भारतीय शेयर बाजार में 26 फरवरी को तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। सुबह मजबूत शुरुआत के बाद बाजार ने अचानक दिशा बदल ली और sensex दिन के उच्च स्तर से करीब 500 अंक टूट गया। निफ्टी भी फिसलकर 25,400 के आसपास आ गई। शुरुआती कारोबार में निवेशकों का मूड सकारात्मक दिख रहा था, लेकिन दोपहर तक मुनाफावसूली और वैश्विक संकेतों ने बाजार पर दबाव बना दिया। इससे स्पष्ट संकेत मिला कि ऊंचे स्तरों पर निवेशक सतर्क हो गए हैं और फिलहाल बाजार में तेजी को बनाए रखना आसान नहीं है।
शुरुआती तेजी क्यों टिक नहीं पाई
दिन की शुरुआत में सेंसेक्स 82,579 और निफ्टी 25,572 के आसपास पहुंच गए थे। यह संकेत था कि बाजार में खरीदारी की धार बनी हुई है। लेकिन कुछ ही घंटों में निवेशकों ने ऊंचे स्तरों पर मुनाफा बुक करना शुरू कर दिया। FMCG, मेटल और रियल्टी जैसे सेक्टरों में बिकवाली बढ़ी, जिससे प्रमुख सूचकांक नीचे खिसक गए। दोपहर तक सेंसेक्स गिरकर करीब 82,071 और निफ्टी 25,435 के आसपास कारोबार करता दिखा। बैंकिंग शेयरों में भी दबाव आया और बैंक निफ्टी लगभग 400 अंक टूट गया।
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
बाजार की गिरावट का सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उछाल रहा। तेल सात महीने के उच्च स्तर के आसपास बना हुआ है। अमेरिका-ईरान तनाव और सप्लाई को लेकर अनिश्चितता के कारण ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए महंगा तेल अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाता है। इससे व्यापार घाटा और महंगाई दोनों बढ़ने की आशंका रहती है। निवेशक ऐसे माहौल में जोखिम कम करना पसंद करते हैं, जिसका असर शेयर बाजार पर दिखाई देता है।
मुनाफावसूली का ट्रेंड हावी
विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार लगातार ऊंचे स्तर पर रहने से वैल्यूएशन महंगे हो गए हैं। ऐसे में निवेशक “रैली में बेचो” रणनीति अपनाने लगे हैं। हाल के दिनों में विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी मजबूत रही, लेकिन इसके बावजूद बाजार तेजी कायम नहीं रख पाया। इसका मतलब यह है कि हर उछाल पर बिकवाली आ रही है। यह ट्रेंड आमतौर पर तब दिखता है जब निवेशकों को लगता है कि बाजार फिलहाल अपनी उचित कीमत से ऊपर ट्रेड कर रहा है।
ग्लोबल संकेत भी कमजोर
भारतीय बाजार पर वैश्विक संकेतों का असर भी साफ दिखा। एशियाई बाजारों में कमजोरी रही और प्रमुख सूचकांक लाल निशान में रहे। अमेरिकी बाजार के फ्यूचर्स भी दबाव में दिखाई दिए। वैश्विक निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं, क्योंकि दुनिया भर में आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे माहौल में उभरते बाजारों से निवेश निकलना या धीमा होना सामान्य माना जाता है, जिससे भारतीय बाजार भी प्रभावित हुआ।
एक्सपायरी और तकनीकी दबाव
गुरुवार को डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की मासिक एक्सपायरी भी थी, जिससे बाजार में अस्थिरता बढ़ी। एक्सपायरी के दिन ट्रेडर्स अपनी पोजिशन काटते या आगे बढ़ाते हैं, जिससे अचानक तेज उतार-चढ़ाव आता है। तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार निफ्टी के लिए 25,530 के आसपास अहम सपोर्ट है। यदि यह स्तर टूटता है तो गिरावट तेज हो सकती है। वहीं ऊपर की ओर 25,670 और फिर 25,900 के स्तर पर रेजिस्टेंस दिखाई दे रहा है।
भू-राजनीतिक तनाव ने बढ़ाई सतर्कता
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने भी निवेशकों को सतर्क किया है। परमाणु कार्यक्रम और पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर अनिश्चितता बढ़ने से वैश्विक जोखिम-भावना कमजोर होती है। जब वैश्विक तनाव बढ़ता है तो निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर जाते हैं और इक्विटी बाजार से दूरी बनाते हैं। यही वजह है कि भारतीय बाजार में भी बिकवाली बढ़ी।
आगे बाजार के लिए क्या संकेत
हालिया गिरावट यह दिखाती है कि बाजार फिलहाल संवेदनशील मोड़ पर है। मजबूत घरेलू आर्थिक संकेतों और संस्थागत निवेश के बावजूद ऊंचे वैल्यूएशन और वैश्विक अनिश्चितता तेजी पर ब्रेक लगा रहे हैं। यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रहती हैं और वैश्विक बाजार कमजोर बने रहते हैं, तो निकट अवधि में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। हालांकि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए हर गिरावट अवसर भी बन सकती है, बशर्ते वे मजबूत कंपनियों और सेक्टरों पर ध्यान दें। फरवरी का कारोबारी दिन यह संदेश देता है कि बाजार में तेजी की राह अब सीधी नहीं है। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रणनीति अपनाने और वैश्विक संकेतों पर नजर बनाए रखने की जरूरत है।