India–Canada relations: भारत और कनाडा के संबंध एक बार फिर नई दिशा और नई गति की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। हाल के घटनाक्रम इस बात के संकेत हैं कि दोनों देश कूटनीतिक स्तर के साथ शिक्षा, व्यापार और शोध सहयोग के क्षेत्र में भी अपने रिश्तों को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। आने वाले महीनों में होने वाली उच्चस्तरीय यात्राएं और संवाद इस साझेदारी को नया आयाम दे सकते हैं।
मार्च में भारत आ सकते हैं कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के मार्च के अंत तक भारत यात्रा पर आने की संभावना है। इस प्रस्तावित यात्रा को भारत–कनाडा संबंधों में बीते कुछ वर्षों की ठहराव भरी स्थिति के बाद एक बड़े सकारात्मक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। दोनों देशों के बीच पहले से ही व्यापार समझौते को लेकर नई बातचीत शुरू हो चुकी है और फिलहाल इसके दायरे और शर्तों पर चर्चा चल रही है।
21 कनाडाई विश्वविद्यालयों के प्रमुख भारत दौरे पर
इसी बीच शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग को नई रफ्तार देने की दिशा में एक अहम पहल सामने आई है। कनाडा के विश्वविद्यालयों की प्रतिनिधि संस्था यूनिवर्सिटीज कनाडा ने घोषणा की है कि देश भर के 21 प्रमुख विश्वविद्यालयों के प्रेसिडेंट फरवरी के पहले सप्ताह में भारत का दौरा करेंगे। यह प्रतिनिधिमंडल 2 से 6 फरवरी तक भारत में रहेगा। यूनिवर्सिटीज कनाडा ने कहा कि यह दौरा कनाडा सरकार द्वारा भारत–कनाडा संबंधों में नए उत्साह और व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) की दिशा में शुरू की गई बातचीत के अनुरूप है।
शोध और उद्योग साझेदारी पर रहेगा फोकस
यूनिवर्सिटीज कनाडा के अनुसार, यह मिशन भारत और कनाडा के बीच शोध सहयोग को मजबूत करेगा और उद्योग जगत के साथ साझेदारी के नए अवसर तलाशेगा। यह पहल कनाडा के संघीय बजट में हाल ही में घोषित 1.7 अरब डॉलर की शोध और प्रतिभा रणनीति पर आधारित है। साथ ही, यह मिशन अक्टूबर 2025 में घोषित भारत–कनाडा संबंधों के नए रोडमैप को भी आगे बढ़ाता है, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच एक दीर्घकालिक और संतुलित साझेदारी को आकार देना है।
भारत के प्रमुख राज्यों और संस्थानों से होगी मुलाकात
इस दौरे के दौरान कनाडा के विश्वविद्यालयों के प्रेसिडेंट भारत के उच्च शिक्षा क्षेत्र के अग्रणी लोगों से मुलाकात करेंगे। इसके अलावा वे गोवा, नई दिल्ली और गुजरात सरकार के प्रतिनिधियों, उद्योग जगत के नेताओं और गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी (GIFT City) के अधिकारियों से भी बातचीत करेंगे। इन बैठकों में शोध सहयोग, अकादमिक आदान-प्रदान, संयुक्त डिग्री प्रोग्राम और स्टूडेंट मोबिलिटी जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी।
शिक्षा को बताया गया साझेदारी की नींव
भारत में कनाडा के उच्चायुक्त क्रिस्टोफर कूटर ने कहा कि भारत और कनाडा के बीच शिक्षा सहयोग का एक लंबा और मजबूत इतिहास रहा है। उनके अनुसार, कनाडाई विश्वविद्यालयों के प्रमुखों की यह यात्रा शोध और शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसर खोलने की दिशा में एक बड़ा कदम है। वहीं कनाडा में भारत के उच्चायुक्त दिनेश के. पटनायक ने कहा कि शिक्षा भारत–कनाडा साझेदारी की बुनियाद है। यह न केवल आम लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करती है, बल्कि शोध, नवाचार और सतत विकास को भी बढ़ावा देती है।
व्यापार और ऊर्जा सहयोग को भी मिल रहा बढ़ावा
व्यापार के मोर्चे पर भी दोनों देश नए सिरे से जुड़ने को तैयार हैं। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने हाल ही में दावोस में विश्व आर्थिक मंच के दौरान कहा था कि कनाडा अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए भारत और चीन जैसे देशों के साथ मजबूत व्यापारिक संबंध बनाना चाहता है। भारत और कनाडा ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा दोनों देशों के बीच 2.8 अरब डॉलर मूल्य के यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति समझौते और परमाणु सहयोग पर भी बातचीत चल रही है।
भविष्य की ओर बढ़ता भारत–कनाडा सहयोग
हालिया पहलें यह साफ संकेत देती हैं कि भारत और कनाडा अपने रिश्तों को एक नए, व्यावहारिक और भविष्य-केंद्रित फ्रेमवर्क में ढालना चाहते हैं। शिक्षा, शोध, व्यापार और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग आने वाले वर्षों में दोनों देशों के लिए साझा विकास और स्थिरता का मजबूत आधार बन सकता है।