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The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation > ऑटो/टेक > वंदे भारत में कच्चा पराठा मिलने पर कैटरिंग ठेकेदार पर 2 लाख का जुर्माना
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वंदे भारत में कच्चा पराठा मिलने पर कैटरिंग ठेकेदार पर 2 लाख का जुर्माना

Last updated: 21/08/2026 7:05 PM
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Manu Tiwari
ByManu Tiwari
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वंदे भारत एक्सप्रेस में कच्चा पराठा मिलने पर कैटरिंग ठेकेदार पर 2 लाख रुपये का जुर्माना
वंदे भारत एक्सप्रेस में कच्चा पराठा मिलने की शिकायत के बाद IRCTC ने कैटरिंग लाइसेंसधारी पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।
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भारतीय रेलवे की प्रीमियम ट्रेनों में यात्रियों को मिलने वाले खाने की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर सवाल उठे हैं। वाराणसी-बनारस से नई दिल्ली जाने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस में एक यात्री को कच्चा पराठा परोसे जाने की शिकायत के बाद रेलवे और आईआरसीटीसी ने तत्काल कार्रवाई की। शिकायत सामने आने के बाद संबंधित कैटरिंग लाइसेंसधारी पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। इसके अलावा बेस किचन में खाद्य गुणवत्ता की निगरानी करने वाली एजेंसी पर भी 20 हजार रुपये की पेनल्टी लगाई गई।

सोशल मीडिया शिकायत पर तुरंत कार्रवाई

मामला 16 अगस्त 2026 का है। ट्रेन नंबर 22435 वाराणसी-नई दिल्ली वंदे भारत एक्सप्रेस में सफर कर रहे एक यात्री को भोजन में परोसा गया पराठा कच्चा मिला। यात्री ने खाने के स्वाद और गुणवत्ता को लेकर सोशल मीडिया पर शिकायत की और अपनी पोस्ट में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को भी टैग किया।

शिकायत सामने आते ही रेलवे ने मामले का संज्ञान लिया। यात्री को तत्काल दूसरा भोजन उपलब्ध कराया गया। इसके बाद मामले की जांच की गई और कैटरिंग सेवा से जुड़े लाइसेंसधारी के खिलाफ कार्रवाई की गई।

कैटरिंग ठेकेदार पर 2 लाख रुपये की कार्रवाई

जांच के बाद आईआरसीटीसी ने संबंधित कैटरिंग लाइसेंसधारी पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। वहीं, जिस एजेंसी पर बेस किचन में भोजन की गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा की निगरानी की जिम्मेदारी थी, उस पर 20 हजार रुपये की अतिरिक्त पेनल्टी लगाई गई।

रेल मंत्रालय की ओर से कहा गया कि कार्रवाई का उद्देश्य यात्रियों को बेहतर और सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराना तथा कैटरिंग सेवाओं में जवाबदेही सुनिश्चित करना है। यह मामला रेलवे की शिकायत निवारण व्यवस्था के जरिए यात्री की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई का भी उदाहरण बना है।

वंदे भारत में खाने की गुणवत्ता पर फिर चर्चा

वंदे भारत और अन्य प्रीमियम ट्रेनों में कैटरिंग सेवाएं यात्रियों के अनुभव का अहम हिस्सा हैं। ऐसे में भोजन की गुणवत्ता, साफ-सफाई और निर्धारित मानकों का पालन रेलवे के लिए महत्वपूर्ण है। आईआरसीटीसी अपने आधिकारिक eCatering प्लेटफॉर्म पर भी अधिकृत विक्रेताओं के इस्तेमाल और खाद्य गुणवत्ता की निगरानी पर जोर देता है।

यात्रियों के लिए यह भी जरूरी है कि ट्रेन में भोजन लेते समय अधिकृत कैटरिंग सेवा का ही इस्तेमाल करें। किसी तरह की समस्या होने पर शिकायत दर्ज कराना रेलवे और संबंधित एजेंसियों को कार्रवाई का अवसर देता है।

ठेके को लेकर भी सामने आया विवाद

इस मामले में कैटरिंग ठेकेदार को लेकर कानूनी विवाद की बात भी सामने आई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, संबंधित ठेकेदार का अनुबंध पहले समाप्त किए जाने का मामला अदालत तक पहुंचा था और बाद की कानूनी कार्यवाही के कारण सेवा जारी रहने की स्थिति बनी रही। हालांकि, इस संबंध में अलग-अलग अदालती मामलों और आदेशों को एक-दूसरे से अलग करके देखना जरूरी है। दिल्ली हाई कोर्ट के रिकॉर्ड में रेलवे कैटरिंग से जुड़े कई अलग-अलग अनुबंध विवाद दर्ज हैं।

इसलिए केवल किसी एक अदालती आदेश के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि मौजूदा कैटरिंग सेवा की पूरी कानूनी स्थिति क्या है। इस मामले में संबंधित अनुबंध और सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के आधिकारिक रिकॉर्ड को देखना जरूरी है।

यात्रियों के लिए क्या है अहम?

रेलवे की इस कार्रवाई से साफ है कि भोजन की गुणवत्ता से जुड़ी शिकायतों को अब गंभीरता से लिया जा रहा है। कच्चा, खराब या मानकों के अनुरूप नहीं मिलने वाला भोजन यात्रियों की सेहत और यात्रा के अनुभव दोनों को प्रभावित कर सकता है।

आईआरसीटीसी के आधिकारिक eCatering प्लेटफॉर्म के मुताबिक, यात्रियों को अधिकृत पार्टनर्स के जरिए भोजन उपलब्ध कराया जाता है और गुणवत्ता की निगरानी की जाती है।

कुल मिलाकर, वंदे भारत में कच्चा पराठा मिलने की शिकायत पर 2 लाख रुपये का जुर्माना और बेस किचन की निगरानी एजेंसी पर 20 हजार रुपये की पेनल्टी रेलवे की ओर से कैटरिंग सेवाओं में लापरवाही के खिलाफ सख्त कार्रवाई का संकेत देती है। आने वाले समय में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए भोजन की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करना महत्वपूर्ण होगा।

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