भारत में वजन घटाने और मधुमेह के इलाज से जुड़ी दवाओं के बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। मशहूर दवा Semaglutide का पेटेंट खत्म होते ही कई कंपनियों ने इसके सस्ते जेनेरिक वर्जन लॉन्च कर दिए हैं। इसके साथ ही मरीजों के लिए यह दवा अब 70% से 90% तक सस्ती हो गई है, जो पहले काफी महंगी मानी जाती थी।
90% तक सस्ती हुई दवाएं, मरीजों को बड़ी राहत
अब तक वजन घटाने के लिए इस्तेमाल होने वाली Wegovy और मधुमेह के लिए Ozempic जैसी दवाएं काफी महंगी थीं। इनकी कीमत हर महीने 8,000 से 16,000 रुपये तक पहुंच जाती थी, जिससे आम मरीजों के लिए इन्हें खरीदना आसान नहीं था। लेकिन अब कई भारतीय कंपनियों ने इसके जेनेरिक वर्जन बाजार में उतार दिए हैं। कुछ दवाएं 1,300 रुपये से लेकर 4,000 रुपये तक में उपलब्ध हैं। यानी पहले की तुलना में मरीजों को भारी राहत मिलने वाली है।
15 कंपनियां बाजार में, बढ़ी प्रतिस्पर्धा
सेमाग्लूटाइड का पेटेंट खत्म होते ही करीब 15 दवा कंपनियों ने इसके जेनेरिक वर्जन लॉन्च कर दिए हैं। इसमें Glenmark Pharmaceuticals और Alkem Laboratories जैसी कंपनियां सबसे आगे हैं। ग्लेनमार्क ने अपनी दवा करीब 1,300 रुपये में लॉन्च की है, जबकि अल्केम की कीमत करीब 1,800 रुपये रखी गई है। इसके अलावा Sun Pharma, Zydus Lifesciences और Torrent Pharmaceuticals जैसी कंपनियों ने भी अपने-अपने प्रोडक्ट बाजार में उतारे हैं।
कैसे काम करती है यह दवा?
सेमाग्लूटाइड एक खास तरह की दवा है, जो GLP-1 receptor agonist श्रेणी में आती है। यह दवा शरीर में भूख को कम करती है और पेट भरा होने का एहसास कराती है, जिससे वजन घटाने में मदद मिलती है। साथ ही यह ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में भी असरदार है, इसलिए टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों के लिए यह काफी उपयोगी मानी जाती है। यह दवा आमतौर पर हफ्ते में एक बार इंजेक्शन के रूप में ली जाती है।
अलग-अलग फॉर्म में उपलब्ध दवाएं
अब बाजार में ये दवाएं सिर्फ इंजेक्शन तक सीमित नहीं हैं। कंपनियां इन्हें अलग-अलग रूपों में लॉन्च कर रही हैं, जैसे –
– री-यूजेबल इंजेक्शन पेन
– डोज बेस्ड शीशियां
– टैबलेट फॉर्म
इससे मरीजों को अपनी सुविधा के अनुसार विकल्प चुनने का मौका मिल रहा है।
किस कंपनी की कीमत कितनी?
विभिन्न कंपनियों ने अपनी-अपनी कीमतें तय की हैं। उदाहरण के लिए—
– सन फार्मा की दवा 3,600 से 8,000 रुपये प्रति माह
– जायडस की औसत कीमत करीब 2,200 रुपये
– टॉरेंट फार्मा की टैबलेट करीब 3,999 रुपये
– कुछ कंपनियों के इंजेक्शन पेन 4,200 रुपये तक उपलब्ध
इन कीमतों को देखते हुए साफ है कि अब यह दवा पहले से कहीं ज्यादा सुलभ हो गई है।
बाजार में बढ़ेगा ग्रोथ और विकल्प
भारत का जीएलपी-1 आधारित दवा बाजार करीब 1,446 करोड़ रुपये का है और अब इसमें तेजी से विस्तार होने की उम्मीद है। जैसे-जैसे और कंपनियां अपने जेनेरिक वर्जन लॉन्च करेंगी, प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और कीमतें और कम हो सकती हैं।
क्या रखें ध्यान?
हालांकि दवाओं की कीमतें कम हुई हैं, लेकिन बिना डॉक्टर की सलाह के इनका इस्तेमाल करना सही नहीं है। हर मरीज की स्थिति अलग होती है, इसलिए सही डोज और दवा का चयन विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए।
Semaglutide के जेनेरिक वर्जन आने से भारत में वजन घटाने और मधुमेह के इलाज का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। पहले यह दवा बेहद महंगी होने के कारण केवल सीमित लोगों तक ही पहुंच पाती थी, लेकिन अब कीमतों में भारी गिरावट के चलते आम मरीज भी इसका लाभ उठा सकेंगे। इससे इलाज ज्यादा सुलभ और किफायती बनेगा। साथ ही दवा कंपनियों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा भविष्य में कीमतों को और कम कर सकती है, जिससे हेल्थकेयर सेक्टर में बड़ा सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।