भारतीय बैंकिंग सेक्टर के लिए वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही यानी जुलाई-सितंबर 2026 के नतीजे मजबूत रहने के संकेत मिल रहे हैं। कर्ज की मांग तेज बनी हुई है, जमा में बढ़ोतरी हो रही है और फंसे कर्ज यानी NPA के मोर्चे पर भी फिलहाल बड़ा दबाव नहीं दिख रहा है। ऐसे में बड़े प्राइवेट बैंकों के साथ सरकारी और छोटे बैंकों की कमाई में भी अच्छी वृद्धि की उम्मीद है।
18.8% बढ़ी कर्ज की मांग
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की रिपोर्ट के मुताबिक, 15 सितंबर 2026 तक बैंकिंग सिस्टम में कर्ज की वृद्धि सालाना आधार पर 18.8 प्रतिशत रही। रिटेल ग्राहकों की मजबूत मांग, MSME सेक्टर की बढ़ती उधारी और कंपनियों की कर्ज जरूरत ने बैंकिंग क्रेडिट को सहारा दिया है।
पूरे वित्त वर्ष 2027 में बैंकिंग सिस्टम की कर्ज वृद्धि करीब 15.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। ब्रोकरेज के दायरे में आने वाले प्राइवेट बैंकों का कुल मुनाफा दूसरी तिमाही में सालाना आधार पर करीब 24 प्रतिशत बढ़ सकता है। इनकी शुद्ध ब्याज आय में भी करीब 13 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है।
ICICI और Axis पर नजर
बड़े प्राइवेट बैंकों में ICICI Bank के नतीजे मजबूत रहने की उम्मीद है। बैंक की शुद्ध ब्याज आय 16.8 प्रतिशत बढ़कर करीब 25,151 करोड़ रुपये और मुनाफा 18.5 प्रतिशत बढ़कर लगभग 14,648 करोड़ रुपये रह सकता है।
Axis Bank के मुनाफे में करीब 42.7 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। वहीं Kotak Mahindra Bank का मुनाफा लगभग 31.9 प्रतिशत बढ़ सकता है।
इसके मुकाबले HDFC Bank की मुनाफा वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी रहने का अनुमान है। बैंक की शुद्ध ब्याज आय करीब 8.9 प्रतिशत बढ़ सकती है, जबकि मुनाफे में लगभग 3.9 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है।
छोटे बैंकों में बड़ी ग्रोथ
कुछ छोटे और मझोले बैंकों के नतीजों में प्रतिशत के लिहाज से ज्यादा बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। AU Small Finance Bank का मुनाफा करीब 53.6 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है। Federal Bank के मुनाफे में करीब 32.3 प्रतिशत और RBL Bank में लगभग 189 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है।
IDFC First Bank का मुनाफा करीब 205.7 प्रतिशत बढ़कर 1,077 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। हालांकि, इन तेज वृद्धि दरों में पिछले साल का कम आधार भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
सरकारी बैंकों से भी उम्मीद
सरकारी बैंकों का कुल मुनाफा दूसरी तिमाही में सालाना आधार पर करीब 27 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है। SBI, Bank of Baroda और Indian Bank जैसे बैंकों को हिस्सेदारी बिक्री से होने वाले संभावित लाभ का भी फायदा मिल सकता है।
मार्जिन और एसेट क्वालिटी अहम
मजबूत कर्ज वृद्धि के बावजूद बैंकों के नेट इंटरेस्ट मार्जिन पर दबाव बना रह सकता है। बड़े प्राइवेट बैंकों के NIM में 8 से 20 बेसिस प्वाइंट तक गिरावट का अनुमान है। हालांकि, एसेट क्वालिटी में स्थिरता बैंकों के लिए राहत की बात है।
कुल मिलाकर, दूसरी तिमाही के नतीजे बैंकिंग सेक्टर की मजबूत तस्वीर पेश कर सकते हैं। आगे निवेशकों की नजर मुनाफे के साथ-साथ NIM, जमा वृद्धि और एसेट क्वालिटी पर रहेगी।