Government scheme: मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों की आमदनी बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य कैबिनेट ने हाल ही में ‘रेशम समृद्धि योजना’ को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत किसानों को रेशम उत्पादन की 23 गतिविधियों पर आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसका उद्देश्य न केवल किसानों की आय बढ़ाना है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई गति देना भी है।
भारत दुनिया में रेशम का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक और सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है। ऐसे में मध्य प्रदेश का यह कदम न केवल स्थानीय किसानों के लिए लाभकारी साबित होगा, बल्कि देश के रेशम उद्योग को भी नई दिशा देगा।
रेशम उत्पादन क्या है?
रेशम उत्पादन यानी सिल्क फार्मिंग या सेरीकल्चर एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें रेशम के कीड़ों को पाला जाता है ताकि उनसे मुलायम और चमकदार रेशम प्राप्त किया जा सके। ये कीड़े आमतौर पर शहतूत, ओक, अरंडी और अर्जुन के पत्तों पर पलते हैं। लगभग एक महीने के भीतर ये कीड़े कोकून बनाते हैं। इन कोकूनों को सावधानीपूर्वक इकट्ठा कर उबाला जाता है ताकि रेशम के धागे निकाले जा सकें।
फिर इन धागों को सूत में बदला जाता है और बुनाई के जरिए खूबसूरत रेशमी कपड़े तैयार किए जाते हैं। यह प्रक्रिया ग्रामीण इलाकों में रोजगार का एक स्थायी और पर्यावरण-हितैषी स्रोत बन सकती है।
कितनी मिलेगी किसानों को आर्थिक सहायता
‘रेशम समृद्धि योजना’ के तहत सरकार किसानों को आकर्षक सब्सिडी दे रही है, ताकि वे इस व्यवसाय में रुचि लें और इसे लाभदायक आय का साधन बना सकें। सामान्य वर्ग के किसानों को रेशम उत्पादन में आने वाले खर्च पर 75 फीसदी तक की सब्सिडी दी जाएगी। वहीं अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के किसानों को 90 फीसदी तक सहायता राशि मिलेगी। इस योजना में रेशम कीट पालन, कोया उत्पादन, धागा निकालना, विपणन, प्रशिक्षण, और उपकरणों की खरीद जैसी सभी प्रक्रियाएं शामिल की गई हैं।

किसानों के जीवन में क्या आएगा बदलाव?
रेशम उद्योग को ग्रामीण स्तर पर आय का एक नया स्रोत बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे किसानों को अतिरिक्त आमदनी का अवसर मिलेगा और वे पारंपरिक फसलों के अलावा एक और आय का स्थायी माध्यम विकसित कर पाएंगे। इस योजना से न केवल रेशम उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि ग्रामीण रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे। विशेष रूप से महिलाएं और युवा इस क्षेत्र में अपना भविष्य बना सकते हैं। राज्य सरकार का कहना है कि पारंपरिक खेती के साथ-साथ रेशम उत्पादन जैसी वैकल्पिक गतिविधियां किसानों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
23 गतिविधियों को मिलेगा सीधा लाभ
सरकार की इस योजना के तहत रेशम से जुड़ी 23 गतिविधियों को वित्तीय सहायता दी जाएगी। इनमें शामिल हैं:
– रेशम कीट पालन
– प्रशिक्षण और कौशल विकास
– उपकरण और मशीनरी की खरीद
– बीज उत्पादन केंद्रों की स्थापना
– कोकून प्रोसेसिंग
– रेशम धागा निकालने की इकाइयां
– विपणन और वितरण व्यवस्था
इन सभी चरणों में सहायता मिलने से किसानों को पूरी वैल्यू चेन में लाभ मिलेगा। इससे रेशम उत्पादन एक स्थायी और संगठित उद्योग के रूप में विकसित हो सकेगा।
भविष्य की संभावनाएं और सरकार की दृष्टि
राज्य सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में मध्य प्रदेश को देश का प्रमुख रेशम उत्पादन केंद्र बनाया जाए। इससे न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि राज्य के हस्तशिल्प और वस्त्र उद्योग को भी नई पहचान मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा है कि इस योजना से ग्रामीण इलाकों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और किसान “आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश” के सपने को साकार करने में अहम भूमिका निभाएंगे। ‘रेशम समृद्धि योजना’ सरकारी पहल है, जो किसानों की आजीविका और ग्रामीण विकास का समग्र मॉडल बन सकती है। इस योजना से रेशम उद्योग को नई जान मिलेगी और किसानों के चेहरे पर स्थायी मुस्कान लौटेगी।