नए साल के पहले महीने में इंडस्ट्रियल एम्पायर का जनवरी अंक भारत की बदलती औद्योगिक, आर्थिक और उद्यमशील तस्वीर को प्रस्तुत करता है। यह अंक उस भारत की कहानी है जो खेतों, फैक्ट्रियों, गैराजों और स्टार्टअप हब्स से निकलकर वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बना रहा है।
इस अंक में एक ओर मध्य प्रदेश के बुरहानपुर का केला उद्योग है, जो अपार संभावनाओं से भरपूर होने के बावजूद आज भी सरकारी सहयोग और नीतिगत समर्थन की प्रतीक्षा कर रहा है। वहीं दूसरी ओर बिहार की मखाना आधारित अर्थव्यवस्था और चिया सीड्स की उभरती खेती है, जो किसानों के लिए भविष्य की स्थायी आय, वैश्विक मांग और सशक्त ब्रांडिंग का मजबूत आधार बनती जा रही हैं।
यह अंक हरित भविष्य की दिशा भी दिखाता है। मशरूम लेदर, ग्रीन स्टील और टेक्निकल टेक्सटाइल की ओर बढ़ते हुए भारत अब विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना सीख रहा है। वहीं, Al इंफ्रास्ट्रक्चर में 60 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश भारत को टेक दिग्गजों का अगला बड़ा हब बनाने की कहानी कहता है।
रायपुर से मसालों की दुनिया तक जॉफ फूड्स की कहानी हो या गैरेज से ग्लोबल कंपनी बनाने वाले श्रीकांत बडवे की सफलता-ये किस्से नए उद्यमियों के लिए मार्गदर्शन भी हैं और प्रेरणा भी। वहीं मीशो की प्रीमियम लिस्टिंग और इंडिगो का उड़ान संकट, दोनों ही कॉर्पोरेट भारत के उतार-चढ़ाव को ईमानदारी से सामने रखते हैं। नीति, वित्त और वैश्विक घटनाक्रम भी इस अंक का अहम हिस्सा हैं। उत्तर प्रदेश का उभरता बैंकिंग इकोसिस्टम, बजट 2026 से मिडिल क्लास की उम्मीदें, भारत-रूस संबंधों की नई परतें और साइबर क्राइम के नए चेहरे जैसे विषय पाठकों को सोचने पर मजबूर करते हैं।
इसके साथ ही इंटरनेशनल टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी एक्सपो, इंडिया फूड एक्सपो और IIA उद्यमी रत्न अवॉर्ड जैसे आयोजन भारत के MSME और निवेश परिदृश्य की नई कहानी कहते हैं। यह अंक उस भारत का आईना है, जो चुनौतियों के बीच भी अवसर खोज रहा है।
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