अमेरिका में donald trump की सत्ता में वापसी के बाद इमिग्रेशन पॉलिसी एक बार फिर सख्त होती नजर आ रही है। नए फैसलों ने लाखों प्रवासियों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन की नई नीतियों के चलते 15 लाख से ज्यादा प्रवासियों का अस्थायी कानूनी दर्जा (Legal Status) या तो पहले ही खत्म हो चुका है या आने वाले महीनों में समाप्त होने वाला है। इसका असर सिर्फ प्रवासियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था, रोजगार बाजार और कई अहम सेक्टर्स पर भी दिख सकता है।
इतिहास में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में लीगल स्टेटस खत्म
इमिग्रेशन नीति पर नजर रखने वाले जानकारों का कहना है कि अमेरिका के हालिया इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है, जब इतनी कम अवधि में इतने बड़े पैमाने पर कानूनी सुरक्षा छीनी जा रही है। ट्रंप प्रशासन ने अब तक 10 लाख से ज्यादा लोगों का टेम्पररी प्रोटेक्टेड स्टेटस (TPS) खत्म कर दिया है और करीब 5 लाख प्रवासियों से मानवीय पैरोल (Humanitarian Parole) की सुरक्षा वापस ली जा चुकी है। इन फैसलों से लाखों लोग अचानक कानूनी अनिश्चितता में फंस गए हैं।
रोजगार पर सीधा असर, इकॉनमी पर भी पड़ेगा बोझ
कानूनी दर्जा खत्म होने का सबसे बड़ा झटका वर्क परमिट पर पड़ा है। बड़ी संख्या में प्रवासी अब अमेरिका में कानूनी रूप से काम नहीं कर पाएंगे। इमिग्रेशन विशेषज्ञ जूलिया गेलाट के मुताबिक, “एक ही साल में 10 लाख से ज्यादा लोगों के काम करने के अधिकार खत्म होना न सिर्फ प्रवासियों, बल्कि नियोक्ताओं, परिवारों और पूरी अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका है।” कंस्ट्रक्शन, हेल्थकेयर, सर्विस सेक्टर और एग्रीकल्चर जैसे क्षेत्रों में पहले ही वर्कफोर्स की कमी है। ऐसे में यह फैसला इन सेक्टर्स की रफ्तार को और धीमा कर सकता है।
TPS क्या है और क्यों है इतना अहम?
टेम्पररी प्रोटेक्टेड स्टेटस (TPS) उन देशों के नागरिकों को दिया जाता है, जहां युद्ध, हिंसा, प्राकृतिक आपदाएं और राजनीतिक अस्थिरता जैसे हालात हों। यह प्रोग्राम 1990 में कांग्रेस द्वारा शुरू किया गया था। TPS आमतौर पर 6 से 18 महीने के लिए दिया जाता है और समय-समय पर रिन्यू किया जाता है। हालांकि यह नागरिकता का रास्ता नहीं देता, लेकिन इसके तहत व्यक्ति अमेरिका में रह सकता है और काम कर सकता है।
बाइडन दौर में विस्तार, ट्रंप दौर में तेज कटौती
राष्ट्रपति जो बाइडन के कार्यकाल में TPS और मानवीय पैरोल का दायरा तेजी से बढ़ा था। जनवरी 2026 से पहले 17 देशों के करीब 13 लाख प्रवासी TPS के तहत कवर थे। इसके उलट, ट्रंप के पहले कार्यकाल में यह संख्या लगभग 4 लाख थी। अब ट्रंप प्रशासन का कहना है कि TPS का “दुरुपयोग” हुआ है। गृह सुरक्षा मंत्री क्रिस्टी नोएम ने साफ कहा कि इस प्रोग्राम की समीक्षा होगी और जरूरत पड़ने पर इसे खत्म किया जाएगा।
इन देशों के प्रवासी सबसे ज्यादा प्रभावित
नई नीतियों के तहत 11 देशों के नागरिकों के लिए TPS खत्म किया जा रहा है। इनमें शामिल हैं –
– अफगानिस्तान
– म्यांमार
– कैमरून
– हैती
– होंडुरास
– नेपाल
– निकारागुआ
– सीरिया
– वेनेजुएला
– इथियोपिया
– दक्षिण सूडान
कैटो इंस्टीट्यूट के इमिग्रेशन विशेषज्ञ डेविड बीयर ने इसे “अमेरिकी इतिहास में अभूतपूर्व स्थिति” बताया है।
हैती और वेनेजुएला के प्रवासियों पर सबसे बड़ा संकट
TPS खत्म होने से सबसे ज्यादा असर हैती और वेनेजुएला के लोगों पर पड़ेगा। आंकड़ों के मुताबिक करीब 9.35 लाख लोग सीधे प्रभावित होंगे। इनमें से 6.05 लाख वेनेजुएलावासी हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर इन लोगों को हटाया गया, तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था को 14 अरब डॉलर से ज्यादा का नुकसान हो सकता है।
मानवीय पैरोल भी सिमटा, निर्वासन का खतरा बढ़ा
TPS के साथ-साथ मानवीय पैरोल (Humanitarian Parole) को भी सीमित कर दिया गया है। बाइडन प्रशासन के दौरान करीब 7.5 लाख लोगों को पैरोल दी गई थी। अब DHS ने क्यूबा, हैती, निकारागुआ और वेनेजुएला के 5.32 लाख लोगों के लिए पैरोल खत्म करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इससे इन प्रवासियों पर निर्वासन (Deportation) का खतरा मंडरा रहा है।
अदालतें बन सकती हैं आखिरी उम्मीद
ट्रंप के पहले कार्यकाल में भी TPS खत्म करने की कोशिश हुई थी, लेकिन अदालतों ने कई मामलों में रोक लगा दी थी। इस बार स्थिति ज्यादा जटिल है। कुछ मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन को TPS खत्म करने की अनुमति दी है, जबकि निचली अदालतें इसे रोकने की बात कह रही हैं। इमिग्रेशन वकीलों का कहना है कि इस बार कार्रवाई की रफ्तार और सख्ती दोनों पहले से ज्यादा हैं।
प्रवासियों के लिए सबसे कठिन दौर
ट्रंप की नई इमिग्रेशन नीतियां अमेरिका में लाखों प्रवासियों के लिए अब तक की सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आई हैं। जहां एक ओर प्रशासन इसे सख्ती और नियंत्रण का कदम बता रहा है, वहीं दूसरी ओर विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि इसका असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था, श्रम बाजार और मानवीय मूल्यों पर लंबे समय तक दिखाई देगा। आने वाले महीनों में अदालतों के फैसले और राजनीतिक दबाव तय करेंगे कि इन 15 लाख लोगों का भविष्य किस दिशा में जाएगा।