पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब विमानन क्षेत्र की लागत पर भी दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल और उससे जुड़े उत्पादों की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच विमान ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) महंगा हुआ है। बढ़ती ईंधन लागत को लेकर केंद्र सरकार एयरलाइंस और तेल मार्केटिंग कंपनियों के साथ बातचीत कर रही है।
नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि पश्चिम एशिया की स्थिति विमान ईंधन की कीमतों पर दबाव डाल रही है। उन्होंने बताया कि मंत्रालय इस मामले में एयरलाइंस और तेल कंपनियों के साथ लगातार चर्चा कर रहा है, ताकि बढ़ती लागत के असर को समझा जा सके और जरूरी कदमों पर विचार किया जा सके।
एयरलाइंस के लिए क्यों अहम है ATF की कीमत?
किसी भी एयरलाइन के परिचालन खर्च में ईंधन की भूमिका काफी बड़ी होती है। ATF की लागत आम तौर पर एयरलाइन के कुल ऑपरेशनल खर्च का करीब 40 फीसदी तक हो सकती है। ऐसे में ईंधन की कीमत में मामूली बदलाव भी एयरलाइन के मुनाफे और टिकट किराए पर असर डाल सकता है।
पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अस्थिरता देखने को मिली है। इसका असर भारत में विमान ईंधन की कीमतों पर भी पड़ा है। हाल की बढ़ोतरी के बाद ATF की कीमतें पिछले कई वर्षों के ऊंचे स्तरों के करीब पहुंच गई हैं।
देश की प्रमुख एयरलाइन इंडिगो ने भी ईंधन की लागत में बदलाव को लेकर चिंता जताई है। कंपनी के अनुसार, हाल के महीनों में ATF की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव रहा है। खास तौर पर क्षेत्रीय तनाव के बाद ईंधन की लागत में तेज वृद्धि दर्ज की गई है।
इंडिगो ने बढ़ाया फ्यूल सरचार्ज
बढ़ते ईंधन खर्च का असर यात्रियों के टिकट पर भी पड़ना शुरू हो गया है। इंडिगो ने सोमवार को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने की घोषणा की। यह शुल्क ईंधन की अतिरिक्त लागत की भरपाई के लिए टिकट के किराए में जोड़ा जाता है।
फ्यूल सरचार्ज बढ़ने का सीधा असर हवाई यात्रा की कुल कीमत पर पड़ सकता है। खासकर उन यात्रियों पर इसका प्रभाव अधिक महसूस हो सकता है जो लंबी दूरी की उड़ानों या बार-बार हवाई यात्रा करते हैं।
आगे क्या हो सकता है?
सरकार की बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब विमानन कंपनियां पहले से ही परिचालन लागत को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही हैं। यदि वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता लंबे समय तक बनी रहती है, तो एयरलाइंस के सामने ईंधन खर्च को संभालने की चुनौती और बढ़ सकती है।
फिलहाल सरकार, तेल कंपनियों और एयरलाइंस के बीच बातचीत पर नजर रहेगी। ATF की कीमतों में आगे होने वाला बदलाव यह तय करने में अहम भूमिका निभाएगा कि यात्रियों के हवाई किराए पर कितना अतिरिक्त दबाव पड़ता है।