नई दिल्ली। त्योहारों के मौसम में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर आम लोगों की चिंता बढ़ सकती है। ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की अर्थशास्त्री एलेक्जेंड्रा हरमन प्रसाद ने अनुमान जताया है कि केंद्र सरकार नवंबर 2026 में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी कर सकती है। हालांकि, यह केवल एक आर्थिक अनुमान है। सरकार की ओर से फिलहाल कीमतें बढ़ाने की आधिकारिक घोषणा के बिना इसे निश्चित फैसला नहीं माना जा सकता।
रिपोर्ट के मुताबिक, अगले साल कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में चुनाव प्रचार तेज होने से पहले नवंबर को ईंधन की कीमतों में बदलाव के लिए संभावित समय माना जा रहा है। यदि कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर परिवहन खर्च से लेकर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों तक देखने को मिल सकता है।
चुनाव से पहले कीमतें बढ़ने का अनुमान
ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की अर्थशास्त्री के आकलन के अनुसार, नवंबर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में होने वाली संभावित बढ़ोतरी मई में दर्ज 7.5 प्रतिशत की कुल वृद्धि के मुकाबले लगभग आधी हो सकती है। हालांकि, इस अनुमान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अगले साल गोवा, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और गुजरात समेत कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में ईंधन की कीमतों में बदलाव का समय आर्थिक और राजनीतिक, दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है।
पेट्रोल-डीजल महंगा हुआ तो बढ़ सकती है महंगाई
ईंधन की कीमतें बढ़ने का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। ट्रकों और दूसरे परिवहन साधनों का खर्च बढ़ने से खाद्य पदार्थों, रोजमर्रा के सामान और अन्य उत्पादों की कीमतों पर भी दबाव पड़ सकता है।
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी के कारण अक्टूबर-दिसंबर 2026 तिमाही में खुदरा महंगाई 6.2 प्रतिशत और 2027 की पहली तिमाही में 6.5 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। ये अनुमान हैं, वास्तविक महंगाई इससे अलग रह सकती है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का खुदरा महंगाई लक्ष्य 4 प्रतिशत है, जबकि इसके लिए 2 से 6 प्रतिशत का सहनशीलता दायरा निर्धारित है। यदि महंगाई 6 प्रतिशत से ऊपर जाती है, तो यह इस दायरे से बाहर होगी। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर नवंबर में ईंधन की कीमतें नहीं बढ़ती हैं, तो महंगाई के अनुमान में 10 से 30 बेसिस पॉइंट तक राहत मिल सकती है।
RBI की ब्याज दरों पर भी पड़ सकता है असर
महंगाई में लगातार बढ़ोतरी होने पर रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति के सामने चुनौती बढ़ सकती है। रिपोर्ट में रेपो रेट में आगे बढ़ोतरी की संभावना भी जताई गई है। हालांकि, ब्याज दरों पर अंतिम फैसला महंगाई, आर्थिक विकास और अन्य आर्थिक संकेतकों को ध्यान में रखकर RBI की मौद्रिक नीति समिति लेती है।
कुल मिलाकर, नवंबर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में संभावित बदलाव पर नजर बनी हुई है। फिलहाल उपभोक्ताओं को किसी निश्चित बढ़ोतरी के बजाय इसे एक अनुमान के तौर पर देखना चाहिए।