भारत के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने देश के उभरते और भविष्य के लिए अहम सेक्टर्स को नई रफ्तार देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। SBI ने ‘CHAKRA’ नाम से एक खास सेंटर ऑफ एक्सीलेंस लॉन्च किया है। इस पहल का मकसद उन सनराइज सेक्टर्स को मजबूत फाइनेंसिंग सपोर्ट देना है, जो आने वाले वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था की दिशा तय करेंगे। SBI का मानना है कि ये सेक्टर्स अगले पांच साल में करीब ₹100 लाख करोड़ रुपये का बड़ा बाजार तैयार कर सकते हैं। अगर इन क्षेत्रों में सही समय पर निवेश और फाइनेंसिंग की सुविधा मिलती है, तो भारत की ग्रोथ को नई ऊंचाई मिल सकती है।
किन सेक्टर्स पर रहेगा CHAKRA का फोकस?
CHAKRA उन इंडस्ट्रीज पर ध्यान देगा जो तेजी से आगे बढ़ रही हैं और जिनका सीधा असर भारत के ग्रीन और टेक्नोलॉजी आधारित भविष्य पर पड़ेगा। इसमें रिन्यूएबल एनर्जी, एडवांस्ड सेल केमिस्ट्री, बैटरी स्टोरेज, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ग्रीन हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर, डीकार्बोनाइजेशन, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सेक्टर्स शामिल हैं। ये सभी क्षेत्र न सिर्फ रोजगार के नए मौके पैदा करेंगे, बल्कि भारत को आत्मनिर्भर और टेक्नोलॉजी के मामले में मजबूत बनाने में भी बड़ी भूमिका निभाएंगे। सरकार की नीतियों और इंडस्ट्री के बढ़ते निवेश को देखते हुए इन सेक्टर्स की ग्रोथ आने वाले समय में तेज रहने की उम्मीद है।
अगले पांच साल में 20–22 लाख करोड़ रुपये के लोन का मौका
SBI के चेयरमैन सी. एस. सेट्टी के मुताबिक, इन उभरते सेक्टर्स में सिर्फ सामान्य बैंक लोन से काम नहीं चलेगा। यहां लंबी अवधि की फंडिंग, नई तरह के फाइनेंस मॉडल और जोखिम को समझने की जरूरत होगी। बैंक ने अनुमान लगाया है कि अगले पांच साल में इन सेक्टर्स में 20 से 22 लाख करोड़ रुपये तक के कर्ज की जरूरत पड़ सकती है। सेट्टी ने बताया कि SBI सिर्फ लोन देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इन सेक्टर्स के लिए फाइनेंसिंग पॉलिसी बनाने में भी सक्रिय भूमिका निभाएगा। उभरती टेक्नोलॉजी, लंबे समय तक चलने वाले प्रोजेक्ट्स और नए तरह के कैपिटल स्ट्रक्चर को ध्यान में रखते हुए बैंक मेजेनाइन फाइनेंसिंग जैसे विकल्पों पर भी काम करेगा।
भारतीय और विदेशी बैंकों के साथ साझेदारी
CHAKRA को मजबूत बनाने के लिए SBI ने 21 फाइनेंशियल संस्थानों के साथ समझौते किए हैं। इन साझेदारियों के तहत अलग-अलग बैंकों और वित्तीय संस्थानों की प्रोजेक्ट फाइनेंस टीमें CHAKRA के साथ मिलकर काम करेंगी। इससे बड़े प्रोजेक्ट्स को फंडिंग देना आसान होगा और जोखिम भी साझा किया जा सकेगा। इस पहल में जापान के बड़े बैंक SMBC और MFG भी शामिल हो चुके हैं। भारत की ओर से PFC, REC और NaBFID जैसे सरकारी वित्तीय संस्थान इस नेटवर्क का हिस्सा बने हैं। SBI यूरोप और अमेरिका के बैंकों से भी बातचीत कर रहा है ताकि अंतरराष्ट्रीय निवेश और विशेषज्ञता को भारत के सनराइज सेक्टर्स से जोड़ा जा सके।
इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग में नई सोच की जरूरत
SBI चेयरमैन के अनुसार, अब तक बैंक डिपॉजिट के जरिए बड़े प्रोजेक्ट्स की फंडिंग करते रहे हैं। लेकिन अब घरेलू बचत का एक हिस्सा म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार और दूसरे निवेश विकल्पों की ओर जा रहा है। ऐसे में इंफ्रास्ट्रक्चर और सनराइज सेक्टर्स में निवेश के लिए नए निवेशकों को आकर्षित करना जरूरी हो गया है। इसके लिए निवेशकों का भरोसा जीतना सबसे अहम है। CHAKRA के जरिए पारदर्शिता, बेहतर जानकारी और मजबूत फाइनेंस मॉडल तैयार किए जाएंगे ताकि निजी और विदेशी निवेशकों को इन सेक्टर्स में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
CHAKRA से क्या होगा सीधा फायदा?
CHAKRA के तहत व्हाइट पेपर, सेक्टर रिपोर्ट, नॉलेज प्रोग्राम, इंडस्ट्री मीटिंग और पॉलिसी डिस्कशन जैसे काम किए जाएंगे। इससे कंपनियों, निवेशकों और नीति निर्माताओं को सही फैसले लेने में मदद मिलेगी। यह सेंटर डेवलपमेंट फाइनेंस संस्थानों, अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों, बैंकों, एनबीएफसी, स्टार्टअप्स, यूनिवर्सिटीज और थिंक टैंक्स के साथ मिलकर काम करेगा। इसका मकसद इनोवेशन को बढ़ावा देना, कैपिटल का बेहतर फ्लो बनाना और भारत के सस्टेनेबल विकास को मजबूती देना है।
SBI का यह कदम दिखाता है कि बैंक सिर्फ आज की जरूरत नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की तैयारी कर रहा है। CHAKRA के जरिए सनराइज सेक्टर्स को जो फाइनेंसिंग सपोर्ट मिलेगा, वह आने वाले सालों में देश की आर्थिक तस्वीर बदलने की क्षमता रखता है।