Pharma: शरीर में बढ़ा हुआ ‘बैड कोलेस्ट्रॉल’ (LDL) कई गंभीर बीमारियों की जड़ माना जाता है। इससे हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक और ब्लड सर्कुलेशन से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। आमतौर पर डॉक्टर कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने के लिए दवाएं, खानपान और नियमित व्यायाम की सलाह देते हैं। लेकिन अब वैज्ञानिकों ने एक ऐसा नया जेनेटिक-एडिटिंग ट्रीटमेंट खोजा है, जो सिर्फ एक डोज़ में ही कोलेस्ट्रॉल का लेवल आधा कर सकता है।
नई रिसर्च में मिला चौंकाने वाला नतीजा
इस खोज को ‘द न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन’ में प्रकाशित किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, वैज्ञानिकों ने एक सिंगल-डोज़ जेनेटिक एडिटिंग ट्रीटमेंट विकसित किया है, जो LDL (बैड कोलेस्ट्रॉल) और ट्राइग्लिसराइड्स को लगभग 50 प्रतिशत तक घटा देता है। यह शोध अभी शुरुआती स्तर पर है, लेकिन इसे कोलेस्ट्रॉल के इलाज में क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है। इस थेरेपी से न केवल कोलेस्ट्रॉल घटाया जा सकता है, बल्कि यह भविष्य में उन लोगों के लिए वरदान साबित हो सकती है जिन्हें दवाओं से कोई असर नहीं मिलता।
15 मरीजों पर किया गया था ट्रायल
रिसर्च में वैज्ञानिकों ने 15 मरीजों को शामिल किया, जिनका कोलेस्ट्रॉल स्तर सामान्य दवाओं से नियंत्रित नहीं हो पा रहा था। इन मरीजों को एक सिंगल-डोज़ ट्रीटमेंट दिया गया, जिसमें लिवर के ANGPTL3 जीन को टारगेट किया गया। रिजल्ट्स चौंकाने वाले थे एक ही डोज़ के बाद मरीजों के LDL कोलेस्ट्रॉल में लगभग 50 फीसदी की कमी दर्ज की गई। इस उपचार का असर लगभग 60 दिनों तक बना रहा। यानी, रोजाना दवा लेने की बजाय एक बार का डोज़ लंबे समय तक असर दिखा सकता है।
कैसे काम करता है यह जेनेटिक ट्रीटमेंट?
ANGPTL3 जीन शरीर में लिपिड (फैट्स) के स्तर को नियंत्रित करता है। इस जीन को जेनेटिक एडिटिंग तकनीक (Genetic Editing Technique) के ज़रिए टारगेट किया गया, जिससे शरीर में फैट बनाने की प्रक्रिया धीमी हो गई। नतीजा – कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर स्वतः घट गया। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तकनीक में CRISPR जैसी एडवांस्ड बायोटेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है, जो जीन को एडिट करके बीमारी की जड़ पर असर डालती है।
अभी शुरुआती चरण में है रिसर्च
हालांकि विशेषज्ञों ने यह भी माना है कि यह ट्रायल अभी बहुत छोटे स्तर पर किया गया है। इसके लंबे समय तक असर, सुरक्षा और संभावित साइड इफेक्ट्स पर अभी और अध्ययन किए जाने की ज़रूरत है। कुछ मरीजों में हल्के साइड इफेक्ट्स जैसे थकान, हल्का सिरदर्द या इंजेक्शन साइट पर सूजन देखी गई, लेकिन किसी भी गंभीर समस्या की रिपोर्ट नहीं मिली। अगर भविष्य में बड़े स्तर पर यह प्रयोग सफल होता है, तो यह उन मरीजों के लिए राहत की बड़ी खबर हो सकती है जो सालों से कोलेस्ट्रॉल की दवाओं पर निर्भर हैं।
क्यों खतरनाक है बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल?
कोलेस्ट्रॉल हमारे शरीर में एक प्रकार की फैटी सब्सटेंस है जो सेल्स के निर्माण और हार्मोन्स के लिए जरूरी होती है। लेकिन जब LDL (बैड कोलेस्ट्रॉल) का स्तर बढ़ जाता है, तो यह धमनियों की दीवारों में जमा होने लगता है। इससे ब्लड फ्लो रुक जाता है और हार्ट अटैक या ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
डॉक्टर सलाह देते हैं कि कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल में रखने के लिए –
संतुलित आहार लें,
तले-भुने और जंक फूड से बचें,
रोजाना व्यायाम करें,
और समय-समय पर ब्लड लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कराएं।
भविष्य के लिए उम्मीद की किरण
वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर यह ट्रीटमेंट आगे के ट्रायल्स में सफल रहा, तो आने वाले समय में रोज़ाना की दवाओं की जगह एक सिंगल डोज़ ट्रीटमेंट ले सकता है। यह न केवल मरीजों की परेशानी घटाएगा, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की लागत भी कम करेगा। फिलहाल, इस शोध को भविष्य की मेडिकल इनोवेशन का आधार माना जा रहा है – जो हार्ट और कोलेस्ट्रॉल से जुड़ी बीमारियों के इलाज में एक नई दिशा दिखा सकता है।