अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald trump ने ईरान को साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर उसने अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत का रास्ता नहीं चुना, तो उसे सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार रहना होगा। ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान की ओर युद्धपोतों का एक बड़ा बेड़ा भेज रहा है। उनके मुताबिक, समझौता हुआ तो बेहतर होगा, लेकिन अगर ईरान नहीं माना तो आगे क्या होगा, यह सभी देखेंगे। इस बयान के बाद पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है और दुनिया की नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या यह टकराव बातचीत तक सीमित रहेगा या हालात किसी बड़े संघर्ष की ओर बढ़ेंगे।
खाड़ी में अमेरिकी ‘आर्माडा’, बढ़ी सैन्य हलचल
ट्रंप प्रशासन ने विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन के नेतृत्व में युद्धपोतों के एक बड़े बेड़े को एशिया-प्रशांत क्षेत्र से ईरान की ओर रवाना किया है। इस कदम को अमेरिका की ओर से ताकत दिखाने की कोशिश माना जा रहा है। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि अगर ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को दोबारा तेज किया या देश में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा जारी रखी, तो अमेरिका पहले से कहीं ज्यादा सख्त कदम उठा सकता है। यह बयान सीधे तौर पर ईरान पर दबाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
नए समझौते में क्या चाहता है अमेरिका?
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, अगर कोई नया परमाणु समझौता होता है तो उसमें ईरान की लंबी दूरी की मिसाइलों पर रोक, संवर्धित यूरेनियम को हटाना और स्वतंत्र संवर्धन पर प्रतिबंध जैसे प्रावधान अनिवार्य होंगे। अमेरिका का मानना है कि सिर्फ परमाणु कार्यक्रम तक सीमित समझौता अब पर्याप्त नहीं है, बल्कि ईरान की सैन्य क्षमताओं पर भी नियंत्रण जरूरी है। वॉशिंगटन का दावा है कि इन शर्तों के बिना किसी भी समझौते से क्षेत्र में स्थायी शांति नहीं आ सकती।
‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ की याद दिलाकर दबाव
पिछले साल जून में अमेरिका ने ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ के तहत ईरान के परमाणु ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए थे। इन हमलों के बाद से दोनों देशों के रिश्ते और ज्यादा बिगड़ गए थे और युद्ध जैसी स्थिति बन गई थी।
अब ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अगर ईरान नहीं माना, तो अमेरिका पहले से भी ज्यादा कठोर कार्रवाई कर सकता है। यह बयान बताता है कि अमेरिका सैन्य विकल्प को खुले तौर पर टेबल पर रखे हुए है।
फांसी की सजा पर ट्रंप का दावा
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि उनकी सख्त चेतावनी के बाद ईरान ने बड़ी संख्या में लोगों को दी जाने वाली फांसी की सजा पर रोक लगाई है। उनके मुताबिक, ईरान 800 से ज्यादा लोगों को फांसी देने वाला था, लेकिन अमेरिकी चेतावनी के बाद उसने कदम पीछे खींच लिए। हालांकि ट्रंप ने यह भी स्वीकार किया कि ईरान में अब भी मानवाधिकारों की स्थिति गंभीर बनी हुई है और वहां हिंसा की घटनाएं जारी हैं। इस मुद्दे पर अमेरिका लगातार दबाव बनाए रखने की बात कर रहा है।
ईरान का पलटवार: दबाव में नहीं झुकेंगे
अमेरिका की धमकियों पर ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाया है। तुर्की दौरे पर गए ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने साफ कहा कि ईरान की रक्षा और मिसाइल क्षमताएं किसी भी कीमत पर बातचीत का हिस्सा नहीं होंगी। उनका कहना है कि ईरान केवल बराबरी, सम्मान और पारस्परिक हितों के आधार पर ही बातचीत करेगा। उन्होंने अमेरिकी अधिकारियों से मिलने की किसी भी योजना को खारिज करते हुए कहा कि तेहरान दबाव में आकर कोई समझौता नहीं करेगा।
क्या बातचीत से निकलेगा रास्ता या बढ़ेगा टकराव?
अमेरिका की सख्त चेतावनियों और ईरान के कड़े जवाब के बाद हालात बेहद संवेदनशील हो गए हैं। एक तरफ वॉशिंगटन सैन्य ताकत दिखाकर दबाव बनाना चाहता है, तो दूसरी ओर तेहरान अपनी संप्रभुता और सुरक्षा क्षमताओं से समझौता करने को तैयार नहीं है। अब बड़ा सवाल यही है कि क्या दोनों देश बातचीत के जरिए समाधान निकाल पाएंगे या यह तनाव किसी नए और बड़े टकराव की ओर बढ़ेगा। दुनिया भर की नजरें इस टकराव पर टिकी हुई हैं।