अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बुधवार को भारी गिरावट दर्ज की गई। अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की मजबूत जीत के बाद ईरान के साथ जारी युद्ध जल्द खत्म होने की उम्मीद बढ़ी है। इससे निवेशकों को पश्चिम एशिया से तेल की सप्लाई सामान्य होने का भरोसा मिला है। ब्रेंट क्रूड वायदा करीब 10 प्रतिशत गिरकर 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे पहुंच गया। कारोबार के दौरान इसकी कीमत 93.22 डॉलर प्रति बैरल तक फिसल गई, जो करीब दो महीने का निचला स्तर है। वहीं, अमेरिकी कच्चा तेल वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) भी 90 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया।
अमेरिकी चुनाव से बदला बाजार का रुख
अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के दौरान महंगाई और ईरान के साथ जारी संघर्ष बड़े मुद्दे रहे। लंबे समय से चल रहे युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी थी। चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की मजबूती के बाद निवेशकों को उम्मीद है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर युद्ध समाप्त करने का राजनीतिक दबाव बढ़ सकता है।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी रिपब्लिकन पार्टी की हार के लिए विदेश में जारी संघर्ष को जिम्मेदार बताया। वहीं, सीनेट में डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर ने युद्ध समाप्त करने की दिशा में कदम उठाने की बात कही है। इन घटनाक्रमों से बाजार में तनाव कम होने की उम्मीद मजबूत हुई है।
होर्मुज स्ट्रेट से बढ़ सकती है तेल सप्लाई
कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव की एक बड़ी वजह होर्मुज स्ट्रेट से तेल की आवाजाही सामान्य होने की संभावना है। यह समुद्री मार्ग दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ईरान युद्ध के दौरान यहां से तेल की आवाजाही प्रभावित हुई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होने पर इस रास्ते से तेल की सप्लाई बढ़ सकती है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में उपलब्धता सुधरेगी और कीमतों पर दबाव बनेगा।
अतिरिक्त सप्लाई ने बढ़ाई गिरावट
वैश्विक बाजार में तेल की उपलब्धता बढ़ने के संकेत भी मिल रहे हैं। जेपी मॉर्गन चेज की रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर में वैश्विक तेल बाजार में मांग के मुकाबले प्रतिदिन करीब 14 लाख बैरल अतिरिक्त तेल उपलब्ध था। सऊदी अरामको ने भी मौजूदा तिमाही में उत्पादन अधिकतम स्तर तक ले जाने की तैयारी की है। कंपनी के सीईओ अमीन नासिर के अनुसार, उत्पादन बढ़ाने से बाजार की मांग पूरी करने में मदद मिलेगी। संयुक्त अरब अमीरात भी होर्मुज स्ट्रेट के बाहर से तेल निर्यात बढ़ाने के लिए नई पाइपलाइन की संभावनाएं तलाश रहा है।
पेट्रोल-डीजल पर तुरंत राहत की उम्मीद कम
कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम तुरंत कम होना तय नहीं है। ईंधन की खुदरा कीमतों पर कच्चे तेल के अलावा रुपये की विनिमय दर, रिफाइनिंग लागत, टैक्स और तेल कंपनियों की नीतियों का भी असर पड़ता है। इसके अलावा वैश्विक ईंधन बाजार में सप्लाई से जुड़ी चुनौतियां अभी बनी हुई हैं। अमेरिका में डीजल का भंडार भी घटकर 10 करोड़ बैरल से नीचे पहुंच गया है।
आगे किस दिशा में जाएंगे तेल के दाम?
आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों की दिशा अमेरिका-ईरान संबंधों, पश्चिम एशिया में युद्ध की स्थिति और वैश्विक सप्लाई पर निर्भर करेगी। यदि दोनों देशों के बीच तनाव कम होता है और होर्मुज स्ट्रेट से तेल की आवाजाही सामान्य रहती है, तो कीमतों में और नरमी आ सकती है। हालांकि, किसी भी नए भू-राजनीतिक तनाव से बाजार में दोबारा तेजी और अस्थिरता देखने को मिल सकती है।