भारतीय टेक्सटाइल और अपैरल इंडस्ट्री के लिए US से एक बड़ी राहत की खबर सामने आ रही है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के हालिया संकेतों से उम्मीद जगी है कि भारत को भी अमेरिकी बाजार में टेक्सटाइल निर्यात के लिए जीरो-ड्यूटी एक्सेस मिल सकता है। अभी तक यह सुविधा मुख्य रूप से बांग्लादेश जैसे देशों को मिलती रही है, जिससे भारतीय निर्यातकों को कीमत के मामले में नुकसान उठाना पड़ता था। अगर यह समझौता होता है, तो अमेरिका में भारतीय गारमेंट और टेक्सटाइल उत्पाद बांग्लादेश के मुकाबले ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो सकते हैं।
इंडस्ट्री सूत्रों के मुताबिक, यह संभावित ट्रेड व्यवस्था मार्च के अंत तक साइन हो सकती है। नई दिल्ली में वाणिज्य भवन में हुई एक बैठक में मंत्री ने इंडस्ट्री लीडर्स को भरोसा दिलाया कि भारत अमेरिका के साथ बांग्लादेश जैसी व्यवस्था पर गंभीरता से विचार कर रहा है।
जीरो-ड्यूटी एक्सेस क्या है और भारत को इससे क्या फायदा होगा?
अमेरिका की शुरुआती टैरिफ गाइडलाइंस के मुताबिक, अगर कोई देश अमेरिका से आयात होने वाले कच्चे माल का कम से कम 20 फीसदी हिस्सा इस्तेमाल कर तैयार उत्पाद बनाता है, तो वह उस तैयार माल को अमेरिका में बिना किसी आयात शुल्क के निर्यात कर सकता है। यही व्यवस्था बांग्लादेश जैसे देशों को फायदा देती है।
अगर भारत को भी यह सुविधा मिलती है, तो भारतीय टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स को अमेरिकी बाजार में कीमत के मोर्चे पर बड़ी राहत मिलेगी। अभी भारतीय उत्पादों पर लगने वाला शुल्क उन्हें बांग्लादेश के मुकाबले महंगा बना देता है। जीरो-ड्यूटी एक्सेस मिलने से यह अंतर काफी हद तक खत्म हो सकता है और भारत की बाजार हिस्सेदारी बढ़ने की संभावना बनेगी।
बांग्लादेश की बढ़त पर ब्रेक, भारत की पकड़ मजबूत
अब तक अमेरिकी बाजार में बांग्लादेश को ड्यूटी फ्री एक्सेस मिलने से उसे एक तरह का मार्केट एडवांटेज मिला हुआ था। इससे भारतीय निर्यातकों पर दबाव बढ़ गया था। इंडस्ट्री सूत्रों का मानना है कि अगर भारत को भी वही सुविधा मिल जाती है, तो बांग्लादेश के मुकाबले भारत की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत होगी।
इससे भारतीय कंपनियों को लंबे समय के कॉन्ट्रैक्ट मिलने की उम्मीद बढ़ेगी और बड़े अमेरिकी ब्रांड्स के साथ सप्लाई चेन मजबूत हो सकती है। इसका सीधा असर रोजगार और फैक्ट्रियों में उत्पादन बढ़ने के रूप में दिखाई दे सकता है।
क्या बांग्लादेश को होने वाले कॉटन निर्यात पर पड़ेगा असर?
इस मुद्दे पर यह चिंता भी जताई जा रही थी कि अगर भारत अमेरिका के लिए जीरो-ड्यूटी व्यवस्था अपनाता है, तो बांग्लादेश को होने वाला भारतीय कॉटन निर्यात प्रभावित हो सकता है। बांग्लादेश हर साल करीब 85 लाख गांठ कपास आयात करता है, जिसमें भारत, ब्राजील और अफ्रीकी देशों की हिस्सेदारी रहती है। भारत औसतन हर साल बांग्लादेश को लगभग 12 लाख गांठ कपास निर्यात करता है। हालांकि, इंडस्ट्री का मानना है कि नई ट्रेड व्यवस्था से इस निर्यात पर कोई बड़ा नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। वजह यह है कि बांग्लादेश की गारमेंट इंडस्ट्री अपनी जरूरत के मुताबिक यार्न और फैब्रिक का बड़ा हिस्सा आयात करती है और उसकी निर्भरता सिर्फ एक देश पर नहीं है।
भारत की कपास स्थिति: उत्पादन ज्यादा, मांग और ज्यादा
भारत हर साल लगभग 3.7 करोड़ गांठ कपास का उत्पादन करता है। इसके बावजूद घरेलू मांग पूरी करने के लिए करीब 50 लाख गांठ कपास का आयात भी करना पड़ता है। यानी मौजूदा समय में भारत के पास कपास की अतिरिक्त उपलब्धता नहीं है। इंडस्ट्री सूत्रों के मुताबिक, यूनाइटेड किंगडम और यूरोपीय यूनियन के साथ हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट और आने वाले अमेरिका-भारत ट्रेड एग्रीमेंट के चलते आने वाले समय में भारत के टेक्सटाइल और अपैरल निर्यात में तेज उछाल देखने को मिल सकता है। इससे देश में स्पिनिंग, वीविंग और प्रोसेसिंग की क्षमता बढ़ेगी और घरेलू कपास खपत भी बढ़ेगी।
किसानों के लिए खतरा नहीं, बल्कि मौका
कुछ लोगों को डर है कि बदलती ट्रेड पॉलिसी से भारतीय कपास किसानों पर असर पड़ सकता है। लेकिन इंडस्ट्री का आकलन इसके उलट है। अगर टेक्सटाइल एक्सपोर्ट बढ़ता है, तो कपास की घरेलू मांग भी बढ़ेगी। अगर कपास की उत्पादकता और खेती का रकबा समान रफ्तार से नहीं बढ़ा, तो भारत को भविष्य में कपास आयात और बढ़ाना पड़ सकता है। ऐसे में किसानों के लिए बेहतर कीमत मिलने और कपास की खेती का दायरा बढ़ाने का अच्छा मौका बन सकता है।
टेक्सटाइल सेक्टर के लिए बड़ा टर्निंग पॉइंट
अगर अमेरिका के साथ जीरो-ड्यूटी एक्सेस का समझौता होता है, तो यह भारतीय टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। इससे अमेरिका में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत होगी, निर्यात बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। बांग्लादेश को मिलने वाली बढ़त कम होने से भारत को अपने उत्पादों की गुणवत्ता और स्केल के दम पर आगे निकलने का मौका मिलेगा। कुल मिलाकर, बदलता ट्रेड माहौल भारतीय टेक्सटाइल सेक्टर के लिए चुनौती से ज्यादा अवसर लेकर आ रहा है।