भारतीय शेयर बाजार में 18 फरवरी को आईटी सेक्टर ने निवेशकों को चौंका दिया। लगातार दो कारोबारी सत्रों की बढ़त के बाद आईटी कंपनियों के शेयर अचानक फिसल गए और कई दिग्गज कंपनियों में 2–3 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई। सुबह के कारोबार में निफ्टी IT इंडेक्स करीब 2.5 प्रतिशत गिरकर 32,265 के आसपास आ गया। बाजार में यह गिरावट सिर्फ घरेलू कारणों से नहीं, बल्कि वैश्विक टेक सेक्टर में आई कमजोरी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी नई प्रतिस्पर्धा की वजह से आई बताई जा रही है।
किन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट?
आईटी सेक्टर की गिरावट में सबसे ज्यादा दबाव मिड-कैप और लार्ज-कैप कंपनियों में दिखा। Persistent Systems के शेयर 3 प्रतिशत से ज्यादा टूटे और यह दिन के सबसे कमजोर आईटी स्टॉक्स में रहा। सेक्टर के दिग्गज Infosys के शेयर भी लगभग 3 प्रतिशत नीचे दिखे।
इसके अलावा Coforge, Tech Mahindra और LTIMindtree में भी करीब 3 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज हुई। वहीं HCL Technologies, Wipro और Mphasis के शेयर 2 प्रतिशत से ज्यादा टूटे। सेक्टर की सबसे बड़ी कंपनी Tata Consultancy Services (TCS) भी लगभग 2 प्रतिशत नीचे रही। स्पष्ट है कि गिरावट किसी एक कंपनी तक सीमित नहीं थी, बल्कि पूरे आईटी सेक्टर में व्यापक बिकवाली हुई।
ग्लोबल टेक सेलऑफ का असर
विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय आईटी शेयरों में कमजोरी की बड़ी वजह वैश्विक टेक शेयरों में आई गिरावट रही। जब अमेरिका और यूरोप के टेक स्टॉक्स में बिकवाली बढ़ती है, तो उसका सीधा असर भारतीय आईटी कंपनियों पर पड़ता है, क्योंकि इन कंपनियों का बड़ा कारोबार विदेशी बाजारों से आता है।अंतरराष्ट्रीय स्तर पर Cognizant और Accenture जैसे बड़े आईटी सर्विस प्रदाताओं के शेयर भी 2 प्रतिशत के आसपास गिरे। इससे निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ और भारतीय आईटी स्टॉक्स में भी बिकवाली बढ़ गई।
AI प्रतिस्पर्धा ने बढ़ाई चिंता
आईटी सेक्टर की गिरावट का एक बड़ा ट्रिगर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी नई खबरें भी रहीं। AI स्टार्टअप Anthropic ने अपना नया मॉडल Claude Sonnet 4.6 लॉन्च किया, जिसे कंपनी ने अब तक का सबसे सक्षम “सॉनेट” मॉडल बताया है। यह मॉडल कोडिंग, डिजाइन, लॉन्ग-कॉन्टेक्स्ट रीज़निंग और एजेंट-आधारित कार्यों में पहले से अधिक सक्षम बताया जा रहा है। सबसे अहम बात यह है कि इसे फ्री और पेड दोनों तरह के यूजर्स के लिए उपलब्ध कराया गया है।
इससे यह आशंका बढ़ी कि AI टूल्स सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और आईटी सेवाओं के पारंपरिक बिजनेस मॉडल को बाधित कर सकते हैं। बाजार में यह धारणा तेजी से मजबूत हुई कि AI के कारण आईटी कंपनियों के पारंपरिक प्रोजेक्ट्स और आउटसोर्सिंग डिमांड प्रभावित हो सकती है। यही डर निवेशकों की बिकवाली में बदल गया।
रुपये की कमजोरी और FPI बिकवाली
विश्लेषकों के मुताबिक सेक्टर पर दबाव की एक और वजह रुपये की कमजोरी और विदेशी निवेशकों (FPI) की बिकवाली रही। जब विदेशी निवेशक जोखिम से बचने की रणनीति अपनाते हैं, तो वे सबसे पहले टेक और आईटी जैसे वैल्यूएशन-संवेदनशील सेक्टरों से पैसा निकालते हैं। ब्रोकरेज और विश्लेषकों का कहना है कि हालिया गिरावट ने निवेशकों की धारणा को और कमजोर किया और आईटी स्टॉक्स में अल्पकालिक दबाव बढ़ा दिया।
क्या AI से आईटी कंपनियों को नुकसान होगा?
हालांकि सभी विशेषज्ञ इस गिरावट को स्थायी ट्रेंड नहीं मानते। कई वैश्विक ब्रोकरेज का मानना है कि AI को लेकर डर कुछ हद तक बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। उनका तर्क है कि AI आईटी कंपनियों के लिए खतरा नहीं, बल्कि नया अवसर बन सकता है। AI-आधारित ऑटोमेशन, क्लाउड, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन सेवाओं की मांग बढ़ने से आईटी कंपनियों को नए प्रोजेक्ट मिल सकते हैं। पहले भी तकनीकी बदलावों के दौरान आईटी कंपनियों ने अपने बिजनेस मॉडल को सफलतापूर्वक बदला है।
वैल्यूएशन अब आकर्षक?
कुछ ब्रोकरेज हाउस का मानना है कि पिछले कुछ महीनों की गिरावट के बाद आईटी स्टॉक्स का वैल्यूएशन अब आकर्षक स्तर पर आ गया है। बड़े करेक्शन के बाद कई शेयर “वैल्यू ज़ोन” में माने जा रहे हैं। उनका मानना है कि AI से जुड़ी आशंकाओं के कारण निवेशकों ने जरूरत से ज्यादा डर दिखाया है, जबकि लंबी अवधि में यही तकनीक आईटी सर्विस कंपनियों के लिए नई मांग पैदा कर सकती है।
आगे क्या देखें निवेशक?
विशेषज्ञों के अनुसार निकट अवधि में आईटी सेक्टर में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, क्योंकि वैश्विक टेक सेक्टर की चाल, AI डेवलपमेंट और विदेशी निवेशकों की गतिविधि इस सेक्टर को प्रभावित करती रहेगी। हालांकि लंबी अवधि के नजरिए से देखें तो डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, क्लाउड, साइबर सुरक्षा और AI-इंटीग्रेशन सेवाओं की बढ़ती मांग भारतीय आईटी कंपनियों के लिए सकारात्मक बनी हुई है। यानी फिलहाल गिरावट ने निवेशकों की चिंता जरूर बढ़ाई है, लेकिन सेक्टर की बुनियादी कहानी अभी भी मजबूत मानी जा रही है।