अमेरिका के राष्ट्रपति donald trump ने रेयर अर्थ, लिथियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों पर आयात शुल्क लगाने के फैसले को फिलहाल रोक दिया है। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है, जब अमेरिका अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा, औद्योगिक जरूरतों और वैश्विक सप्लाई चेन को लेकर गंभीर चिंताओं से जूझ रहा है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि सीधे टैरिफ लगाने से पहले इन खनिजों की आपूर्ति को सुरक्षित और स्थिर बनाना ज्यादा जरूरी है।
टैरिफ से पहले बातचीत पर जोर
ट्रंप ने अपनी सरकार को निर्देश दिया है कि वह अमेरिका के प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों के साथ बातचीत शुरू करे, ताकि रेयर अर्थ और अन्य अहम खनिजों की सप्लाई बिना किसी रुकावट के सुनिश्चित की जा सके। इसके लिए अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर और वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक को जिम्मेदारी सौंपी गई है। सरकार चाहती है कि आयात इस तरह हो, जिससे अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा पर कोई खतरा न आए।
सुप्रीम कोर्ट और घरेलू दबाव भी वजह
यह फैसला ऐसे वक्त पर लिया गया है, जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ट्रंप द्वारा पहले लगाए गए कुछ टैरिफ की कानूनी वैधता पर विचार कर रहा है। साथ ही यह भी साफ है कि अमेरिका अभी अपनी जरूरत के महत्वपूर्ण खनिजों के मामले में आत्मनिर्भर नहीं हो पाया है। ऐसे में टैरिफ टालने के फैसले से घरेलू खनन उद्योग में नाराजगी देखने को मिल सकती है, क्योंकि स्थानीय कंपनियां लंबे समय से संरक्षण की मांग कर रही हैं।
न्यूनतम कीमत तय करने का प्रस्ताव
ट्रंप ने संकेत दिया है कि व्यापारिक साझेदारों के साथ बातचीत में अहम खनिजों के लिए न्यूनतम कीमत यानी “प्राइस फ्लोर” तय करने पर भी जोर दिया जाएगा। पश्चिमी देशों के खनन उद्योग और नीति-निर्माता लंबे समय से इस मांग को उठाते रहे हैं। हाल ही में वॉशिंगटन में हुई जी-7 देशों के वित्त मंत्रियों और ऑस्ट्रेलिया जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी। राष्ट्रपति ने यह भी साफ किया है कि अगर बातचीत सफल नहीं होती, तो अमेरिका न्यूनतम आयात मूल्य तय करने या अन्य सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा, हालांकि इन उपायों का विस्तृत खाका अभी सामने नहीं आया है।
विदेशी निर्भरता से बढ़ती सुरक्षा चिंता
वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक ने पिछले साल जारी एक रिपोर्ट में चेतावनी दी थी कि अमेरिका महत्वपूर्ण खनिजों के लिए जरूरत से ज्यादा विदेशी स्रोतों पर निर्भर है। रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षित सप्लाई चेन की कमी और कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। यही वजह है कि ट्रंप प्रशासन इस पूरे मसले को केवल व्यापार नहीं, बल्कि रणनीतिक सुरक्षा के नजरिये से देख रहा है।
चीन सबसे बड़ी चुनौती
इस पूरे मुद्दे में चीन अमेरिका की सबसे बड़ी चिंता बना हुआ है। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार, जिन 54 खनिजों को अमेरिका ने महत्वपूर्ण की श्रेणी में रखा है, उनमें से आधे से अधिक का चीन प्रमुख उत्पादक है। इतना ही नहीं, इन खनिजों की रिफाइनिंग और प्रोसेसिंग में भी चीन की मजबूत पकड़ है। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर खनन अमेरिका के भीतर भी हो, लेकिन प्रोसेसिंग के लिए विदेशी देशों पर निर्भरता बनी रहे, तो राष्ट्रीय सुरक्षा पूरी तरह सुरक्षित नहीं मानी जा सकती।
रेयर अर्थ पर ट्रंप नरम
विशेषज्ञों के मुताबिक, ट्रंप का यह फैसला संकेत देता है कि अमेरिका जल्दबाजी में टैरिफ लगाकर व्यापार युद्ध को और गहरा नहीं करना चाहता। इसके बजाय वह कूटनीति, न्यूनतम कीमत और सप्लाई चेन सुधार जैसे विकल्पों पर काम करना चाहता है। आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि अमेरिका बातचीत के जरिए अपने लक्ष्य हासिल कर पाता है या फिर उसे सख्त आर्थिक कदम उठाने पड़ते हैं। फिलहाल इतना तय है कि रेयर अर्थ और महत्वपूर्ण खनिज आने वाले समय में वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के सबसे अहम मुद्दों में बने रहेंगे, जहां अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा और भी तेज हो सकती है।