Indian Pharma: भारत का दवा बाजार एक बार फिर मजबूती के साथ बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक फरवरी 2026 में भारतीय फार्मा बाजार (Indian Pharmaceutical Market – IPM) में सालाना आधार पर करीब 12 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है। यह आंकड़ा पिछले साल फरवरी की तुलना में काफी बेहतर है, जब बाजार में केवल 4 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई थी।
हालांकि महीने-दर-महीने आधार पर बाजार में हल्की गिरावट भी देखी गई है। जनवरी के मुकाबले फरवरी में कुल बिक्री में करीब 3 प्रतिशत की कमी आई। इसके बावजूद सालाना वृद्धि यह संकेत देती है कि दवा उद्योग में मांग लगातार बढ़ रही है और कई सेगमेंट बाजार को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
क्रॉनिक बीमारियों की दवाएं बनीं बाजार की ताकत
फार्मा बाजार में इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा योगदान लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों यानी क्रॉनिक सेगमेंट की दवाओं का रहा है। रिपोर्ट के अनुसार फरवरी में क्रॉनिक दवाओं की बिक्री में लगभग 17 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
इस श्रेणी में खास तौर पर दिल की बीमारी और डायबिटीज से जुड़ी दवाओं की मांग तेजी से बढ़ी है। कार्डियक दवाओं की बिक्री करीब 17 प्रतिशत बढ़ी, जबकि एंटी-डायबिटिक दवाओं की बिक्री में लगभग 16 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह दोनों ही सेगमेंट पूरे फार्मा बाजार की औसत वृद्धि से ज्यादा तेजी दिखा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती जीवनशैली, तनाव, अनियमित खानपान और मोटापे जैसी समस्याओं के कारण इन बीमारियों के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जिसका सीधा असर दवा बाजार की मांग पर दिखाई दे रहा है।
कुछ सेगमेंट की रफ्तार रही धीमी
हालांकि फार्मा बाजार के सभी सेगमेंट में समान रूप से तेजी नहीं दिखी। कुछ श्रेणियों में वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी रही। उदाहरण के तौर पर एंटी-इन्फेक्टिव, गैस्ट्रो और डर्मा सेगमेंट की वृद्धि बाजार की औसत दर से कम रही। विश्लेषकों के मुताबिक इन श्रेणियों में मांग मौसम और संक्रमण से जुड़े कारकों पर ज्यादा निर्भर करती है। इसलिए इनकी बिक्री में उतार-चढ़ाव आम बात है।
टॉप कंपनियों के बीच बढ़ी प्रतिस्पर्धा
फरवरी के आंकड़ों से यह भी साफ होता है कि बड़ी फार्मा कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। टॉप 10 कंपनियों में से पांच कंपनियों ने बाजार की औसत वृद्धि से ज्यादा तेज़ प्रदर्शन किया। इनमें इंटास और सन फार्मा सबसे तेजी से बढ़ने वाली कंपनियों में शामिल रहीं। इनके बाद डॉ. रेड्डीज, टोरेंट फार्मा और लूपिन का प्रदर्शन भी मजबूत रहा। अगर पूरे साल के आंकड़ों को देखें तो भारतीय फार्मा बाजार में करीब 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इस वृद्धि में कीमतों में बढ़ोतरी, नए उत्पादों की लॉन्चिंग और बिक्री की मात्रा—तीनों का योगदान रहा है।
बहुराष्ट्रीय कंपनियों की बढ़त ज्यादा
फरवरी में भारतीय कंपनियों की बिक्री में जहां करीब 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, वहीं बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) ने इससे भी तेज़ रफ्तार दिखाई। उनकी बिक्री में लगभग 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे कई वजहें हैं। मौसम बदलने के कारण बीमारियों में बढ़ोतरी, मरीजों की संख्या में इजाफा, महंगी लेकिन प्रभावी दवाओं की बढ़ती मांग और छोटे शहरों तथा ग्रामीण इलाकों में दवा बाजार का विस्तार—ये सभी कारक इस वृद्धि को बढ़ावा दे रहे हैं।
कुछ ब्रांड बने बाजार के स्टार
फरवरी महीने में कुछ खास दवा ब्रांडों ने शानदार प्रदर्शन किया। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा मौनजारो ब्रांड की रही, जिसकी बिक्री लगभग 1.2 अरब रुपये तक पहुंच गई। इसके अलावा पैन, इलेक्ट्राल, टेल्मा, लैंटस और मोनोसेफ जैसे ब्रांडों ने भी बाजार में मजबूत वृद्धि दर्ज की। इन ब्रांडों की लोकप्रियता यह दिखाती है कि मरीजों के बीच भरोसेमंद और प्रभावी दवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है।
आगे कैसा रहेगा बाजार का रुख
ब्रोकरेज रिपोर्ट के अनुसार आने वाले समय में कार्डियक, न्यूरोलॉजी और डायबिटीज से जुड़ी दवाओं की मांग और मजबूत हो सकती है। अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026 में भारतीय फार्मा बाजार लगभग 10 प्रतिशत की दर से बढ़ सकता है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि ब्रांडेड दवाओं की बिक्री मात्रा में वृद्धि सीमित रह सकती है। इसकी एक बड़ी वजह सस्ती जेनेरिक दवाओं और जन औषधि केंद्रों की बढ़ती पहुंच है, जो बाजार में प्रतिस्पर्धा को और तेज बना रही है।
निवेश के लिए पसंदीदा स्टॉक
ब्रोकरेज फर्म एंटीक ने अपनी रिपोर्ट में निवेशकों के लिए एक खास फार्मा कंपनी को पसंदीदा बताया है। रिपोर्ट के अनुसार टोरेंट फार्मा इस समय निवेश के लिहाज से मजबूत विकल्प बनकर उभर रही है। कंपनी का मजबूत दवा पोर्टफोलियो, लगातार बढ़ती बिक्री और भविष्य की ग्रोथ संभावनाएं इसे फार्मा सेक्टर में बेहतर स्थिति में रखती हैं।
कुल मिलाकर देखा जाए तो भारतीय फार्मा बाजार फिलहाल मजबूत गति से आगे बढ़ रहा है। खास तौर पर कार्डियक और डायबिटीज से जुड़ी दवाओं की मांग इस सेक्टर की ग्रोथ को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही है। आने वाले समय में नई तकनीक, शोध और बढ़ती स्वास्थ्य जागरूकता इस उद्योग को और मजबूत बना सकती है।