देश के बैंकों में हजारों करोड़ रुपये ऐसे पड़े हैं, जिन पर अब तक किसी ने दावा नहीं किया है। यह रकम उन खातों की है, जो लंबे समय से निष्क्रिय हैं या जिनके मालिकों को पता ही नहीं है कि उनके नाम पर कहीं पैसा जमा है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के मुताबिक, ब्याज सहित बैंकों में पड़ी बिना दावे वाली कुल जमा राशि करीब ₹85,000 करोड़ तक पहुंच चुकी है। हालांकि राहत की बात यह है कि सरकार और नियामकों की ओर से चलाए गए विशेष अभियानों के बाद अब लोग तेजी से अपना पैसा वापस पा रहे हैं। दिसंबर महीने में अकेले ₹1,043 करोड़ रुपये सही दावेदारों को लौटाए गए हैं, जो पहले के मुकाबले कई गुना ज्यादा है।
दावे की रकम में आई जबरदस्त तेजी
आरबीआई के डिप्टी गवर्नर एस सी मुर्मु के अनुसार, बिना दावे वाली जमा राशि लौटाने की रफ्तार में बीते कुछ महीनों में बड़ा उछाल देखने को मिला है। जहां पहले हर महीने औसतन 100 से 200 करोड़ रुपये ही लौटाए जा रहे थे, वहीं अब यह आंकड़ा कई गुना बढ़ चुका है। उन्होंने बताया कि नवंबर में करीब ₹802 करोड़ और अक्टूबर में ₹759 करोड़ रुपये लोगों को लौटाए गए थे, जबकि दिसंबर में यह रकम ₹1,043 करोड़ तक पहुंच गई। आरबीआई को उम्मीद है कि जनवरी के आंकड़े सामने आने के बाद यह साफ हो जाएगा कि यह ट्रेंड आगे भी जारी रहेगा और ज्यादा से ज्यादा लोग अपना फंसा पैसा वापस पा सकेंगे।
“आपकी पूंजी, आपका अधिकार” अभियान से बदली तस्वीर
बिना दावे वाली रकम को सही मालिकों तक पहुंचाने के लिए दिसंबर में केंद्र सरकार ने “आपकी पूंजी, आपका अधिकार” नाम से एक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया। इस अभियान का मकसद लोगों को यह बताना है कि अगर उनके नाम पर बैंक जमा, बीमा क्लेम, शेयर, म्यूचुअल फंड या पेंशन की रकम फंसी है, तो वे उसे आसानी से कैसे निकाल सकते हैं।
इस पहल के तहत अलग-अलग वित्तीय नियामकों ने मिलकर लोगों को जागरूक करने और दावा प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में कदम उठाए हैं। इसका असर यह हुआ कि महज दो महीनों में करीब ₹2,000 करोड़ की बिना दावे वाली रकम सही लोगों तक पहुंच पाई।
RBI, SEBI और IRDAI की संयुक्त पहल
इस अभियान में आरबीआई के साथ-साथ सेबी, आईआरडीएआई, पीएफआरडीए और आईईपीएफए जैसे प्रमुख नियामक शामिल हैं। इन संस्थाओं ने अपने-अपने प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को बिना दावे वाली परिसंपत्तियों का पता लगाने और उन्हें क्लेम करने की सुविधा दी है। आरबीआई का “उद्गम” पोर्टल बैंकों में पड़ी बिना दावे वाली जमा राशि खोजने में मदद करता है। वहीं, आईआरडीएआई का “बीमा भरोसा” प्लेटफॉर्म बीमा से जुड़ी बिना दावे वाली रकम के लिए है और सेबी का “मित्र” पोर्टल म्यूचुअल फंड व अन्य निवेश से जुड़े दावों में मदद करता है। इन सभी मंचों ने मिलकर आम नागरिकों के लिए प्रक्रिया को काफी आसान बना दिया है।
ऐसे चेक करें आपका पैसा कहीं फंसा तो नहीं
अगर आपको लगता है कि आपके या आपके परिवार के किसी सदस्य के नाम पर कोई पुराना बैंक खाता या जमा राशि हो सकती है, तो आप आरबीआई के “उद्गम” पोर्टल पर जाकर अपना नाम या जरूरी जानकारी डालकर सर्च कर सकते हैं। यहां आपको यह पता चल जाएगा कि आपके नाम पर किसी बैंक में कोई बिना दावे वाली राशि तो नहीं पड़ी है। अगर जानकारी मिल जाती है, तो संबंधित बैंक से संपर्क करके जरूरी दस्तावेज जमा करने होते हैं। इसके बाद सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने पर पैसा आपके खाते में ट्रांसफर कर दिया जाता है।
अब तक कितनी रकम लौटाई गई?
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस अभियान और प्रोत्साहनों के चलते आरबीआई समेत सभी नियामकों ने मिलकर अब तक करीब ₹5,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिना दावे वाली रकम सही दावेदारों को लौटाई है। लोकसभा में वित्त राज्य मंत्री ने भी बताया कि वित्त वर्ष 2025 तक बैंकों में बिना दावे वाली कुल जमा राशि करीब ₹74,580 करोड़ थी। वहीं, इसी वित्त वर्ष में बैंकों ने करीब ₹1,818 करोड़ रुपये लोगों को लौटाए।
कई बार लोगों को अपने पुराने खातों, निवेश या बीमा पॉलिसी के बारे में याद ही नहीं रहता। कुछ मामलों में खाताधारक की मृत्यु के बाद परिवार को इन जमाओं की जानकारी नहीं मिल पाती। ऐसे में पैसा सालों तक बैंक या अन्य संस्थानों में बिना दावे के पड़ा रहता है। सरकार और नियामकों का मकसद यही है कि लोगों तक उनकी मेहनत की कमाई पहुंचे। अगर आम लोग जागरूक होकर अपने पुराने खातों और निवेश की समय-समय पर जांच करें, तो इस तरह की फंसी हुई रकम को आसानी से वापस पाया जा सकता है।