केंद्र सरकार ने देश के स्टील और एनर्जी सेक्टर से जुड़े अहम फैसले लिए हैं। एक तरफ सरकार ने स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) और NMDC को विदेशों में खनिज संपत्तियों की संभावनाएं तलाशने को कहा है, वहीं दूसरी ओर मुश्किल और गहरे समुद्री क्षेत्रों से निकलने वाली नेचुरल गैस की सीलिंग कीमत बढ़ाकर 9.89 डॉलर प्रति MMBtu कर दी गई है। दोनों फैसलों का मकसद घरेलू उद्योग के लिए कच्चे माल और ऊर्जा की उपलब्धता मजबूत करना है।
SAIL और NMDC को विदेश में खनन संपत्तियां तलाशने का निर्देश
इस्पात मंत्रालय ने SAIL और NMDC से विदेशों में खनिज संपत्तियों की तलाश करने को कहा है। मंत्रालय का मानना है कि इससे भारतीय स्टील कंपनियों को भविष्य में जरूरी कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी और लागत पर भी नियंत्रण रखा जा सकेगा।
स्टील उत्पादन के लिए लौह अयस्क और कोकिंग कोल प्रमुख कच्चे माल हैं। भारत में लौह अयस्क की उपलब्धता पर्याप्त है, लेकिन भारतीय स्टील कंपनियां अपनी कोकिंग कोल जरूरत का करीब 85 से 90 फीसदी हिस्सा आयात करती हैं। ऑस्ट्रेलिया और मोजाम्बिक कोकिंग कोल के प्रमुख स्रोत हैं।
निजी कंपनियां भी विदेशों में खनिज संपत्तियों पर निवेश बढ़ा रही हैं। JSW Steel ने विदेशों में कोकिंग कोल की संपत्तियां खरीदी हैं और अपनी कच्चे माल की जरूरत का बड़ा हिस्सा खुद की खदानों से पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
NMDC भी लौह अयस्क के अलावा दूसरे खनिजों में विस्तार करना चाहती है। कंपनी ने 2030 तक अपनी कुल आय में अन्य खनिजों की हिस्सेदारी कम से कम 20 फीसदी करने का लक्ष्य रखा है।
डीपवॉटर गैस की सीलिंग बढ़कर 9.89 डॉलर
एनर्जी सेक्टर में भी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के अनुसार, 1 अक्टूबर 2026 से 31 मार्च 2027 तक मुश्किल और गहरे समुद्री क्षेत्रों से निकलने वाली गैस की अधिकतम कीमत 9.89 डॉलर प्रति MMBtu होगी। इससे पहले यह सीमा 8.90 डॉलर थी।
इस फैसले से रिलायंस इंडस्ट्रीज और BP जैसी कंपनियों को फायदा मिल सकता है, जो कृष्णा-गोदावरी बेसिन के KG-D6 जैसे डीपवॉटर क्षेत्रों में गैस उत्पादन करती हैं।
गहरे समुद्र में गैस उत्पादन की लागत सामान्य गैस क्षेत्रों की तुलना में अधिक होती है। ऐसे में सीलिंग बढ़ने से कंपनियों को बेहतर रिटर्न मिलने और नए निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
ONGC और OIL की APM गैस के नियम अलग
ONGC और OIL के पुराने गैस क्षेत्रों के लिए APM यानी Administrative Price Mechanism के तहत अलग व्यवस्था लागू है। अक्टूबर के लिए APM गैस की गणना कीमत 11.22 डॉलर प्रति MMBtu है, लेकिन सरकारी कैप के कारण इसका वास्तविक अधिकतम दाम 7 डॉलर प्रति MMBtu है।
यह गैस मुख्य रूप से CNG-PNG, फर्टिलाइजर और बिजली क्षेत्र जैसे प्राथमिकता वाले सेक्टरों को दी जाती है।
वहीं, ONGC और OIL के नए कुओं से निकलने वाली गैस पर मौजूदा APM कीमत के ऊपर 10 फीसदी तक प्रीमियम की अनुमति है। 7 डॉलर की सीमा के आधार पर इसकी प्रभावी अधिकतम कीमत 7.70 डॉलर प्रति MMBtu तक हो सकती है।
सरकार के इन फैसलों से एक ओर स्टील कंपनियों के लिए कच्चे माल की लंबी अवधि की उपलब्धता मजबूत करने की कोशिश दिखती है, वहीं दूसरी ओर डीपवॉटर गैस उत्पादन और घरेलू ऊर्जा आपूर्ति बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।