जीएसटी परिषद ने कारोबारियों और कंपनियों को राहत देने के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से जुड़े कई अहम बदलावों को मंजूरी दी है। गुरुवार को हुई जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में लिए गए फैसलों से कंपनियों के कई तरह के खर्च पर चुकाए गए जीएसटी का लाभ लेने का रास्ता साफ हुआ है। इससे कारोबार की लागत कम करने और नकदी प्रवाह बेहतर करने में मदद मिल सकती है।
स्वास्थ्य और जीवन बीमा पर मिलेगा ITC
नई व्यवस्था के तहत कंपनियां अपने कर्मचारियों के लिए खरीदे गए स्वास्थ्य और जीवन बीमा पर भुगतान किए गए जीएसटी का ITC ले सकेंगी। इसके अलावा मोबाइल नेटवर्क के लिए लगाए जाने वाले टेलीकॉम टावर और फैक्टरी के बाहर बिछाई गई पाइपलाइन जैसी कुछ सुविधाओं पर चुकाए गए टैक्स का भी लाभ मिल सकेगा।
कंपनियों की ओर से ग्राहकों को मुफ्त दिए जाने वाले सैंपल पर भी ITC का प्रावधान किया गया है। वहीं, कानून के तहत नष्ट किए जाने वाले एक्सपायर्ड सामान पर चुकाए गए टैक्स का लाभ भी कारोबारियों को मिल सकेगा।
होटल और रेस्तरां कारोबार को भी राहत
होटल, रेस्तरां और यात्री परिवहन से जुड़ी सेवाओं में भी ITC के नियमों में बदलाव किया गया है। उदाहरण के लिए, अगर कोई ट्रैवल एजेंट ग्राहक के लिए होटल का कमरा बुक करता है, तो उसे ITC का लाभ मिल सकेगा। इसमें एक रात के लिए 7,500 रुपये तक के होटल कमरे शामिल हैं।
रेस्तरां, खानपान और यात्री परिवहन जैसी सेवाओं को खरीदकर आगे बेचने वाले कारोबारियों को भी राहत मिलेगी। पहले इन सेवाओं पर 5 फीसदी GST लागू था, लेकिन ITC का लाभ नहीं मिलता था।
सेवाओं पर भी मिलेगा रिफंड
अगर किसी कंपनी को खरीद के समय अधिक GST देना पड़ता है और बिक्री के समय कम GST जमा करना होता है, तो उसका टैक्स क्रेडिट जमा होता रहता है। नई व्यवस्था में सामान के साथ-साथ सेवाओं पर चुकाए गए टैक्स का रिफंड भी मिल सकेगा। यह प्रावधान 1 नवंबर 2026 से लिए जाने वाले टैक्स क्रेडिट पर लागू होगा।
मशीनरी खरीदने पर बड़ी राहत
नई मशीनों और फैक्टरी उपकरणों पर भुगतान किए गए GST के रिफंड का प्रावधान भी किया गया है। इससे खासकर निर्यातकों और उन कारोबारियों को फायदा हो सकता है जिनका इनपुट टैक्स बिक्री पर देय टैक्स से अधिक रहता है।
हालांकि, यह रिफंड एक साथ नहीं मिलेगा। हर महीने कुल टैक्स क्रेडिट का 60वां हिस्सा वापस किया जा सकेगा। यह नियम 1 अप्रैल 2027 से लिए जाने वाले टैक्स क्रेडिट पर लागू होगा।
इसके अलावा, सही बिल, सामान की प्राप्ति और भुगतान जैसे सभी नियम पूरे करने वाले कारोबारियों को विक्रेता की गलती के कारण ITC से वंचित होने की स्थिति में राहत देने पर भी विचार किया जा रहा है। इसके लिए अधिकारियों की एक समिति तीन महीने में अपनी रिपोर्ट देगी।