GST Impact on Insurance Sector: बीमा सेक्टर में GST से जुड़े हालिया बदलावों ने जीवन और सामान्य बीमा कंपनियों की तस्वीर अलग-अलग कर दी है। जहां एक तरफ GST रेशनलाइजेशन से जीवन और स्वास्थ्य बीमा की मांग बढ़ी है, वहीं दूसरी ओर जीवन बीमा कंपनियों को इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) खत्म होने से मुनाफे पर दबाव का सामना करना पड़ रहा है। वित्त वर्ष 2026 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में इसका असर और साफ नजर आ सकता है।
जीवन बीमा कंपनियों को ITC का झटका
पहले जीवन बीमा प्रीमियम पर 18 फीसदी GST लागू था, जिसके तहत कंपनियों को इनपुट टैक्स क्रेडिट का फायदा मिलता था। अब कई पॉलिसीज़ को GST से छूट मिलने के बाद यह क्रेडिट खत्म हो गया है। इसका सीधा असर नए बिजनेस से होने वाले मुनाफे यानी VNB (Value of New Business) मार्जिन पर पड़ा है। एनालिस्ट्स के मुताबिक, GST छूट की वजह से हुए ITC नुकसान का VNB पर 175 से 350 बेसिस पॉइंट तक का असर देखा जा रहा है।
मांग बढ़ी, लेकिन मार्जिन दबाव में
GST रेशनलाइजेशन से व्यक्तिगत जीवन और स्वास्थ्य बीमा की मांग में अच्छी तेजी आई है। प्रीमियम ग्रोथ मजबूत बनी हुई है, लेकिन इसके साथ ही कंपनियों की कमाई पर दबाव भी बढ़ा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ज्यादा गैर-भागीदारी (Non-Participating) और सुरक्षा आधारित प्रोडक्ट्स बेचकर, डिस्ट्रीब्यूटर्स के साथ बेहतर शर्तों पर काम करके और ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाकर इस दबाव को काफी हद तक संभाला जा सकता है।
प्रीमियम ग्रोथ में बने रहने की उम्मीद
एनालिस्ट्स का अनुमान है कि जीवन बीमा कंपनियों के सालाना प्रीमियम (APE) में अच्छी बढ़त देखने को मिल सकती है। GST बदलाव और नए सरेंडर वैल्यू नियमों के बाद पुराने आंकड़ों का असर धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है। प्राइवेट सेक्टर में एक्सिस मैक्स लाइफ सबसे तेज़ ग्रोथ दिखा सकती है। इसके बाद SBI लाइफ, HDFC लाइफ और ICICI प्रूडेंशियल लाइफ का नंबर आ सकता है। वहीं सरकारी कंपनी LIC में भी APE ग्रोथ मजबूत रहने की संभावना है, क्योंकि पिछले साल का आधार कमजोर था और ग्रुप बिजनेस में अच्छी तेजी बनी हुई है।
कंपनी-वार VNB मार्जिन का अनुमान
MK ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज के मुताबिक, वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में SBI लाइफ की VNB मार्जिन करीब 26.3 फीसदी रह सकती है, जो पिछली तिमाही से कम है। HDFC लाइफ की मार्जिन 23.9 फीसदी रहने का अनुमान है। ICICI प्रूडेंशियल लाइफ की मार्जिन 22.9 फीसदी रह सकती है, जो सालाना आधार पर बेहतर है। एक्सिस मैक्स लाइफ की मार्जिन 23 फीसदी और LIC की मार्जिन बढ़कर 20.4 फीसदी तक पहुंच सकती है। ग्रुप बिजनेस में मजबूत ग्रोथ के चलते LIC के APE में करीब 40 फीसदी तक की बढ़त संभव मानी जा रही है।
सामान्य बीमा कंपनियों को निवेश का सहारा
जहां जीवन बीमा कंपनियां ITC के नुकसान से जूझ रही हैं, वहीं सामान्य बीमा कंपनियों को निवेश से होने वाली कमाई का सहारा मिल रहा है। नए वाहनों की बिक्री बढ़ने से मोटर ओन-डैमेज सेगमेंट में अच्छी ग्रोथ देखने को मिल रही है। इसके अलावा टैक्स सपोर्ट और 1/N अकाउंटिंग नियमों के सामान्य होने से स्वास्थ्य बीमा में भी प्रीमियम ग्रोथ मजबूत रहने की उम्मीद है।
कॉम्बाइंड रेशियो और मुनाफे की स्थिति
हालांकि कमीशन बढ़ने की वजह से कुछ सामान्य बीमा कंपनियों का कॉम्बाइंड रेशियो ऊंचा रह सकता है, लेकिन बेहतर ऑपरेशनल एफिशिएंसी और क्लेम रेशियो में हल्का सुधार राहत दे सकता है। MK के अनुमान के मुताबिक, ICICI लोम्बार्ड का कॉम्बाइंड रेशियो करीब 103 फीसदी, स्टार हेल्थ का 102.4 फीसदी और गो डिजिट का 108 फीसदी रह सकता है। निवेश से मिलने वाली आय के चलते पीएटी ग्रोथ अच्छी बनी रहने की संभावना है।
आगे की राह
GST बदलावों ने बीमा सेक्टर में ग्रोथ और दबाव दोनों पैदा किए हैं। जीवन बीमा कंपनियों को जहां ITC के नुकसान से निपटना पड़ रहा है, वहीं सामान्य बीमा कंपनियों को निवेश आय और मोटर-हेल्थ सेगमेंट की ग्रोथ से मजबूती मिल रही है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि तिमाही नतीजों में दबाव दिखेगा, लेकिन लंबे समय में ये बदलाव सेक्टर को ज्यादा मजबूत और संतुलित बना सकते हैं।