UP Development: उत्तर प्रदेश में विकास का नया मॉडल तैयार हो रहा है। राजधानी लखनऊ के आसपास के छह जिलों को मिलाकर एक “उत्तर प्रदेश स्टेट कैपिटल रीजन (UPSCR)” बनाया जा रहा है, जो प्रदेश की विकास यात्रा का बड़ा कदम माना जा रहा है। यह रीजन करीब 26 हजार वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैलेगा और इसमें लखनऊ, सीतापुर, उन्नाव, हरदोई, बाराबंकी और रायबरेली शामिल होंगे। इसका मकसद राजधानी के विकास को आस-पास के जिलों तक फैलाना, रोजगार के अवसर बढ़ाना और ग्रामीण इलाकों तक शहरी सुविधाएं पहुंचाना है।
UPSCR बनेगा विकास और निवेश का केंद्र
शुक्रवार को एलडीए कार्यालय में यूपीएससीआर की सर्वे रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें अधिकारियों के साथ जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे। इस रिपोर्ट के मुताबिक, यूपीएससीआर का मुख्य लक्ष्य संतुलित क्षेत्रीय विकास सुनिश्चित करना है। लखनऊ इस समय प्रदेश का सबसे विकसित जिला है, जहां रोज़ाना हजारों लोग नौकरी, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आते हैं। नए प्लान के तहत अब लखनऊ के साथ-साथ इसके पड़ोसी जिलों को भी समानांतर रूप से विकसित किया जाएगा, ताकि लोगों को अपने ही इलाके में बेहतर जीवन और रोज़गार के अवसर मिल सकें।
सेंट्रल म्यूजियम और टूरिज़्म हब की योजना
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए यूपीएससीआर में एक “सेंट्रल म्यूजियम” बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। इसमें प्रदेश के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों के एआई विजुअल्स प्रदर्शित किए जाएंगे, ताकि पर्यटक उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक झलक को एक ही जगह देख सकें। इसके साथ ही हरदोई-सीतापुर राष्ट्रीय राजमार्ग को एक इंडस्ट्रियल हब के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां कृषि आधारित और लघु उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा।
एक साल में बनेगा रीजनल प्लान, पांच साल में धरातल पर दिखेगा असर
एलडीए के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि यूपीएससीआर के लिए जीआईएस आधारित रीजनल महायोजना तैयार करने का काम दो कंपनियों – एई कॉम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और एजीस इंडिया कंसल्टिंग इंजीनियर्स को सौंपा गया है। इन कंपनियों को एक साल में मास्टर प्लान तैयार करना होगा। इसके बाद अगले पांच सालों में इन योजनाओं के अनुरूप डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) बनाई जाएगी और वास्तविक विकास कार्य शुरू किए जाएंगे।
शहरीकरण के नए अवसर: सांसद प्रतिनिधि का सुझाव
प्रस्तुति के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के प्रतिनिधि दिवाकर त्रिपाठी ने कहा कि जैसे लखनऊ ने तेज़ी से शहरीकरण के जरिए विकास किया, वैसे ही बाराबंकी और उन्नाव के लिए भी विस्तृत शहरीकरण योजना बननी चाहिए। उन्होंने कहा कि इन जिलों में पेयजल, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सुविधाओं का मूल्यांकन कर योजनाएं तैयार की जानी चाहिए। साथ ही, अयोध्या में आने वाले 16 करोड़ पर्यटकों को लखनऊ और अन्य जिलों से जोड़ने की रणनीति भी तैयार की जानी चाहिए। उन्होंने सीतापुर और हरदोई रोड पर कृषि आधारित उद्योगों के हब विकसित करने का सुझाव भी दिया, जिससे किसानों को सीधा आर्थिक लाभ मिल सके।
हाई-स्पीड कनेक्टिविटी से घटेगा पलायन
एलडीए अधिकारियों के अनुसार, यूपीएससीआर के तहत सभी छह जिलों के बीच हाई-स्पीड रेल और रोड कनेक्टिविटी विकसित की जाएगी। इससे यात्रा समय घटेगा, व्यापारिक गतिविधियां तेज़ होंगी और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। बेहतर कनेक्टिविटी से लोगों को बड़े शहरों की ओर पलायन करने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि अब उन्हें अपने ही जिले में बेहतर रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी।
प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल
यूपीएससीआर केवल एक क्षेत्रीय विकास योजना नहीं है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश की आर्थिक रीढ़ को मजबूत करने का प्रयास है। जब लखनऊ जैसे विकसित शहरों का असर पड़ोसी जिलों तक फैलेगा, तो पूरे रीजन में निवेश और उद्योग बढ़ेंगे। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन होगा, बल्कि प्रदेश की आर्थिक ग्रोथ में भी बड़ा इजाफा देखने को मिलेगा।
यूपी को मिलेगी नई दिशा
उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम प्रदेश के विकास मॉडल को नई दिशा देने वाला है। यूपीएससीआर (UPSCR) की परिकल्पना लखनऊ को एक “विकास एंकर” बनाकर पूरे क्षेत्र को आगे बढ़ाने की है। अगर यह योजना तय समय में पूरी हो गई, तो आने वाले वर्षों में लखनऊ रीजन देश के सबसे उन्नत मेट्रो हब्स में से एक बन जाएगा, जहां विकास, रोजगार और जीवन-स्तर, सभी एक साथ आगे बढ़ेंगे।