याएं चीन पर निर्भरता के कारण आई थीं। लेकिन अब भारत ने सेमीकंडक्टर चिप का उत्पादन शुरू कर दिया है और देशी स्टार्टअप्स नए बैटरी केमिस्ट्री (सोडियम आयन, लिथियम आयन, जिंक आयन, एल्युमीनियम आयन) पर काम कर रहे हैं। पुराने वाहनों की स्क्रैपिंग नीति से भी बड़ी मात्रा में दुर्लभ खनिज मिल सकते हैं। सरकार इन पहलों को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन दे रही है।

आलोचना बनाम वास्तविकता
वास्तविकता यह है कि हर नई तकनीक के साथ लॉबीज़ टकराव में आती हैं। पेट्रोल लॉबी, जो वर्षों से ईंधन बाजार पर हावी रही है, E20 और अन्य वैकल्पिक ईंधनों को एक चुनौती मानती है। यही कारण है कि सोशल मीडिया पर प्रायोजित मुहिम चलाकर लोगों में भ्रम फैलाया जा रहा है। लेकिन गडकरी और मंत्रालय दोनों का कहना है कि यह नीति पूरी तरह वैज्ञानिक शोध और अंतरराष्ट्रीय अनुभवों पर आधारित है।

E20 ईंधन विवाद ने दिखा दिया कि भारत जैसे बड़े बाजार में हर नई नीति के साथ हितों का टकराव और दुष्प्रचार होना तय है। लेकिन नितिन गडकरी का साफ संदेश है – भारत वैकल्पिक ईंधनों के रास्ते पर मजबूती से आगे बढ़ेगा। यह कदम न केवल प्रदूषण कम करेगा बल्कि किसानों, उद्योग और उपभोक्ताओं सभी के लिए फायदेमंद साबित होगा। पेट्रोल लॉबी चाहे जितनी मजबूत हो, लेकिन भारत की ऊर्जा नीति अब स्वदेशी, किफायती और पर्यावरण हितैषी भविष्य की ओर बढ़ रही है।

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