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The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation > एग्रीकल्चर > PM-KUSUM Scheme के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा: किसानों को ठग रहे नकली वेबसाइट और ऐप, सरकार ने जारी की चेतावनी
एग्रीकल्चर

PM-KUSUM Scheme के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा: किसानों को ठग रहे नकली वेबसाइट और ऐप, सरकार ने जारी की चेतावनी

Shashank Pathak
Last updated: 22/02/2026 3:07 PM
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Shashank Pathak
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PM-KUSUM Scheme के नाम पर फर्जी वेबसाइट से किसानों के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी की चेतावनी
PM-KUSUM Scheme
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PM-KUSUM Scheme: देश के किसानों को सौर ऊर्जा से जोड़कर आय बढ़ाने वाली प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) योजना पर अब साइबर ठगों की नजर पड़ गई है। सोलर पंप पर सब्सिडी दिलाने के नाम पर फर्जी वेबसाइट और मोबाइल ऐप के जरिए किसानों से लाखों रुपये की ठगी की जा रही है। सरकार ने इसे गंभीर खतरा मानते हुए किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है और स्पष्ट किया है कि अनधिकृत लिंक पर आवेदन या भुगतान करना सीधे बैंक खाते को जोखिम में डाल सकता है।

मंत्रालय ने जारी की आधिकारिक चेतावनी
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने बताया कि उसके संज्ञान में कई ऐसी फर्जी वेबसाइट और ऐप आए हैं, जो पीएम-कुसुम योजना के नाम पर किसानों से ऑनलाइन आवेदन भरवाकर रजिस्ट्रेशन फीस और सोलर पंप की कीमत जमा करने को कह रहे हैं। मंत्रालय ने साफ कहा है कि योजना की एकमात्र आधिकारिक वेबसाइट “pmkusum.mnre.gov.in” है। इसके अलावा किसी भी अन्य पोर्टल या ऐप के जरिए किया गया आवेदन अवैध माना जाएगा।

मंत्रालय के अनुसार ठग वेबसाइट के नाम ऐसे रखते हैं, जो सरकारी पोर्टल जैसे दिखते हैं, जिससे किसान भ्रमित हो जाते हैं। कई मामलों में किसानों से हजारों से लेकर लाखों रुपये तक की ठगी की शिकायतें सामने आई हैं।

ऐसे पहचानें फर्जी वेबसाइट
सरकार ने किसानों को सलाह दी है कि वे वेबसाइट का डोमेन और लिंक ध्यान से जांचें। फर्जी पोर्टल अक्सर .org, .com या .in जैसे डोमेन में होते हैं और नाम में “कुसुम”, “किसान” या “योजना” जैसे शब्द जोड़ देते हैं। उदाहरण के तौर पर kusumyojanaonline, pmkisankusumyojana, onlinekusumyojana जैसे लिंक पूरी तरह फर्जी बताए गए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि असली सरकारी वेबसाइट सामान्यतः .gov.in डोमेन में होती है और उस पर मंत्रालय या राज्य विभाग का स्पष्ट उल्लेख होता है। यदि किसी वेबसाइट पर सीधे भुगतान का दबाव बनाया जा रहा हो, तो वह धोखाधड़ी का संकेत हो सकता है।

पीएम-कुसुम योजना क्या है और क्यों है महत्वपूर्ण
प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (PM-KUSUM) योजना का उद्देश्य कृषि क्षेत्र को डीजल मुक्त बनाना और किसानों की आय बढ़ाना है। इसके तहत किसानों को सोलर पंप लगाने या पुराने बिजली चालित कृषि पंपों को सौर ऊर्जा से जोड़ने पर 30% से 50% तक सब्सिडी दी जाती है। इससे किसानों का ईंधन खर्च घटता है और सिंचाई अधिक सस्ती हो जाती है।

योजना का एक बड़ा पहलू यह भी है कि किसान अपनी बंजर या अनुपयोगी जमीन पर 2 मेगावाट तक का सोलर प्लांट लगा सकते हैं। इस प्लांट से पैदा बिजली स्थानीय डिस्कॉम को बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित की जा सकती है। यही कारण है कि यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि ऊर्जा परिवर्तन के लिए अहम मानी जाती है।

राज्य सरकारों के जरिए होता है क्रियान्वयन
सरकार ने स्पष्ट किया है कि पीएम-कुसुम योजना का कार्यान्वयन सीधे केंद्र से नहीं, बल्कि राज्य सरकारों के नामित विभागों के माध्यम से किया जाता है। यानी आवेदन, सत्यापन और स्थापना की प्रक्रिया राज्य स्तर पर अधिकृत एजेंसियों द्वारा पूरी होती है। ऐसे में किसी निजी वेबसाइट या ऐप द्वारा सीधे पंप लगाने का दावा करना संदिग्ध माना जाएगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि किसान यदि आवेदन करना चाहते हैं, तो उन्हें अपने जिले के कृषि या ऊर्जा विभाग से संपर्क करना चाहिए या आधिकारिक पोर्टल से जानकारी लेनी चाहिए। बिना सत्यापन किसी एजेंट या ऑनलाइन पोर्टल को भुगतान करना जोखिम भरा हो सकता है।

किसानों के लिए सुरक्षा सलाह
सरकार और साइबर विशेषज्ञों ने किसानों को कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां बरतने की सलाह दी है। सबसे पहले, किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले उसका स्रोत जांचें। दूसरे, योजना के नाम पर किसी भी तरह की अग्रिम फीस या ऑनलाइन भुगतान से बचें। तीसरे, केवल सरकारी पोर्टल या अधिकृत विभाग से ही आवेदन प्रक्रिया पूरी करें।

यदि किसी किसान को संदिग्ध कॉल, मैसेज या वेबसाइट की जानकारी मिलती है, तो वह तुरंत संबंधित विभाग या साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत कर सकता है। पीएम-कुसुम योजना से जुड़ी आधिकारिक जानकारी के लिए MNRE की वेबसाइट mnre.gov.in या टोल-फ्री नंबर 1800-180-3333 पर संपर्क करने की सलाह दी गई है।

बढ़ती साइबर ठगी के बीच जागरूकता जरूरी
डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ सरकारी योजनाओं से जुड़े साइबर फ्रॉड भी तेजी से बढ़ रहे हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी जानकारी की कमी के कारण किसान आसानी से ऐसे जाल में फंस जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।

स्पष्ट है कि पीएम-कुसुम जैसी लाभकारी योजना को बदनाम करने और किसानों को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के लिए ठग सक्रिय हैं। ऐसे में जरूरी है कि किसान केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें और किसी भी संदिग्ध ऑफर या वेबसाइट से दूर रहें। सही जानकारी और सतर्कता ही उन्हें इस “महा-फर्जीवाड़ा” से सुरक्षित रख सकती है।

TAGGED:AgricultureCyber Fraud IndiaIndustrial EmpireKisan YojanaPM Kusum YojanaPM Kusum Yojana ScamPM-KUSUM Scheme
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