भारत का मखाना (Fox Nut) अब सिर्फ पूजा-पाठ, व्रत या पारंपरिक रसोई तक सीमित नहीं रह गया है। यह सुपरफूड आज दुनिया के हेल्थ और न्यूट्रिशन मार्केट में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। हाल ही में संसद में सरकार द्वारा पेश किए गए आंकड़ों ने यह साफ कर दिया है कि मखाना के मामले में भारत का कोई बड़ा प्रतिद्वंद्वी नहीं है। वैश्विक स्तर पर होने वाले कुल मखाना उत्पादन का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा अकेले भारत से आता है, जिसने देश को इस सुपरफूड का निर्विवाद ग्लोबल लीडर बना दिया है।
बिहार: मखाना (Fox Nut) की असली ताकत
भारत की इस उपलब्धि के पीछे सबसे बड़ा योगदान बिहार का है। देश में होने वाले कुल मखाना उत्पादन में से करीब 85 प्रतिशत मखाना बिहार से आता है। राज्य की झीलें, तालाब, जलस्रोत और पीढ़ियों से चली आ रही पारंपरिक खेती की तकनीक मखाना उत्पादन के लिए बेहद अनुकूल मानी जाती है। यही वजह है कि बिहार आज भी देश का मखाना हब बना हुआ है और यहां के हजारों किसान और मछुआरे इसकी खेती से अपनी आजीविका चला रहे हैं।
दरभंगा बना मखाना का केंद्र
बिहार के भीतर भी दरभंगा जिला मखाना (Fox Nut) उत्पादन का सबसे अहम केंद्र बनकर उभरा है। कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने राज्यसभा में लिखित जवाब में बताया कि दरभंगा को मखाना की खेती और प्रोसेसिंग के लिए एक मजबूत हब के रूप में विकसित किया गया है। यहां की मिट्टी, पानी की गुणवत्ता और स्थानीय किसानों का पारंपरिक ज्ञान मखाना उत्पादन के लिए आदर्श माना जाता है। इसी कारण दरभंगा को देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मखाना के प्रमुख केंद्र के रूप में पहचाना जाने लगा है।
रिसर्च से पहचान तक का सफर
दरभंगा में ICAR का नेशनल रिसर्च सेंटर ऑन मखाना पहले से ही कार्यरत है, जो मखाना की बेहतर किस्मों के विकास, अधिक पैदावार और आधुनिक तकनीकों पर लगातार रिसर्च कर रहा है। इसके साथ ही दरभंगा को ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP)’ योजना के तहत मखाना के लिए चुना गया है। इस पहल से न सिर्फ जिले की पहचान मजबूत हुई है, बल्कि किसानों को सरकारी योजनाओं और बाजार से बेहतर जुड़ाव भी मिला है।
किसानों और मछुआरों के लिए बड़ा अवसर
सरकार का मानना है कि मखाना सेक्टर में किसानों और मछुआरों की आर्थिक स्थिति बदलने की जबरदस्त क्षमता है। जिन राज्यों और क्षेत्रों में जलस्रोत उपलब्ध हैं, वहां मखाना पारंपरिक फसलों का एक बेहतरीन विकल्प बन सकता है। यह फसल न सिर्फ कम जमीन में अच्छी आमदनी देती है, बल्कि जलयुक्त क्षेत्रों का बेहतर उपयोग भी सुनिश्चित करती है। यही कारण है कि मखाना अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत सहारा बनता जा रहा है।
नेशनल मखाना बोर्ड से बदलेगी तस्वीर
मखाना सेक्टर की पूरी क्षमता को सामने लाने के लिए सरकार ने 14 सितंबर 2025 को नेशनल मखाना (Fox Nut) बोर्ड की स्थापना की है। यह बोर्ड मखाना की पैदावार बढ़ाने, प्रोसेसिंग को आधुनिक बनाने, वैल्यू एडिशन, ब्रांडिंग, मार्केटिंग और एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने पर काम करेगा। इसका सीधा फायदा किसानों, प्रोसेसरों और निर्यातकों को मिलने की उम्मीद है।
साइंटिफिक खेती और मजबूत वैल्यू चेन
नेशनल मखाना बोर्ड का फोकस सिर्फ उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है। बोर्ड साइंटिफिक खेती, आधुनिक हार्वेस्टिंग तकनीक और बेहतर प्रोसेसिंग पर भी जोर देगा, जिससे मखाना की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हो सके। सरकार का लक्ष्य मखाना (Fox Nut) की पूरी वैल्यू चेन-किसान से लेकर प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और एक्सपोर्ट तक को मजबूत करना है, ताकि किसानों को बेहतर दाम मिलें और बिचौलियों पर निर्भरता कम हो।
476 करोड़ रुपये की बड़ी योजना
मखाना (Fox Nut) के विकास को गति देने के लिए सरकार ने 476.03 करोड़ रुपये की एक केंद्रीय योजना को मंजूरी दी है, जिसे 2025-26 से 2030-31 तक लागू किया जाएगा। इस योजना के तहत रिसर्च, अच्छी गुणवत्ता के बीज, किसानों की स्किल डेवलपमेंट, पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट, वैल्यू एडिशन, ब्रांडिंग और एक्सपोर्ट प्रमोशन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
ग्लोबल मार्केट में भारत की पकड़ और मजबूत
इन सभी प्रयासों का मकसद साफ है – ग्लोबल मखाना मार्केट में भारत की हिस्सेदारी को और मजबूत करना। हेल्थ कॉन्शियस दुनिया में मखाना (Fox Nut) की मांग तेजी से बढ़ रही है। अगर उत्पादन, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग सही दिशा में आगे बढ़ती रही, तो आने वाले वर्षों में मखाना किसानों के लिए गेम चेंजर साबित होगा साथ ही भारत की कृषि अर्थव्यवस्था को भी नई ऊंचाई देगा।