भारतीय रेल में यात्रियों की सुविधा और गुणवत्ता सुधार के लाख दावों के बावजूद, ट्रेनों में मिलने वाले खाने की गुणवत्ता पर सवाल लगातार उठते रहे हैं। अब यह विवाद रेलवे की सबसे प्रीमियम ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस (Vande Bharat Express) तक पहुंच गया है। दक्षिण रेलवे ने यात्रियों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए एक बड़ी कार्रवाई की है एक साथ छह वंदे भारत एक्सप्रेस की पेंट्री का ठेका टर्मिनेट कर दिया गया है।
यात्रियों की शिकायतों ने बढ़ाई रेलवे की चिंता
सूत्रों के मुताबिक, दक्षिण भारत में चल रही छह वंदे भारत ट्रेनों में यात्रियों की ओर से लगातार खराब भोजन और सेवा की शिकायतें मिल रही थीं। कई जनप्रतिनिधियों ने भी इस मामले को उठाया, जिसके बाद दक्षिण रेलवे ने जांच शुरू की। जांच में पाया गया कि यात्रियों को परोसा जा रहा खाना न केवल निम्न गुणवत्ता का था, बल्कि स्वच्छता के मानकों पर भी खरा नहीं उतर रहा था। इसके बाद रेलवे ने ठेका रद्द करने का निर्णय लिया।
दिल्ली की कंपनी पर गिरी गाज
इन ट्रेनों की पेंट्री का संचालन दिल्ली की कंपनी वृंदावन फूड्स प्रोडक्ट्स (Brandavan Food Products) कर रही थी। यह कंपनी दरअसल M/s R.K Associates and Hoteliers Pvt. Ltd. की सिस्टर कंसर्न बताई जा रही है, जो रेलवे के कई अन्य प्रोजेक्ट्स से भी जुड़ी रही है। दक्षिण रेलवे ने यात्रियों की शिकायतों को ध्यान में रखते हुए कंपनी का ठेका कुछ महीने पहले ही समाप्त करने का निर्णय लिया, हालांकि इस पर तुरंत अमल नहीं हो सका क्योंकि मामला अदालत तक पहुंच गया।
कोर्ट ने दी रेलवे को हरी झंडी
वृंदावन फूड्स ने रेलवे के फैसले को चुनौती देते हुए मद्रास हाई कोर्ट का रुख किया। कोर्ट ने पहले रेलवे के फैसले पर अस्थायी रोक (स्टे) लगा दी थी, लेकिन बाद में जांच रिपोर्ट और तर्कों को देखने के बाद पाया कि रेलवे ने संगत आधार पर कार्रवाई की है। 8 अक्टूबर को कोर्ट ने रेलवे के पक्ष में फैसला सुनाया और ठेका रद्द करने की अनुमति दे दी। इसके बाद दक्षिण रेलवे ने तत्काल प्रभाव से कंपनी के सभी ठेके समाप्त कर दिए।
किसको मिली जिम्मेदारी?
कोर्ट के फैसले के बाद दक्षिण रेलवे ने इन ट्रेनों की पेंट्री सेवा की जिम्मेदारी तत्काल IRCTC को सौंप दी। अस्थायी रूप से यात्रियों को निर्बाध कैटरिंग सेवा सुनिश्चित करने के लिए रेलवे ने कुछ निजी कंपनियों को भी शामिल किया है। इनमें फूड वर्ल्ड, एक्सप्रेस फूड्स, संकल्प कैटरर्स, और ए.एस. सेल्स कॉर्पोरेशन जैसी कंपनियाँ शामिल हैं। इन फर्मों को अस्थाई आधार पर सेवा देने की अनुमति दी गई है जब तक नया ठेका तय नहीं हो जाता।
किन ट्रेनों में हुआ बदलाव
दक्षिण रेलवे के अनुसार, जिन छह वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों का ठेका टर्मिनेट किया गया है, उनमें शामिल हैं –
- एमजीआर चेन्नई सेंट्रल–मैसुरु (20607/08)
- तिरुवनंतपुरम–कासरगोड़ (20633/34)
- तिरुवनंतपुरम–मेंगलुरु सेंट्रल (20631/32)
- एमजीआर चेन्नई सेंट्रल–कोयम्बटूर (20643/44)
- चेन्नई इगमोर–तिरुनेलवेली (20665/66)
- एमजीआर चेन्नई सेंट्रल–विजयवाड़ा (20677/78)
इन सभी ट्रेनों में अब नए कैटरिंग प्रदाताओं द्वारा अस्थायी रूप से भोजन सेवा दी जा रही है।
क्या ब्लैकलिस्ट होगी कंपनी?
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या रेलवे दोषी कंपनी को ब्लैकलिस्ट करेगा? रेलवे की नीति के अनुसार, कोई भी कंपनी यदि बार-बार असंतोषजनक सेवा देती है तो उसे ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है। जिससे वह भविष्य में किसी भी रेलवे ठेके के लिए अयोग्य हो जाती है। फिलहाल, वृंदावन फूड्स को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है, लेकिन रेलवे सूत्रों का कहना है कि भविष्य में यह कदम उठाया जा सकता है।
वंदे भारत एक्सप्रेस देश की सबसे आधुनिक और प्रतिष्ठित ट्रेनों में से एक है। ऐसे में उसमें परोसे जाने वाले खाने की गुणवत्ता पर सवाल उठना निश्चित रूप से चिंता का विषय है। यात्रियों की शिकायतों के बाद दक्षिण रेलवे की यह कार्रवाई न केवल जवाबदेही तय करने का कदम है बल्कि अन्य कैटरिंग कंपनियों के लिए भी एक स्पष्ट संदेश है कि गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा।