पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ी राहत की खबर आई है। केंद्र सरकार ने ‘RELIEF’ (Resilience & Logistics Intervention for Export Facilitation) योजना को मंजूरी दे दी है, जिसका उद्देश्य निर्यातकों पर बढ़ते लॉजिस्टिक्स खर्च और जोखिम के बोझ को कम करना है। इस योजना के तहत सरकार कुल ₹497 करोड़ खर्च करेगी, जिससे खासतौर पर खाड़ी और पश्चिम एशिया के देशों में व्यापार करने वाले निर्यातकों को सीधी मदद मिलेगी।
क्यों जरूरी पड़ी यह योजना?
हाल के दिनों में होर्मुज स्ट्रेट और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा चिंताओं के कारण समुद्री व्यापार पर असर पड़ा है। जहाजों को लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है, ट्रांसशिपमेंट हब पर भीड़ बढ़ गई है और युद्ध-जोखिम बीमा (War Risk Premium) भी महंगा हो गया है। इन सभी कारणों से भारतीय निर्यातकों की लागत बढ़ी है और समय पर डिलीवरी में अनिश्चितता आई है। ऐसे में सरकार का यह कदम व्यापार को स्थिर रखने और निर्यातकों का भरोसा बनाए रखने के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
‘RELIEF’ योजना में क्या है खास?
इस योजना को तीन प्रमुख हिस्सों में बांटा गया है, ताकि अलग-अलग परिस्थितियों में निर्यातकों को सही तरीके से सहायता मिल सके। पहला हिस्सा उन निर्यातकों के लिए है, जिन्होंने पहले से ही ECGC (Export Credit Guarantee Corporation) का बीमा कवर लिया हुआ है। ऐसे निर्यातकों को 14 फरवरी से 15 मार्च 2026 के बीच अतिरिक्त 100% जोखिम कवर दिया जाएगा, जिससे उनकी शिपमेंट को और ज्यादा सुरक्षा मिलेगी।
भविष्य की शिपमेंट के लिए भी सुरक्षा
दूसरे हिस्से के तहत, जो निर्यातक आने वाले महीनों में माल भेजने की योजना बना रहे हैं, उन्हें भी सरकार का समर्थन मिलेगा। 16 मार्च से 15 जून 2026 तक की अवधि में निर्यातकों को ECGC के माध्यम से 95% तक जोखिम कवर मिलेगा। इससे न केवल उनका भरोसा बना रहेगा, बल्कि लॉजिस्टिक चुनौतियों के बावजूद निरंतर निर्यात भी सुनिश्चित हो सकेगा।
MSME निर्यातकों को विशेष राहत
तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) निर्यातकों के लिए है। कई छोटे निर्यातक ऐसे हैं, जिन्होंने बीमा कवर नहीं लिया, लेकिन वे बढ़े हुए माल भाड़े और बीमा शुल्क का सामना कर रहे हैं। ऐसे निर्यातकों को सरकार 50% तक की आंशिक प्रतिपूर्ति देगी, जो अधिकतम ₹50 लाख प्रति निर्यातक तक होगी। यह सहायता दस्तावेजी सत्यापन और तय शर्तों के आधार पर दी जाएगी, जिससे छोटे कारोबारियों को बड़ी राहत मिल सकेगी।
किन देशों को मिलेगा फायदा?
यह योजना उन भारतीय निर्यातकों के लिए है जो खाड़ी और पश्चिम एशिया के देशों जैसे यूएई, सऊदी अरब और कतर में सामान भेजते हैं। इसमें दो तरह की शिपमेंट शामिल हैं: पहली, जहां माल सीधे अंतिम देश में पहुंचता है; और दूसरी, जहां माल बीच में किसी अन्य पोर्ट पर बदलकर आगे भेजा जाता है (ट्रांसशिपमेंट)। इससे ज्यादा से ज्यादा निर्यातकों को सुरक्षा और लागत में राहत मिल सकेगी, चाहे उनका माल किसी भी रूट से क्यों न जा रहा हो।
निगरानी और पारदर्शिता पर खास ध्यान
सरकार ने इस योजना की निगरानी के लिए डैशबोर्ड आधारित सिस्टम लागू करने का फैसला किया है। साथ ही, एक इंटर-मंत्रालयी समूह (IMG) का गठन किया गया है, जो समय-समय पर योजना की समीक्षा करेगा और जरूरत पड़ने पर बदलाव की सिफारिश करेगा। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि योजना का लाभ सही समय पर सही लोगों तक पहुंचे।
निर्यात सेक्टर को मिलेगा मजबूती का सहारा
‘RELIEF’ योजना ऐसे समय में लाई गई है जब वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ी हुई है। यह कदम न केवल भारतीय निर्यातकों को तत्काल राहत देगा, बल्कि देश के निर्यात सेक्टर को भी मजबूती प्रदान करेगा। सरकार का यह प्रयास स्पष्ट करता है कि बदलते वैश्विक हालात में व्यापार को सुरक्षित और स्थिर बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है।