केंद्र सरकार ने मुश्किल और गहरे समुद्री क्षेत्रों से निकलने वाली नेचुरल गैस के लिए बड़ी राहत का ऐलान किया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तहत आने वाले पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) ने डीपवॉटर और कठिन क्षेत्रों से उत्पादित गैस की अधिकतम कीमत यानी सीलिंग बढ़ाकर 9.89 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (MMBtu) कर दी है। नई कीमत 1 अक्टूबर 2026 से 31 मार्च 2027 तक छह महीने के लिए लागू रहेगी।
इससे पहले इन मुश्किल और गहरे समुद्री क्षेत्रों की गैस के लिए सीलिंग कीमत 8.90 डॉलर प्रति MMBtu थी। यानी सरकार ने अधिकतम अनुमत कीमत में करीब 99 सेंट प्रति MMBtu की बढ़ोतरी की है। माना जा रहा है कि इस फैसले से देश में डीपवॉटर गैस उत्पादन और नए निवेश को बढ़ावा मिल सकता है।
रिलायंस और BP जैसी कंपनियों को राहत
भारत में कृष्णा-गोदावरी यानी KG बेसिन के KG-D6 जैसे गहरे समुद्री क्षेत्रों से गैस का उत्पादन किया जाता है। रिलायंस इंडस्ट्रीज और ब्रिटिश पेट्रोलियम (BP) जैसी कंपनियां इन क्षेत्रों में गैस उत्पादन से जुड़ी हैं।
डीपवॉटर गैस प्रोजेक्ट्स में समुद्र की गहराई, अत्याधुनिक तकनीक और जटिल उत्पादन प्रक्रिया के कारण लागत सामान्य गैस क्षेत्रों की तुलना में अधिक होती है। ऐसे में गैस की सीलिंग कीमत बढ़ने से उत्पादकों को बेहतर आर्थिक रिटर्न मिलने की संभावना है।
सरकार की मौजूदा नीति के तहत मुश्किल और गहरे समुद्री क्षेत्रों से निकलने वाली गैस की कीमत तय करने की स्वतंत्रता उत्पादकों को दी गई है। हालांकि, कंपनियां सरकार की ओर से तय की गई अधिकतम सीलिंग से ऊपर कीमत नहीं रख सकतीं।
ONGC और OIL की पुरानी गैस के लिए अलग नियम
वहीं, सरकारी कंपनियों ONGC और ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) के पुराने यानी लीगेसी गैस क्षेत्रों के लिए कीमत तय करने की व्यवस्था अलग है। इन क्षेत्रों की गैस की कीमत एडमिनिस्ट्रेटिव प्राइस मैकेनिज्म यानी APM के तहत तय की जाती है।
अक्टूबर 2026 के लिए APM गैस की गणना की गई कीमत 11.22 डॉलर प्रति MMBtu है, लेकिन सरकारी कैप के कारण इसका वास्तविक अधिकतम दाम 7 डॉलर प्रति MMBtu तक सीमित है। यह गैस मुख्य रूप से प्राथमिकता वाले क्षेत्रों, जैसे CNG और PNG की आपूर्ति करने वाले सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क, फर्टिलाइजर कंपनियों और बिजली उत्पादन इकाइयों को दी जाती है।
नए कुओं के लिए 10% तक प्रीमियम
सरकार ने ONGC और OIL के पुराने या नॉमिनेशन ब्लॉकों में नए कुओं से निकलने वाली गैस के लिए प्रोत्साहन भी दिया है। इसके तहत कंपनियों को मौजूदा APM कीमत पर 10 प्रतिशत तक अतिरिक्त प्रीमियम लेने की अनुमति है, हालांकि यह भी निर्धारित सीलिंग के दायरे में रहेगा।
अक्टूबर में 7 डॉलर प्रति MMBtu की सीमा को देखते हुए नए कुओं की गैस की प्रभावी कीमत अधिकतम 7.70 डॉलर प्रति MMBtu तक हो सकती है।
सरकार का लक्ष्य घरेलू गैस उत्पादन बढ़ाना, नए हाइड्रोकार्बन भंडार की खोज को प्रोत्साहित करना और देश की आयातित गैस पर निर्भरता कम करना है।
कुल मिलाकर, डीपवॉटर गैस की सीलिंग 9.89 डॉलर प्रति MMBtu करने का फैसला मुश्किल गैस क्षेत्रों में निवेश के लिए सकारात्मक माना जा रहा है। इससे उत्पादन बढ़ने और आने वाले समय में देश की घरेलू प्राकृतिक गैस उपलब्धता मजबूत होने की उम्मीद है।