भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला सोमवार को और तेज हो गया। लगातार दूसरे कारोबारी दिन बिकवाली हावी रही, जिससे निवेशकों की संपत्ति में दो दिनों के भीतर ₹10 लाख करोड़ से अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक राजनीतिक तनाव, विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी और केंद्रीय बजट से पहले की अनिश्चितता ने बाजार की धारणा को बुरी तरह प्रभावित किया।
सेंसेक्स 1,065.71 अंक टूटकर 82,180.47 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि व्यापक निफ्टी 50 353 अंक गिरकर 25,232.50 पर आ गया। दिनभर बाजार में कमजोरी का माहौल बना रहा और लगभग सभी सेक्टर लाल निशान में बंद हुए।
ट्रम्प की टैरिफ धमकी से बढ़ा तनाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा आठ यूरोपीय देशों पर नए टैरिफ लगाने की धमकी ने वैश्विक बाजारों में बेचैनी और बढ़ा दी है। इस विवाद का केंद्र ग्रीनलैंड को लेकर ट्रम्प का आक्रामक रुख माना जा रहा है।
इसके जवाब में यूरोपीय संघ ने भी अमेरिका पर पलटवार की तैयारी शुरू कर दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यदि अमेरिका 1 फरवरी से 10% टैरिफ लागू करता है, तो यूरोपीय संघ $108 बिलियन के अमेरिकी सामान पर जवाबी शुल्क लगाने पर विचार कर रहा है।
विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
भारतीय शेयर बाजार की कमजोरी का एक बड़ा कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की भारी निकासी है। इस महीने अब तक FIIs भारतीय इक्विटी बाजार से ₹29,000 करोड़ से अधिक की बिकवाली कर चुके हैं। ICICI Securities के रिसर्च हेड पंकज पांडे के मुताबिक, विदेशी निवेशकों की बिकवाली की तीव्रता अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। कमजोर रुपया और भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर अनिश्चितता विदेशी निवेशकों को सतर्क बना रही है, जिससे बाजार पर दबाव लगातार बना हुआ है।
कमजोर कॉर्पोरेट नतीजों से नहीं मिली राहत
घरेलू मोर्चे पर तीसरी तिमाही के कॉर्पोरेट नतीजे भी बाजार को सहारा देने में नाकाम रहे। नए लेबर कोड्स के एकमुश्त प्रभाव के कारण कंपनियों के नतीजे औसत रहे और किसी भी बड़े सेक्टर या कंपनी ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन नहीं किया। इससे निवेशकों की धारणा और कमजोर हुई और बाजार में जोखिम लेने की प्रवृत्ति कम होती चली गई।
बजट से पहले निवेशकों की सतर्कता
1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट 2026 से पहले निवेशक बेहद सतर्क नजर आ रहे हैं। बाजार को उम्मीद है कि सरकार उपभोग बढ़ाने के लिए कुछ राहत उपायों की घोषणा कर सकती है, लेकिन साथ ही यह आशंका भी बनी हुई है कि राजकोषीय समेकन के दबाव में सरकार की पूंजीगत खर्च क्षमता सीमित हो सकती है।
इसी अनिश्चितता के चलते निवेशक फिलहाल बड़े दांव लगाने से बच रहे हैं और जोखिम-मुक्त रणनीति अपना रहे हैं।
सुरक्षित निवेश की ओर झुकाव: सोना-चांदी चमके
शेयर बाजार में भारी गिरावट के बीच निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ता दिखा। सोना और चांदी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गईं। वैश्विक राजनीतिक तनाव और घरेलू आर्थिक संकेतों को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच निवेशक इक्विटी से पैसा निकालकर कीमती धातुओं में निवेश कर रहे हैं, ताकि जोखिम को कम किया जा सके।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अमेरिका-यूरोप ट्रेड विवाद पर स्थिति स्पष्ट नहीं होती और घरेलू स्तर पर अर्थव्यवस्था से मजबूत संकेत नहीं मिलते, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। फिलहाल निवेशकों के लिए सतर्कता और संतुलित रणनीति अपनाना ही बेहतर विकल्प माना जा रहा है।