सरकार ने LIC में 6.5% स्टेक बिक्री का ऐलान किया है (via OFS)। Floor price, bidding schedule और SEBI नियमों की पूरी जानकारी हिंदी में पढ़ें।

भारत सरकार ने लॉन्च किया LIC का बड़ा स्टेक सेल: 6.5% OFS की पूरी जानकारी
भारत सरकार ने लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) में 6.5% तक की इक्विटी स्टेक बेचने की आधिकारिक घोषणा की है। यह विनिवेश (divestment) Offer for Sale (OFS) के जरिए किया जा रहा है। इस बड़े वित्तीय कदम का मुख्य उद्देश्य लगभग ₹31,410 करोड़ ($3.29 billion) जुटाना है। मई 2022 के ऐतिहासिक Initial Public Offering (IPO) के बाद, सरकारी स्वामित्व वाली इस दिग्गज इंश्योरेंस कंपनी में सरकार की यह पहली इक्विटी शेयर बिक्री (equity dilution) है।
यह कदम सरकार की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (public sector enterprises) में अपनी होल्डिंग्स को संतुलित कर रही है और आम जनता की भागीदारी को बढ़ा रही है।
LIC OFS स्टेक सेल की मुख्य बातें
वित्त मंत्रालय ने इस Offer for Sale के लिए ₹382 प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस (Floor Price) तय किया है। यह फ्लोर प्राइस, इस घोषणा से ठीक पहले LIC के बाजार में बंद हुए शेयर मूल्य (closing market price) की तुलना में लगभग 10% के डिस्काउंट पर है। यह डिस्काउंट इसलिए दिया गया है ताकि संस्थागत (institutional) और रिटेल (retail) दोनों तरह के निवेशक इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा ले सकें।
प्रमुख वित्तीय बिंदु:
- कुल ऑफर की गई स्टेक: 6.5% तक की इक्विटी स्टेक
- फ्लोर प्राइस: ₹382 प्रति शेयर
- अनुमानित कुल मूल्य: लगभग ₹31,410 करोड़ ($3.29 billion)
- लेनदेन का तरीका (Mechanism): स्टॉक एक्सचेंज बिडिंग के जरिए Offer for Sale (OFS)
ऑफर स्ट्रक्चर और टाइमलाइन का विवरण
एक ही दिन में बाजार की लिक्विडिटी पर अत्यधिक दबाव न पड़े, इसके लिए OFS को एक बेस ऑफर और ओवरसब्सक्रिप्शन (ग्रीनशू) ऑप्शन के रूप में विभाजित किया गया है।
1. बेस ऑफर बनाम ग्रीनशू ऑप्शन
- बेस ऑफर साइज: शुरुआती पेशकश 2% इक्विटी स्टेक की है, जिसका कुल मूल्य लगभग ₹9,665 करोड़ है।
- ग्रीनशू ऑप्शन (Greenshoe Option): बाजार में अधिक मांग होने की स्थिति में, सरकार के पास अतिरिक्त 4.5% इक्विटी स्टेक बेचने का विकल्प सुरक्षित है, जिसका मूल्य लगभग ₹21,745 करोड़ है। इन दोनों को मिलाकर कुल स्टेक बिक्री 6.5% हो जाती है।
2. बिडिंग की समय-सीमा (Timeline)
विभिन्न निवेशक श्रेणियों के लिए बिडिंग प्रक्रिया दो दिनों के शेड्यूल में तय की गई है:
- संस्थागत निवेशक (Institutional Investors): OFS नॉन-रिटेल खरीदारों (जैसे म्यूचुअल फंड्स, Foreign Portfolio Investors – FPIs, और वित्तीय संस्थान) के लिए मंगलवार को खुलेगा।
- रिटेल निवेशक (Retail Investors): व्यक्तिगत रिटेल निवेशकों के लिए बिडिंग विंडो बुधवार को खुलेगी, जिससे उन्हें रियायती फ्लोर प्राइस पर शेयर खरीदने का अवसर मिलेगा।
SEBI के नियमों का पालन है मुख्य उद्देश्य
इस स्टेक बिक्री का एक मुख्य उद्देश्य LIC के इक्विटी ढांचे को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के नियमों के अनुकूल बनाना है।
SEBI के नियमों के अनुसार, सभी लिस्टेड कंपनियों को चरणबद्ध तरीके से 25% मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग (MPS) का स्तर बनाए रखना अनिवार्य है। LIC के विशाल मार्किट कैपिटलाइजेशन को देखते हुए, इस लक्ष्य तक पहुँचने के लिए सरकार को कई चरणों में अपनी हिस्सेदारी कम करनी होगी। इस OFS के माध्यम से सरकार ने LIC के शेयरों का फ्री-फ्लोट बढ़ाने, बाजार की लिक्विडिटी में सुधार करने और नियामक सीमाओं को समय पर पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है।
यह कदम कोचीन शिपयार्ड, IRFC, NHPC और कोल इंडिया जैसे अन्य प्रमुख सार्वजनिक उपक्रमों में किए गए सफल विनिवेश के बाद आया है, जिनसे सरकारी खजाने को महत्वपूर्ण राजस्व प्राप्त हुआ था।
बाजार की प्रतिक्रिया और निवेशकों पर प्रभाव
OFS के माध्यम से रियायती दर पर शेयर बिक्री से अक्सर अल्पकालिक (short-term) रूप से शेयर की कीमतों में थोड़ा उतार-चढ़ाव देखा जाता है, क्योंकि सेकेंडरी मार्केट अतिरिक्त शेयर सप्लाई को एब्जॉर्ब करता है। हालांकि, बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यह डिस्काउंट दीर्घकालिक संस्थागत और रिटेल निवेशकों के लिए खरीदारी का एक शानदार अवसर (entry window) प्रदान करता है।
बाजार में जारी अस्थिरता के बावजूद—जहाँ निफ्टी 50 जैसे बेंचमार्क में गिरावट देखी गई थी—LIC के शेयर प्रदर्शन में इस वर्ष अपेक्षाकृत स्थिरता बनी रही है। पब्लिक फ्लोट बढ़ने से शेयर की लिक्विडिटी बढ़ेगी, लंबी अवधि में शेयरों की कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव कम होगा, और भारतीय पूंजी बाजार में निवेशकों का विश्वास और मजबूत होगा।